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विश्व पर्यावरण दिवसः बड़ी कंपनियां ले प्लास्टिक कचरे की ज़िम्मेदारी

BeyondHeadlines News Desk

नई दिल्ली : जहां एक तरफ़ प्लास्टिक प्रदूषण के थीम पर भारत ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ की इस साल मेज़बानी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ ग्रीनपीस इंडिया ने आज प्लास्टिक इस्तेमाल करने वाले कंपनियों को कठोर संदेश देते हुए उनसे मांग किया है कि वे प्लास्टिक कचरे की ज़िम्मेदारी लें.

पैकेजिंग उद्योग सबसे ज़्यादा प्लास्टिक कचरा उत्पादित करते हैं. इनमें बोतल, कैप, खाने का पैकेट, प्लास्टिक बैग आदि शामिल हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार समुद्र को प्रदूषित करे वाले टॉप 5 प्रदूषकों में से चार पैकेजिंग उद्योग से निकलने वाला प्लास्टिक है.

ग्रीनपीस की कैंपेन निदेशक दिया देब का कहना है, “भारत में 24,940 टन प्लास्टिक कचरा प्रतिदिन निकलता है. यह बहुत ज़रुरी है कि हम एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक के बारे में सोचें, नहीं तो प्लास्टिक हमारी पूरी पारस्थितिकीय तंत्र को ख़त्म कर देगा. पुनःउपयोग (रि-साईकिल) की क्षमता होने के बावजूद कंपनियों द्वारा एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक का बड़ा हिस्सा कचरा ही बनता है. हम जानते हैं कि वैश्विक स्तर पर 90 प्रतिशत प्लास्टिक को रिसाईकिल ही नहीं किया जाता है और अंत में ये सारा कचरा प्लास्टिक पर्यावरण के लिये नुक़सानदेह साबित होता है.”

दिया देब कहती हैं, “चाहे सुपर-मार्केट में पैकेजिंग हो या हमारे घर में. प्लास्टिक का इस्तेमाल बढ़ता ही जा रहा है और अब वक़्त आ गया है कि प्लास्टिक प्रदूषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई जाए. हम एक ऐसी दुनिया में रहे हैं जो प्लास्टिक मुक्त था और अब वैसी दुनिया बनाने के लिए देश के नागरिकों और समूहों को एकजुट होकर कंपनियों से सवाल पूछना होगा और उनसे इस समस्या से निदान करने की मांग करनी होगी.”

ग्रीनपीस मांग करता है कि बड़ी कंपनियां अपने प्लास्टिक पैकेज वाले उत्पादों के बारे में फिर से विचार करे और प्लास्टिक कचरे को 100 प्रतिशत रिसाईकिल करने की प्रतिबद्धता जताए. सरकार को भी प्लास्टिक समर्थक लॉबी के प्रभाव से मुक्त होकर कंपनियों को विस्तारित निर्माता ज़िम्मेदारी क़ानूनों के तहत ज़िम्मेदार बनाने की ज़रुरत है.

कुछ तथ्यः

—भारत में सबसे ज़्यादा प्लास्टिक कचरा प्लास्टिक बोतलों से ही आता है. 2015-16 में क़रीब 900 किलो टन प्लास्टिक बोतल का उत्पादन हुआ (सीएसआईआर, राष्ट्रीय रासायनिक लैबोरट्ररी, एनसीएल से प्राप्त डाटा)

—केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हर रोज़ 24,940 टन प्लास्टिक कचरा भारत में उत्पन्न हो रहा है.

—केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार दिल्ली सभी महानगरों में सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा पैदा करने वाला शहर है. 2015 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 689.52 टन, चेन्नई में 429.39 टन, मुंबई में 408.27 टन, बंगलोर में 313.87 टन और हैदराबाद में 199.33 टन प्लास्टिक कचरा तैयार होता है. ये शहर देश में सबसे अधिक प्लास्टिक कचरा पैदा करते हैं.

—वैश्विक रूप से प्लास्टिक के 90 प्रतिशत कचरे को रिसाईकिल नहीं किया जाता है, जिससे कि हमारी धरती पर ख़तरा मंडरा रहा है. (source: http://advances.sciencemag.org/content/3/7/e1700782)

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