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क्या पढ़ा लिखा समाज इस समस्या के हल के लिए आगे आना चाहता है?

Kamran Ghani Saba for BeyondHeadlines

बिहार में शिक्षकों की हड़ताल को एक महीना होने वाला है. पर सवाल है कि क्या शिक्षक व बच्चों के भविष्य को लेकर इस देश में कोई चिंतित है? और उससे भी बड़ा सवाल कि क्या सरकार शिक्षा के प्रति उदासीन है? क्या पढ़ा लिखा समाज इस समस्या के हल के लिए आगे आना चाहता है?

नहीं साहब! ग़रीब बच्चों के भविष्य की चिंता किसी को भी नहीं है. चाहे हम शिक्षक हों, अख़बार वाले या फिर सुशासन का दावा करने वाली हमारी सरकार…

अफ़सोस कि मैं भी बिहार का एक शिक्षक हूँ. उस राज्य में शिक्षक हूं, जहाँ शिक्षा से साथ बलात्कार हो रहा है. हालांकि इसके लिए हम सब ही इसके गुनाहगार हैं. पर अब सोचने का समय आ गया है कि आखिर क्या कारण है कि हड़ताल को समाप्त कराने की किसी भी ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हो रही है… न मीडिया की इस पर नज़र है और न सरकार इस ओर ध्यान दे रही है…

तो शायद इस जवाब होगा कि बस एक ही कारण है कि इन सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं. अगर अमीरों, नेताओं व मंत्रियों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते तो यह हड़ताल पहले ही दिन समाप्त हो गया होता. हड़तालियों की तमाम शिकायतें दूर कर दी जातीं.

पर ये हड़ताल उन स्कूलों के शिक्षक नहीं कर रहे हैं. इसीलिए  हड़ताल होती है तो होती रहे. नुक़सान तो ग़रीबों व मज़दूरों के मासूम बच्चों का ही होना है. ये बच्चे पढ़े या जाहिल रहें, किसी का क्या बिगड़ता है? कौन सा इन्हें आगे देश संभालना है? कौन अब इन्हें नेता बनना है? आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर व इंजीनियर बनने का सपना भी अब ये देख नहीं सकतें. आखिर इनके पैसा आएगा कहां से?

ख़ैर, सवाल और बातें खूब सारी हैं. लेकिन मैं सिर्फ आप से हाथ जोड़कर बस यही निवेदन करता हूँ कि इस सन्देश को अधिक से अधिक शेयर कीजिये या अपने स्तर से जैसे भी हो सरकार तक यह सन्देश पहुँचाने का प्रयास कीजिये कि अब हड़ताल समाप्त होनी चाहिए. इसी हड़ताल की वजह से बिहार में मैट्रिक की कॉपियों के मूल्यांकन का कार्य रुका हुआ है. डर इस बात का है कि समय पर रिजल्ट नहीं आया तो लाखों छात्र-छात्राओं का साल बर्बाद हो जाएगा. बिहार में शिक्षा के साथ ऐसा घिनौना मज़ाक हो और आप राज्य की उन्नति का सपना देखें क्या ऐसा संभव है ???

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