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जानिए! उन 8 कारणों को, जिनकी वजह से प्रशांत भूषण व योगेन्द्र यादव को किया गया पीएसी से बाहर

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published March 10, 2015 9 Views
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5 Min Read
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BeyondHeadlines News Desk

आम आदमी पार्टी ने आज एक प्रेस रिलीज़ जारी कर योगेन्द्र यादव व प्रशांत भूषण को पीएसी से बाहर करने की वज़हों को बताया है. प्रेस रिलीज़ में यह भी कहा गया है कि जब सारे कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी को जिताने के लिए अपना पसीना बहा रहे थे, उस वक़्त हमारे तीन बड़े नेता पार्टी को हराने की पूरी कोशिश कर रहे थे. ये तीनों नेता हैं –प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव और शांति भूषण…

प्रशांत भूषण व योगेन्द्र यादव को पीएसी से बाहर किए जाने के 8 कारण इस प्रकार हैं:

  1. इन्होंने, खासकर प्रशांत भूषण ने, दूसरे प्रदेशों के कार्यकर्ताओं को फ़ोन कर कर के दिल्ली में चुनाव प्रचार करने आने से रोका. प्रशांत जी ने दूसरे प्रदेशों के कार्यकर्ताओं को कहा -“मैं भी दिल्ली के चुनाव में प्रचार नहीं कर रहा. आप लोग भी मत आओ. इस बार पार्टी को हराना ज़रूरी है, तभी अरविन्द का दिमाग ठिकाने आएगा.” इस बात की पुष्टि अंजलि दमानिया भी कर चुकी हैं कि उनके सामने प्रशांत जी ने मैसूर के कार्यकर्ताओं को ऐसा कहा.
  2. जो लोग पार्टी को चन्दा देना चाहते थे, प्रशांत जी ने उन लोगों को भी चन्दा देने से रोका.
  3. चुनाव के करीब दो सप्ताह पहले जब आशीष खेतान ने प्रशांत जी को लोकपाल और स्वराज के मुद्दे पर होने वाले दिल्ली डायलाग के नेतृत्व का आग्रह करने के लिए फ़ोन किया तो प्रशांत जी ने खेतान को बोला कि पार्टी के लिए प्रचार करना तो बहुत दूर की बात है वो दिल्ली का चुनाव पार्टी को हराना चाहते है. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश यह है की पार्टी 20-22 सीटों से ज्यादा न पाये, पार्टी हारेगी तभी नेतृत्व परिवर्तन संभव होगा.
  4. पूरे चुनाव के दौरान प्रशांत जी ने बार-बार ये धमकी दी कि वे प्रेस कांफ्रेंस करके दिल्ली चुनाव में पार्टी की तैयारियों को बर्बाद कर देंगे. उन्हें पता था कि आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है. और अगर किसी भी पार्टी का एक वरिष्ठ नेता ही पार्टी के खिलाफ बोलेगा तो जीती हुई बाजी भी हार में बदल जाएगी.
  5. प्रशांत भूषण और उनके पिताजी को समझाने के लिए कि वे मीडिया में कुछ उलट सुलट न बोलें, पार्टी के लगभग 10 बड़े नेता प्रशांत जी के घर पर लगातार 3 दिनों तक उन्हें समझाते रहे. ऐसे वक़्त जब हमारे नेताओं को प्रचार करना चाहिए था, वो लोग इन तीनों को मनाने में लगे हुए थे.
  6. दूसरी तरफ पार्टी के पास तमाम सबूत है जो दिखाते है कि कैसे अरविंद की छवि को ख़राब करने के लिए योगेन्द्र यादव जी ने अखबारों में नेगेटिव ख़बरें छपवायी. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है अगस्त माह 2014 में दी हिन्दू अख़बार में छपी खबर जिसमें अरविंद और पार्टी की एक नकारातमक तस्वीर पेश की गयी. जिस पत्रकार ने ये खबर छापी थी, उसने पिछले दिनों इसका खुलासा किया कि कैसे यादव जी ने ये खबर प्लांट की थी. प्राइवेट बातचीत में कुछ और बड़े संपादकों ने भी बताया है कि यादव जी दिल्ली चुनाव के दौरान उनसे मिलकर अरविंद की छवि खराब करने के लिए ऑफ दी रिकॉर्ड बातें कहते थे.
  7. ‘अवाम’ भाजपा द्वारा संचालित संस्था है. ‘अवाम’ ने चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी को बहुत बदनाम किया. ‘अवाम’ को प्रशांत भूषण ने खुलकर सपोर्ट किया था. शांति भूषण जी ने तो ‘अवाम’ के सपोर्ट में और ‘आप’ के खिलाफ खुलकर बयान दिए.
  8. चुनावों के कुछ दिन पहले शांति भूषण जी ने कहा कि उन्हें भाजपा की CM कैंडिडेट किरण बेदी पर अरविंद से ज्यादा भरोसा है. पार्टी के सभी साथी ये सुनकर दंग रह गए. कार्यकर्ता पूछ रहे थे कि यदि ऐसा है तो फिर वे आम आदमी पार्टी में क्या कर रहे हैं, भाजपा में क्यों नहीं चले जाते? इसके अलावा भी शांति भूषण जी ने अरविंद जी के खिलाफ कई बार बयान दिए.
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