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BeyondHeadlines > बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी > तीस्ता सीतलवाड़ को साजिश के तहत फंसाने पर देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं की कड़े शब्दों में निन्दा
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तीस्ता सीतलवाड़ को साजिश के तहत फंसाने पर देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं की कड़े शब्दों में निन्दा

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published February 12, 2015 25 Views
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4 Min Read
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Lenin Raghuvanshi

2002 के गुजरात दंगो की लगातार पैरवी कर रही सामजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एक केस में आज गुजरात के माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम ज़मानत को ख़ारिज कर दिया. साथ ही साजिश के तहत अहमदाबाद की क्राईम ब्रांच ने कुछ लोगों द्वारा तीस्ता पर लगाये गए आरोप के आधार पर एफआईआर दर्ज कर लिया गया. उसके बाद तीस्ता को गिरफ़्तार करने के लिए गुजरात पुलिस मुंबई उनके घर पर भी पहुंच गई. यह अलग बात है कि मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू के नेतृत्व वाली पीठ, तीस्ता के अग्रिम ज़मानत की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर राज़ी हो गई है. साथ ही तीस्ता सीतलवाड, उनके पति जावेद आनंद की गिरफ़्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन की रोक लगा दी है.

चूंकि गुजरात दंगे में पैरवी करने के कारण ही 107 दोषियों को अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा हुई है. जिसमे बड़े राजनैतिक नेता, आईपीएस अधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी हैं. साथ अभी भी कुछ लोगों के खिलाफ अदालत में मामला लंबित है. जिसकी पैरवी तीस्ता द्वारा किया जा रहा है. जिसके कारण पूर्व में भी तीस्ता को सांप्रदायिक ताक़तें धमकियां दे रही थीं कि इस केस में पैरबी बंद कर दें. इसके बाद भी तीस्ता द्वारा लगातार पैरवी जारी रखी गयी. इसी कारण उनको साजिशन प्रशासन और राजनैतिक लोगों द्वारा कुछ पीड़ितों को बहला फुसलाकर पीडितों के ही माध्यम से झूठे केस में फंसाया जा रहा है.

इसके पूर्व में भी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रशासन व राजनैतिक लोगों द्वारा झूठे केस में फंसाया गया है या फंसाने की कोशिश की जाती रही है. साथ ही कई सामजिक कार्यकर्ता कई वर्ष तक झूठे केस के आरोप में जेल में बंद रहे हैं और अदालत ने उन्हें बाईज्ज़त बरी भी किया है.

हम सभी सामाजिक संगठन के लोग प्रशासन द्वारा साजिशन सांप्रदायिक ताक़तों के इशारे पर गुजरात दंगे में क़त्ल कर दिए और उजाड़ दिए गए पीडितों के न्याय के लिए लड़ रही एक सामजिक कार्यकर्ता को साजिशन फंसाने के इस कृत्य की कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं और यह भी कहते है कि इस लोकतांत्रिक देश में अराजकता का हर स्तर पर विरोध करेंगे और एकजुट होकर इस तरह की साजिश को नाकाम करने का पूरा प्रयास करेंगे.

  1. प्रोफ़ेसर दीपक मालिक, डायरेक्टर, गांधीयन इंस्टी इंस्टीट्युट्स ऑफ़ स्टडीज़
  2. डा0 काशीनाथ सिंह, प्रख्यात कथाकार
  3. विभूति नारायण राय, पूर्व पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश
  4. प्रोफ़ेसर रूपरेखा वर्मा, पूर्व कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय
  5. प्रोफ़ेसर चौथीराम यादव, हिन्दी विभागाध्यक्ष, बीएचयू
  6. प्रोफ़ेसर वसंती रमण, CWDS
  7. डा0 संदीप पाण्डेय, मैग्सेसे विजेता और सामजिक कार्यकर्ता
  8. प्रोफ़ेसर क़मर जहाँ, पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष, बीएचयू
  9. डा0 स्वाति, समाजवादी जन परिषद्
  10. नीति भाई, महासचिव, लोक चेतना समिति
  11. फादर आनंद, डायरेक्टर, विश्व ज्योति संचार केंद्र
  12. डा0 आनंद दीपायन, भूगोल विभाग, बीएचयू
  13. डा0 संजय श्रीवास्तव, महासचिव, प्रोग्रेसिव राईटर्स एसोसिएशन
  14. हाजी इश्तियाक, महासचिव, सर सैय्यद सोसायटी
  15. फादर चंद्रकांत. डायरेक्टर, मैत्री भवन
  16. डा0 वल्लभाचार्य पाण्डेय, आशा ट्रस्ट
  17. एस. एम. यासीन, संयुक्त सचिव, अंजुम-ए-इंतेजामिया मस्जिद
  18. डा0 लेनिन रघुवंशी, महासचिव, पी.वी.सी.एच.आर.
  19. डा0 नीता चौबे, समाजवादी जन परिषद
  20. नंदलाल मास्टर, लोक समिति
  21. मेहंदी बख्त, प्रिंसिपल, बी.बी.एस.
  22. श्रुति नागवंशी, संयोजिका, सावित्री बाई फुले महिला पंचायत
  23. वीरेंद्र यादव, जिला समन्वयक, आई.पी.एफ.
  24. डा0 मुनीज़ा आर. खान, रजिस्ट्रार, जी.आई.सी.
  25. रविन्द्र सिंह डोगरा
  26. उत्तप्ल शुक्ला
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