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फेसबुक पर अकबरुद्दीन ओवैसी का बहुचर्चित पेज बंद

BeyondHeadlines News Desk

अकबरुद्दीन ओवैसी का फेसबुक पेज, जिसको 1,86,861 लाईक करते थे, को बंद फेसबुक ने बंद कर दिया है.

फेसबुक ने इस पेज को सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाला मानते हुए 19 जून को बंद कर दिया. इसे बंद करवाने का दावा सोशल मीडिया विशेषज्ञ और डिजिटल इंडिया मिशन के एक्सपर्ट एनालिस्ट कनिष्क कश्यप ने अपने फेसबुक पेज के द्वारा किया है.

कनिष्क कश्यप सोशल मीडिया पर हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं. साथ ही वो सोशल मीडिया पर ‘गूगल टू गीता’ कैंपेन भी चला रहे हैं.

इससे पहले भी कनिष्क कश्यप कई नामी गिरामी हस्तियों की सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल्स को उजागर कर, उन्हें बंद करा चुके है. दिव्या दत्ता, सोनाक्षी सिन्हा, पूनम सिन्हा (सत्रुघन सिन्हा की पत्नी) आदि की बहुचर्चित प्रोफाइल्स को भी बंद करा कर उन्होंने इसके पीछे काम कर रहे असामाजिक तत्वों के प्रति लोगों को आगाह किया था.

कश्यप कहते हैं कि “सोशल मीडिया एक परोक्ष नागरिक समाज का निर्माण कर रहा. यह परोक्ष समाज हमारे वास्तविक जीवन में आये संकुचित जीवनचर्या और सामाजिकता में कमी को ही दर्शाता है. ऐसे में यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि सोशल मीडिया का उपयोग सकारत्मक माहौल बनाने में हो. प्रेम और सद्भाव से हम लोगों तक सत्यापित जानकारी और मनोरंजन पहुंचाए.”

उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ रहे नफ़रत और हिंसा फैलाने वालों के लिए यह ख़बर महत्वपूर्ण है. अगर आप भी सोशल मीडिया पर नफ़रत भरे पोस्ट्स करते हैं, जिससे सामाजिक सद्भाव को चुनौती मिलती तो हो, तो आपको सावधान रहने की ज़रुरत है.

BeyondHeadlines से बात करते हुए कनिष्क ने कहते हैं “हम सब का नैतिक दायित्व है कि हम सोशल मीडिया संचार तंत्र की मनोवैज्ञानिकता और इसके दूरस्थ पहुँच के मध्य नज़र किसी भी ऐसे नकारात्मकता को हतोत्साहित करें,जिससे कि इन्टरनेट पर जुड़ती युवा आबादी के मध्य नफ़रत और हिंसा का माहौल नबनने पाए.”

फेसबुक आपको किसी भी नकारात्मक पेज अथवा पोस्ट को रिपोर्ट कर उसे हटवाने का विकल्प देता है. अगर आपको किसी पोस्ट अथवा पेज पर हिंसा, सामाजिक सद्भाव को चुनौती देती हुई सामग्री, अश्लील सामग्री आदि दिखती है तो उसे फेसबुक के संज्ञान में लाकर, हटवाने का अनुरोध किया जा सकता है.

“यह आवश्यक नहीं कि जो बात आपको आपतिजनक लग रही, वह फेसबुक के निरिक्षणकर्ताओं को भी आपतिजनक लगे. यहाँ आपके व्यक्तिगत विश्वास और मत का प्रश्न नहीं है. फेसबुक द्वारा कई बार आपके अनुरोध को ठुकरा दिया जाता है. अगर आपको यह लगे कि फेसबुक का निरिक्षण सटीक नहीं, तो आप उनकी तरफ से भेजे गए नोटिफिकेशन में उपलब्ध एक विकल्प पर अपनी प्रतिक्रिया देकर, उन्हें पुनः विचार करने का अनुरोध कर सकते हैं.”

यह बहुत कुछ रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति की प्रोफाइलऔर विश्वसनीयता पर निर्भर करता है. फेसबुक अपने उपयोगकर्ताओं की प्रोफाइल की गतिविधियों और यूज़र पालिसी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से उन्हें श्रेणीबद्ध करता है. यह इन्टरनेट पर सभ्य नागरिक होने के मापदंडों और इन्टरनेट के प्रयोग में आपका दैनंदिन व्यवहार को भी सम्मिलित करता है. अगर आप फेसबुक की नज़र में एक सहयोगी व आदर्श उपयोगकर्ता हैं,  तो आपके द्वारा कियेगए रिपोर्ट अब्यूज को फेसबुक टीम गंभीरता से लेती है.

कश्यप का कहना है कि अकबरुद्दीन ओवैसी के पेज को मई माह में ही रिपोर्ट किया था, जिसके बाद फेसबुक ने इसे बंद करने से मना कर दिया था. 1 जून को फेसबुक ने इस पन्ने पर कुछ भी आपतिजनक नहीं मानते हुए, अपनी असहमति जता दी. पर उन्होंने हार नहीं मानी. फिर से अकबरुद्दीन ओवैसी के पेज से उन सभी तथ्यों को संकलित किया, जिससे उनका दावा मज़बूत हो और फेसबुक के फैसले पर आपत्ति जताते हुए, उन्होंने फैसले पर पुनर्विचार की मांग की. फेसबुक ने आखिरकार उनके दावे से संतुष्ट हो, अकबरुद्दीन ओवैसी के पेज को कल रात बंद कर दिया.

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