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सोलर माइक्रो ग्रिड के ज़रिए अंधेरे से मुक्त हुआ बिहार का धरनई गांव

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published July 20, 2014 20 Views
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7 Min Read
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BeyondHeadlines News Desk

धरनई, जहानाबाद : एक ऐसे समय में जब भारत के करीब 30 करोड़ लोग आधुनिक बिजली से वंचित हैं, जहानाबाद का एक छोटा सा गांव धरनई अंधेरे से मुक्ति पाते हुए आज ऊर्जा के मामले में स्वनिर्भर हो गया है.

आज एक समारोह में ग्रीनपीस द्वारा धरनई में स्थापित सौर ऊर्जा चालित माइक्रो ग्रिड की औपचारिक रूप से शुरुआत हुई. इस माइक्रो ग्रिड की क्षमता 100 किलोवाट है जो धरनई के 2,400 लोगों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध मुहैया करा रहा है. इस अनूठे मॉडल से बिहार में ग्रामीण विद्युतीकरण की दिशा में एक नये युग की शुरूआत हो गयी है.

चेहरे पर खुशी लिये धरनई निवासी कमल किशोर इस बारे में बताते हैं कि हमने बिजली हासिल करने के लिए पिछले 30 वर्षों में किताबी ज्ञान से लेकर हर उपाय आजमाने की ढ़ेरों कोशिशें की, लेकिन हमें उम्मीद की कोई किरण नहीं दिखी. एक ओर जहां हमारा देश भारत विकास के रास्ते पर कुलांचे मार रहा था, वहीं दूसरी ओर हम किरोसिन तेल से जलने वाले ढिबरी और दीये से लेकर महंगे डीजल जेनरेटर पर निर्भर रहने को विवश थे. अब हमने अपनी पहचान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर गांव के रुप में स्थापित कर ली है और देश की विकास रफ्तार के साथ हम क़दमताल कर सकते हैं.

राजधानी पटना से करीब 80 किलोमीटर दूर पटना-गया हाइवे पर स्थित धरनई माइक्रो ग्रिड अपनी तरह का इकलौता विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा उत्पादन मॉडल है, जो गांव के करीब 450 घर-परिवारों तथा 2200 की आबादी को करीब तीन दशक बाद आधुनिक बिजली उपलब्ध करा रहा है. 100 किलोवाट क्षमता में 70 किलोवाट क्षमता से जहां करीब 400 घरों और लगभग 50 दुकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्वच्छ व किफायती बिजली मिल रही है, वहीं इसी मॉडल के तहत 30 किलोवाट क्षमता से लैस 10 सोलर इरीगेशन पंप से खेतीबाड़ी की सिंचाई होने जा रही है.

यही नहीं 60 स्ट्रीट लाइट, दो स्कूलों, एक स्वास्थ्य केन्द्र, एक किसान प्रशिक्षण केन्द्र भी इसी माइक्रो ग्रिड से रोशन हो रहे हैं. दरअसल धरनई माइक्रो ग्रिड ने ग्रामीणों को न सिर्फ एक बेहतर जीवन मुहैया कराया है, बल्कि उनमें प्रगति की उम्मीद व महत्वाकांक्षा भी जगा दी है.

गौरतलब है कि दुनियाभर में बिजली से महरुम लोगों की विशाल आबादी भारत में ही निवास करती है, जो उसके ग्रामीण आबादी का एक तिहाई है. आधुनिक बिजली उपलब्ध कराने में कोयला संसाधन पर आधारित केंद्रीकृत ग्रिड सिस्टम भी नाकाम रहा है. ऐसे में बतौर विकल्प अक्षय संसाधनों पर आधारित विकेन्द्रीकृत तरीके से विस्तारित किये जानेवाले माइक्रो ग्रिड सततशील व विश्वसनीय बिजली उपलब्घ कराने की मुख्य संभावना बनते गये हैं.

