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एक बार फिर से उठ रही है फूलन देवी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग

BeyondHeadlines Correspondent

नई दिल्ली : सांसद फूलन देवी की हत्या एक बार फिर से चर्चा में है. अब मोर्चा खुद फूलन देवी के पति उमेद कश्यप ने की खोला है. उन्होंने फूलन देवी की हत्या की सीबीआई जांच की मांग उठाई है.

उनका कहना है, “हम माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री से मांग करते हैं कि वीरांगना फूलन देवी की हत्या की निष्पक्ष जांच करवाकर सभी षड्यंत्रकारियों को  क़ानून के तहत फांसी और क़ानून की धारा के अनुसार सज़ा दी जाए.”

उमेद कश्यप कहते हैं कि, भारत में आज भी दो तरह के क़ानून लागू होते हैं. काले हिरण को मारने पर सलमान खान व दूसरे लोगों की सीबीआई जांच होती है. लेकिन एक सिटिंग मेम्बर ऑफ़ पार्लियामेंट फूलन देवी की संसद चलते हुए देश की सबसे सुरक्षित जगह संसद भवन के निकट 44 -अशोका रोड के सामने 25  जुलाई 2001 को गोलियों से छलनी कर दिया गया, आज तक इसकी कोई जांच नहीं हुई.

अपने संघर्षों के बारे में उमेद कश्यप कहते हैं, मैंने फूलन देवी की हत्या की सीबीआई जांच के लिए 2001 के जुलाई-अगस्त महीने में राजघाट पर आमरण अनशन किया. इस देश के प्रधानमंत्री व गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा. बावजूद इसके अब तक किसी भी सरकार की तरफ़ से कुछ भी नहीं किया गया.

वो आगे कहते हैं कि, एक साज़िश के तहत एक आदमी को सज़ा देकर बाक़ी सबको छोड़ दिया गया. और वो असल षड्यंत्रकारी थे, उनका नाम तक पुलिस ने अपनी एफ़आईआर में दर्ज नहीं किया. हैरत की बात तो ये है कि जिस व्यक्ति को सज़ा दी गई, राजनितिक-जातिवादी षड्यंत्रकारियों ने उसको भी जेल से बाहर निकाल लिया. फूलन देवी की हत्या राजनितिक एवं जातिवादी  मानसिकता के तहत कराई गई थी. 

वो ये भी कहते हैं कि अगर इस मामले में सीबीआई जांच नहीं हुई तो 8 जनवरी के बाद पूरे देश में जनाक्रोश यात्रा निकालेंगे और दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों की तादाद में लोगों के इकट्ठा कर जनाक्रोश-सभा किया जाएगा.

बता दें कि उमेद कश्यप ‘एकलव्य सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. और एकलव्य सेना ने आगामी 8 जनवरी को सुबह 11 बजे नई दिल्ली के कंस्टीटूशन क्लब स्थित मावलंकर हॉल में एक जनाक्रोश-सभा का आयोजन किया है.

बता दें कि फूलन देवी 1980 के दशक के शुरुआत में चंबल के बीहड़ों की सबसे ख़तरनाक डाकू मानी जाती थीं. उन्होंने 1983 में आत्मसमर्पण किया और 1994 तक जेल में रहीं. 1994 में जेल से रिहा होने के बाद समाजवादी पार्टी की टिकट पर 1996 में सांसद चुनी गईं.

फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के एक गाँव में 1963 में हुआ था और 16 वर्ष की उम्र में ही कुछ डाकुओं ने उनका अपहरण कर लिया था. बस उसके बाद ही उनका डाकू बनने का रास्ता बन गया था और उन्होंने 14 फ़रवरी 1981 को बहमई में 22 ठाकुरों की हत्या कर दी थी. इस घटना ने फूलन देवी का नाम बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर ला दिया था. फूलन देवी का कहना था उन्होंने ये हत्याएं बदला लेने के लिए की थीं. ठाकुरों ने उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया था जिसका बदला लेने के लिए ही उन्होंने ये हत्याएं कीं.

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