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दुनिया के सबसे बड़े मंदिर में मुसलमानों का योगदान और कंबोडिया की आपत्ति

Jyotika Cheema for BeyondHeadlines 

बिहार के पूर्वी चम्पारण स्थित केसरिया में दुनिया के सबसे बड़े मंदिर का निर्माण कार्य जारी है. इस मंदिर के निर्माण में जो साम्प्रदायिक सौहार्द दिखा वो अद्भूत है.

दरअसल, दुनिया के इस सबसे बड़े मंदिर बनाने के लिए मुसलमान न सिर्फ निर्माण कार्य में लगे हैं, बल्कि उन्होंने अपनी ज़मीने भी दी हैं.

पटना स्थिति महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर कुणाल का कहना है कि मंदिर के लिए अब तक हिंदू ही खुलकर मदद करते रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की भागीदारी ने सबको चौंका दिया है. मंदिर बनाने में तीन दर्जन से अधिक मुसलमानों ने अपनी ज़मीन दी. कुछ मुसलमानों ने तो ज़मीन खरीदने में भी हाथ बंटाया. यदि ये लोग नहीं होते तो मंदिर बनाने का सपना कभी पूरा नहीं होता. बल्कि सच पूछे तो बिना मुसलमानों की मदद के मंदिर के सपने को पूरा करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन था. इस मंदिर के निर्माण को लेकर मुसलमानों ने भी उत्साह है.

दूसरी तरफ़ केसरिया में बनने वाले विराट रामायण मंदिर को लेकर कंबोडिया सरकार ने भारत सरकार से आपत्ति दर्ज कराई है.

कंबोडिया का अंकोरवाट मंदिर

कंबोडिया का अंकोरवाट मंदिर

कंबोडिया सरकार का कहना है कि पटना के महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा बनने वाला विराट रामायण मंदिर अंकोरवाट मंदिर का प्रतिरूप है. हालांकि महावीर मंदिर न्यास समिति इससे इन्कार करती है.

कंबोडिया ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि जब तक मामला हल नहीं हो जाता, तब तक मंदिर के निर्माण पर रोक लगाई जाए. कंबोडिया सरकार ने भारतीय विदेश मंत्रालय को इस संबंध में एक पत्र भी भेजा है.

कंबोडिया की एक न्यूज़ वेबसाइट के मुताबिक इस पत्र में लिखा गया है, ‘कंबोडिया सरकार का मानना है कि अंकोरवाट मंदिर की यह प्रतिकृति व्यवसायिक फायदे के लिए बनाई जा रही है जो विश्व विरासतों से जुड़े मूल्यों का उल्लंघन है…’

समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल का कहना है कि कंबोडिया की आपत्ति के बाद उन्होंने भारत सरकार से एक बैठक आयोजित करने का आग्रह किया है, जिसमें विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, महावीर मंदिर न्यास समिति एवं कंबोडिया सरकार के प्रतिनिधि रहें.

इस बैठक में मंदिर के आर्किटेक्ट भी मौजूद रहेंगे, जो भारत सरकार एवं कंबोडिया सरकार के प्रतिनिधियों को बताएंगे कि विराट रामायण मंदिर किस प्रकार अंकोरवाट मंदिर से अलग है.

उन्होंने कहा कि महज संयोगवश पूर्व में इस मंदिर का नाम अंकोरवाट विराट राम मंदिर रखा गया था, लेकिन कंबोडिया सरकार की आपत्ति के बाद इसमें बदलाव कर दिया गया है.

इस विराट रामायण मंदिर के निर्माण पर क़रीब 500 करोड़ का खर्च आएगा. मुंबई स्थित वालेचा कंस्र्किक्शदन कंपनी इस मंदिर को बनाएगी. यह मंदिर 2500 फीट लंबा, 1296 फीट चौड़ा और 379 फीट ऊंचा होगा. यह मंदिर भूकंपरोधी भी होगा. इस विराट रामायण मंदिर का काम भारत में 2012 में शुरू हुआ था. शुरुआत में इसका नाम विराट अंकोर वाट राम मंदिर रखा गया था.

अब सवाल है कि क्या केसरिया में बन रहे मंदिर पर कंबोडिया की आपत्ति जायज है? क्या उसकी आपत्ति कानूनी और तकनीकी आधार पर सही है?

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