धरनई में लगे माइक्रो ग्रिड जैसे मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा क्रांति के जरिये विकास के नये केन्द्र बनने को प्रेरित करेंगे. साथ ही, वे शहरी इलाकों की विभाजक रेखा को पाटेंगे.

विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा प्रणालियों ऐसे समाधान हैं, जो वर्तमान सरकार द्वारा साल 2019 तक सबों तक बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य को संभव बना सकते हैं.

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कर रहे ग्रीनपीस के कार्यकारी निदेशक समित आइक ने कहा कि जब सरकार चिंतित होकर सिविल सोसायटी संगठनों पर ऊर्जा परियोजनाओं की राह में रोड़ा अटकाने का दोषारोपन कर रही है, वैसे में धरनई जैसा गांव भी है, जिसने समावेशी ऊर्जा के एक वैकल्पिक मॉडल के जरिये खुद अपने ऊर्जा विकास पथ का निर्माण किया है.

कोयला संसाधन तथा नाभिकीय ऊर्जा कारखाने देश के धरनई जैसे गांवों तक बिजली मुहैया कराने में समर्थ नहीं हैं. न ही वे वैश्विक जलवायु समस्याओं के मुद्दों से निबटने और भारत द्वारा इस संबंध में घोषित की गयी प्रतिबद्धाताओं को पूरा करने में सक्षम है. समय आ गया है कि भारत अपनी ऊर्जा रणनीति की समीक्षा करे और सामाजिक व जलवायु संबंधी न्याय के लिए अक्षय ऊर्जा जैसे उपायों को प्राथमिकता दे.

इस मौके पर सीड और बेसिक्स जैसे साझेदार संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा करीब 25 गांवों के सामुदायिक नेताओं सहित लगभग 3,000 ग्रामीण उपस्थित थे.

दरअसल धरनई में स्थापित यह माइक्रो ग्रिड स्थानीय लोगों की मंजूरी व सक्रिय भागीदारी से संभव हुआ है. अभी यह भले 100 किलोवाट क्षमता की प्रणाली है, लेकिन इसकी विशेषता है कि लोगों की ज़रुरतों के अनुसार इसकी क्षमता आगे बढ़ायी जा सकती है.

यह पायलट परियोजना ग्रीनपीस के अलावा बेसिक्स (पटना) और सेंटर फॉर एनवॉयरोमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के साथ साझा तौर पर क्रियान्वित की जा रही है. बेसिक्स माइक्रो फाइनेंस और ग्रामीण आजीविका के विषय पर काम करने वाली संस्था है. वहीं, सीड पर्यावरण व ऊर्जा के मसले पर काम करने वाला एक नेटवर्किंग व थिंक टैंग संगठन है.

इस मौके पर मौजूद सीड से जुड़े नवीन मिश्रा ने कहा कि यह माइक्रो ग्रिड भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लड़खड़ाते विजन और पंगु नीति का एक सफल जवाब होने की मंशा रखता है. हम बिहार सरकार से विनती करते हैं कि वह इस मॉडल पर विचार कर इसके समूचे राज्य में अनुकरण पर ठोस कदम उठाये.

माइक्रो ग्रिड के औपचारिक उद्घाटन के दौरान ग्रामीणों की उल्लासपूर्ण भागीदारी व उनके सक्रिय समर्थन के बीच ग्रीनपीस ने बिहार सरकार से अपील की कि वह धरनई जैसे मॉडल को राज्य के अन्य बिजलीविहीन व अंधेरे को अभिशप्त गांवों में ऊर्जा क्रांति लाने के लिए व्यापक पैमाने पर लागू करे. साथ ही बिहार में स्वच्छ, किफायती और वैकल्पिक अक्षय ऊर्जा प्रणाली के प्रोत्साहन के लिए आवश्यक नियामकीय संरचना और विकास एजेंडे पर अमल कर सामने प्रस्तुत करे.

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