#SaveMyLife

क्या आप साईकिल की सवारी करते हैं? तो फिर ये ख़बर आपके लिए ही है…

अफ़रोज़ आलम साहिल, BeyondHeadlines

शारिक़ अहमद को दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की चिंता ने जब कुछ ज़्यादा ही सता दिया तो उन्होंने कार की जगह ऑफ़िस साईकिल से जाने की सोची. इसी सोच ने उन्हें 32 हज़ार रूपये की साईकिल खरीदने पर मजबूर कर दिया. अब साईकिल से अपने ऑफ़िस जाने लगे. लेकिन दिल्ली की डरावनी सड़कों ने उन्हें एक बार फिर से कार से ही ऑफ़िस जाने पर मजबूर कर दिया है.

शारिक़ कहते हैं कि शुरू के चार दिन तो मैं बड़े आराम से जामिया नगर से जंगपुरा स्थित अपने दफ़्तर साईकिल से गया. लेकिन पांचवे जब पीछे से एक कार वाले टक्कर मारा तो मेरे होश ही उड़ गए. अल्लाह का करम है कि मैं बच गया.

वो आगे बताते हैं कि, हालांकि अन्य देशों की तरह से यहां भी साईकिल सवारों को प्रमोट करने की ज़रूरत है, लेकिन हमारी सरकारों ने इस ओर कभी भी ध्यान नहीं दिया. जामिया नगर से जंगपुरा तक कहीं भी आपको साईकिल ट्रैक नहीं मिलेगा. ऐसे में बेक़ाबू ट्रैफिक के दरम्यान साईकिल चलाना बहुत ही ख़तरनाक हो सकता है. आपको लगातार पीछे भी ध्यान रखना पड़ता है ताकि कोई पीछे से आकर आपको रौंद न दे.

किशनगंज बिहार के मुदस्सिर नज़र बताते हैं कि 8 नवम्बर 2016 को किशनगंज में उनके अब्बू अपने साईकिल से बाज़ार गए थे. घर को वापस लौट ही रहे थे कि पीछे से एक मोटरसाईकिल वाले ने उन्हें ठोकर मार दी, वो मुंह के बल गिरे. उन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अगले चार घंटों में उनकी मौत हो गई. इस मौत ने उनके पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया.

मुदस्सिर के अब्बू अकेले साईकिल यात्री नहीं हैं, जिनकी सड़क हादसे में मौत हुई, बल्कि सरकारी आंकड़े के मुताबिक़ इस देश में हर दिन 10 साईकिल चलाने वालों की मौत सड़कों पर हो रही है.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ें बताते हैं कि साईकिल सवारों के मरने की संख्या में 37.7 फ़ीसद की बढ़ोत्तरी हुई है. साल 2016 में 2,585 साईकिल सवार हादसे में मारे गए. वहीं 2017 में मरने वालों की संख्या 3,559 है.

उत्तर प्रदेश इस मामले में पहले स्थान पर रहा है. यहां 2017 में 994 साईकिल सवारों की जान गई है. तमिलनाडू दूसरे स्थान पर है. यहां 555 साईकिल सवारों की जान गई. तीसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश में 299 की जान गई. महाराष्ट्र पांचवे स्थान है और यहां 176 साईकिल सवार अपनी जान गंवा चुके हैं.

ऐसे में यह ज़रूरी हो गया है कि इसका कोई समाधान निकाला जाए, जिससे साईकिल सवार सड़क पर सुरक्षित और बिना किसी डर के चल सकें.

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