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इहजास असलम: हमेशा से मेरी ख़्वाहिश रही कि अपने मुल्क को रिप्रेजेन्ट करूं…

अफ़रोज़ आलम साहिल, BeyondHeadlines

अगर किसी लक्ष्य को पाने के लिए सच्चे दिल से ईमानदार मेहनत की जाए तो वो लक्ष्य एक न एक दिन आपके क़दमों में ज़रूर होगा.

इहजास असलम शेख़ की हमेशा से इंडियन फॉरेन सर्विस में जाने की ख़्वाहिश रही. तीन कोशिशों के बाद वो यूपीएससी के ज़रिए आयोजित सिविल सर्विस की परीक्षा में कामयाब हुए, लेकिन बावजूद इसके वो अपनी तैयारी में लगातार लगे रहें. इस बार इन्होंने इस परीक्षा में 536वीं रैंक हासिल की है. जबकि पिछली बार इनकी 735 रैंक आई थी.

इहजास को पिछली बार आर्म्ड फोर्सेस हेडक्वार्टर सिविल सर्विस मिली थी, लेकिन इस बार उन्हें उम्मीद है कि इंडियन फॉरेन सर्विस मिल जाएगी.

इहजास का कहना है कि शुरू से उनकी दिलचस्पी फॉरेन पॉलिटिक्स में रही है. दुनिया की तमाम अहम ख़बरों को हमेशा से फॉलो करता रहा हूं. हमेशा से ही मेरे ज़ेहन में ये बात रही कि मैं भी दुनिया के अन्य देशों में अपने मुल्क को रिप्रेजेन्ट करूं.

ये पूछने पर कि पीएम मोदी के विदेश यात्राओं को आप कैसे देखते हैं और इससे क्या कोई लाभ है? तो इनका कहना है कि, मैं इन यात्राओं को बेहतर मानता हूं. आपस में मिलना-जुलना हमेशा बेहतर होता है. हर यात्राओं से हमेशा हमें कुछ न कुछ सीख ज़रूर मिलती है और हम बहुत कुछ सीखते हैं. जहां तक ये सवाल है कि इन यात्राओं से मुल्क को फ़ायदा मिल रहा है या नहीं, तो ये भविष्य में देखने वाली बात है. वैसे भी डिप्लोमेसी और इंटरनेशनल रिलेशन का रिजल्ट बहुत लांग टर्म प्रोसेस होता है. लेकिन ये महत्वपूर्ण है कि आप लोगों से मिल रहे हैं.

केरल के एरनाकुलम ज़िला के पेरूमबवूर इलाक़े के ओडक्कली गांव में रहने वाले इहजास असलम शेख़ के पिता, शेख़ मुहम्मद सी एम भारत सरकार के सेन्ट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में असिस्टेंट इंजीनियर हैं. वहीं इनकी मां मुमथास टी ए एक स्कूल में पढ़ाती थीं, अब घर का कामकाज संभालती हैं. तीन भाई बहनों में इहजास सबसे बड़े भाई हैं और दो बहने इनसे छोटी हैं.

इहजास असलम ने अपनी दसवीं व बारहवीं क्लास की पढ़ाई त्रिवेंद्रम के केन्द्रीय विद्यालय से की है. उसके बाद कोचीन यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की. फिर इन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंडस्ट्रियल डिज़ाईन में मास्टर डिग्री ली है.

इहजास का कहना है कि आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई के बाद दिल्ली में रेलवे कंसल्टेंसी में एक सरकारी प्रोजेक्ट में काम किया और फिर प्रोजेक्ट मुकम्मल होने के बाद वापस अपने घर केरल आ गया. यहां वापस आकर मैंने सिविल सर्विस में जाने का सोचा. यहीं एरनाकुलम में रहकर तैयारी की. दो अटेम्प्ट यहीं रहकर दिए. फिर त्रिवेंद्रम में तीसरे अटेम्प्ट के लिए तैयारी की और कामयाब रहा. इस बार ये चौथा प्रयास था. यानी मेरी पूरी तैयारी केरल में ही हुई. बस इंटरव्यू देने के समय दिल्ली गया था और ज़कात फाउंडेशन में मौक इंटरव्यू दिया था. 

वो कहते हैं कि आमतौर पर लोग सोचते हैं कि तैयारी करना है तो घर छोड़कर दिल्ली जाना होगा. तो मैं ये बता दूं कि ये ज़रूरी नहीं है इसकी तैयारी के लिए दिल्ली जाना ही एक ऑप्शन है. अपने शहरों में रहकर भी तैयारी कर सकते हैं. केरल के त्रिवेंद्रम में भी पिछले तीन-चार सालों से तैयारी के लिए एक अच्छा माहौल बन गया है. इस बार केरल से 33 लोग सिविल सर्विस में सेलेक्ट हुए हैं. यानी केरल और इसके आस-पास के लोग त्रिवेंद्रम में रहकर भी तैयारी कर सकते हैं. इसी तरह दूसरे राज्यों के लोग भी एक अच्छी टीम बनाकर एक वातावरण में कहीं भी रहकर तैयारी कर सकते हैं.

इहजास कहते हैं कि, वैसे भी देखा जाए तो इस परीक्षा की तैयारी के लिए सेल्फ़ स्टडी बहुत ज़रूरी है. यानी आपको करना तो सेल्फ़ स्टडी ही है, तो इसके लिए बस पढ़ने के लिए अच्छा माहौल मिलना चाहिए. लेकिन घर छोड़ना बेहतर रहता है. बाक़ी आप अपने ऊपर विश्वास रखिए और मेहनत कीजिए, कामयाबी ज़रूर आपके क़दम चूमेगी.

इहजास ने ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में भूगोल विषय लिया था. उनका कहना है कि ये विषय साइंस से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे पढ़ना मुझे आसान लगा. फिर मेरी इसमें थोड़ी-बहुत दिलचस्पी भी थी. बस मैंने इसे लेना ही मुनासिब समझा.

अपने मुस्लिम क़ौम के नौजवानों से इहजास का कहना है कि हमें हमेशा मज़हबी व जज़्बाती बातें सोचने के बजाए सामाजिक व आर्थिक आधार से भी सोचना होगा, क्योंकि जब हम बढ़ेंगे तो ही क़ौम और देश आगे बढ़ेगा.

वो कहते हैं कि, हमेशा सरकार को कोसने के बजाए सरकारी स्कीमों व चीज़ों से फ़ायदा हासिल करने की सोचें. बहुत सारे फ़ायदे हम सरकार की स्कीमों से उठा सकते हैं. हमारी तालीम के लिए देश में कई सारे स्कॉलरशिप हैं. हमें इससे भी फ़ायदा हासिल करने के बारे में सोचना चाहिए और लोगों को भी इसके बारे में जागरूक करते रहना चाहिए. हमें खुद फैसला करके आगे बढ़ने की ज़रूरत है.

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