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ऐमन सिद्दीक़ा: ‘बुलंद हौसलों को कभी किसी सहारे की ज़रूरत नहीं होती…’

Sana Raza, BeyondHeadlines

नई दिल्ली : सीबीएसई बाहरवीं क्लास टॉपर्स की लिस्ट में इस बार भी लड़कियों का ही बोलबाला रहा. इन लड़कियों में एक अच्छी तादाद मुस्लिम लड़कियों की भी है. इन्हीं में दिल्ली की ऐमन सिद्दीक़ा भी एक हैं.

ऐमन उन तमाम मुसलमान लड़कियों के लिए एक मिसाल हैं, जो तालीम के ज़रिए कुछ हासिल करना चाहती हैं और ज़िन्दगी में कामयाब होना चाहती हैं.

ऐमन सिद्दीक़ा ने इस बार बारहवीं में 96.8 प्रतिशत नंबर लाकर ये साबित कर दिया कि बुलंद हौसलों को कभी किसी सहारे की ज़रूरत नहीं होती. अगर लगातार ईमानदारी के साथ पढ़ाई की जाती रहे तो किसी भी परीक्षा में नंबर लाना कोई मुश्किल काम नहीं है.

ऐमन के पिता नेमतुल्लाह सिद्दीक़ी सरकारी जॉब में हैं और मां रौशन सिद्दीक़ी एक हाउस मेकर हैं. मां बाप दोनों बिहार से हैं. मां पटना से हैं तो वहीं पिता सीवान से हैं. फिलहाल पूरा परिवार दिल्ली के मोती बाग़ इलाक़े में रहता है.

ऐमन ने अपनी पढ़ाई दिल्ली के चाणक्यपूरी इलाक़े में स्थित कार्मेल कान्वेंट स्कूल से की है. यहां वो साईंस स्ट्रीम की पढ़ाई कर रही थी. साथ ही इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए वो दिल्ली से फिटजी कोचिंग सेन्टर भी जाती थीं. इन्होंने इस बार आईआईटी के लिए एग्ज़ाम दिया है और उम्मीद है कि इस बार वो इसमें भी कामयाब रहेंगी. 

वो कहती हैं कि मेरे अच्छे नंबर आने के पीछे मेरे परिवार वालों का एक बड़ा रोल रहा है. ख़ास तौर पर मेरे बड़े भाई का योगदान सबसे ज़्यादा है. वो अभी इंजीनियरिंग कर रहे हैं. उन्होंने मुझे पढ़ाई में हमेशा मदद की और कभी भी कुछ भी समझने में दिक्कत हुई तो भाई ने उसे बहुत अच्छे से समझा दिया.

बारहवीं में पढ़ने वाले स्टूडेन्ट्स से ऐमन कहना चाहती हैं कि, वो लगातार अपनी पढ़ाई करते रहें. एग्ज़ाम से पहले सिर्फ़ रिवाईज़ करना चाहिए. एग्ज़ाम के एक दिन पहले पढ़ने से कुछ नहीं होने वाला. इससे स्ट्रेस होता है और पढ़ाई कभी भी स्ट्रेस में नहीं करनी चाहिए.

वो आगे कहती हैं कि सारे सब्जेक्ट को बराबर वक़्त देना चाहिए. अपने कमज़ोर पक्ष पर थोड़ा ज़्यादा ध्यान दें. 

जहां हमारे समाज में लड़कियों को आगे बढ़ने से रोकने वाले लोगों की कमी नहीं है, वैसे ही उनका हौसला बढ़ाने वालों की भी तादाद अच्छी-ख़ासी है. हमें भी हर उस लड़की को आगे बढ़ाने का प्रण लेना चाहिए, जो ऐमन की तरह मेहनत से आगे बढ़ना चाहती हैं.

नोट : ये स्टोरी BeyondHeadlines की ख़ास सीरीज़ #MuslimGirlsAchievers की पहली स्टोरी है. हम इस सीरीज़ में सिर्फ़ उन्हीं मुस्लिम लड़कियों की कहानी यहां प्रकाशित करना चाहते हैं, जिन्होंने इस बार बाहरवीं की परीक्षा में 95 फ़ीसद से ऊपर नंबर हासिल किए हैं. यदि आपने भी ये कारनामा अंजाम दिया है या आप भी किसी ऐसी लड़की को जानते हैं तो [email protected] पर उनका नाम व नंबर ज़रूर भेजें ताकि उनकी कहानी से हम पूरी दुनिया को रूबरू करा सकें.

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