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गुजरात सरकार तीस्ता के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित है –साझा संस्कृति मंच

BeyondHeadlines News Desk

वाराणसी : ‘हम सभी सामाजिक संगठन के लोग प्रशासन द्वारा साजिशन सांप्रदायिक ताक़तों के इशारे पर गुजरात दंगे में क़त्ल कर दिए और उजाड़ दिए गए पीड़ितों के न्याय के लिए लड़ रही सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को साजिशन फ़ंसाने के कृत्य की कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं और यह भी कहते हैं कि इस लोकतांत्रिक देश में अराजकता का हर स्तर पर विरोध करेंगे और एकजुट होकर इस तरह की साजिश को नाकाम करने का पुरजोर प्रयास करेंगे.’

यह बातें आज वाराणसी के लहुराबीर स्थित होटल कामेश हट में साझा संस्कृति मंच के द्वारा तीस्ता सीतलवाड़, जावेद आनंद एवं उनके साथी के समर्थन में आयोजित प्रेस वार्ता में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता डॉ0 लेनिन रघुवंशी, डॉ0 संदीप पाण्डेय, फादर आनंद, डॉ0 मुनीजा खान, सुश्री श्रुति नागवंशी, डॉ0 मोहम्मद आरिफ व आनंद तिवारी ने संयुक्त रूप से मीडिया व देश की जनता के सामने रखा. इस प्रेस वार्ता इस पूरे मामले की व्याख्या भी की गई और साथ ही सरकार के समक्ष यह मांग भी रखी गई कि इस मामले में गुजरात सरकार के अलावा कहीं भी किसी भी ऐजंसी से जांच करवाया जाय. क्योंकि हमें ज्ञात है कि गुजरात की सरकार तीस्ता सीतलवाड़ के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित है और न्याय मिलने की उम्मीद कम लगती है.

आगे अपनी मांग इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि तीस्ता सीतलवाड़, जावेद आनंद व अन्य जांच में कहीं से बाधा नहीं डाल रहे हैं. इसलिए गिरफ्तारी पर रोक लगे. जिससे उनके अन्य सामाजिक कार्यो पर प्रभाव न पड़ सके. साथ ही हम मीडिया के लोगों से भी मांग करते हैं कि वो तीस्ता सीतलवाड़ के केस में एक पक्षीय न होकर दोनों का पक्ष प्रस्तुत करें, जिससे सामाजिक न्याय हो.

स्पष्ट रहे कि 2002 के गुजरात दंगो की लगातार पैरवी कर रही सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, जावेद आनंद एवं उनके साथी पर एक केस में गुजरात के माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम ज़मानत को ख़ारिज कर दिया. उसके बाद अहमदाबाद की क्राईम ब्रांच ने कुछ लोगों के द्वारा लगाये गये फर्जी आरोपों के आधार पर FIR दर्ज कर लिया. उसके बाद गुजरात पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए  मुंबई पहुंच गई. इसके बाद इन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सुनवाई की अगली तारीख 19 फरवरी, 2015 रखी है.

आज वाराणसी में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि तीस्ता व उनके साथियों पर लगाये गए आरोप बेबुनियाद हैं. माननीय गुजरात उच्च न्यायालय को 1500 पृष्ठों का प्रतिवाद (दस्तावेजों के साथ) दिया गया है. जिसे बिना देखे व जांच किये आंतरिक ज़मानत की याचिका को ख़ारिज कर देना न्याय संगत नहीं मालूम पड़ता है. लगाये गए सभी एक-एक आरोपों का जवाब तीस्ता सीतलवाड़ व जावेद आनंद द्वारा माननीय अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया है. उन पर संग्राहालय बनाने के नाम पर लिए गये धन के दुरुपयोग का आरोप है. जबकि संग्राहालय बनाने के नाम पर प्राप्त धन 4.6 लाख रुपये सबरंग ट्रस्ट में सुरक्षित जमा है. चूंकि संग्राहालय बनाने के लिए और धनराशि की आवश्यकता थी, जिसके लिए अपील की गयी थी. यह राशि अभी तक सबरंग ट्रस्ट में इकठ्ठा नहीं की जा सकी है.

उन्होंने यह भी बताया कि तीस्ता सीतलवाड़ के द्वारा गुजरात दंगे में पैरवी करने के कारण ही 107 दोषियों को अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा हुई है. जिसमें बड़े राजनैतिक नेता, आईपीएस अधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी हैं. अभी भी कुछ लोगों के खिलाफ अदालत में मामला लंबित है, जिसकी पैरवी तीस्ता द्वारा किया जा रहा है. जिसके कारण पूर्व में भी तीस्ता को सांप्रदायिक ताक़तो द्वारा धमकियां मिल रही थी कि इस केस में वे पैरबी बंद कर दें. जिसके बाद भी तीस्ता द्वारा लगातार पैरवी जारी रखी गयी. इसी कारण उनको साजिशन प्रशासन और राजनैतिक लोगों द्वारा कुछ पीडितों को बहला फुसलाकर पीडितों के ही माध्यम से झूठे केस में फसाया जा रहा है. यही नहीं, इसके पूर्व में भी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रशासन व राजनैतिक लोगों द्वारा झूठे केस में फंसाया गया है और फ़ंसाने की कोशिश की जाती रही है. कई सामाजिक कार्यकर्ता कई वर्ष झूठे केस के आरोप में जेल में बंद रहे है और बाद में अदालत ने उन्हें बाईज्जत बरी भी कर दिया है.

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