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मेरे ऊपर दबाव बनाया गया कि मैं किसी मुसलमान का नाम ले लूं तो मुआवज़ा मिल जाएगा, लेकिन मैंने ठुकरा दिया…

BeyondHeadlines News Desk

मुज़फ़्फ़रनगर: ‘मेरे ऊपर दबाव बनाया गया कि मैं किसी मुसलमान का नाम ले लूं तो मुझे मुआवज़ा मिल जाएगा, लेकिन मैंने ठुकरा दिया क्योंकि मुझे इंसाफ़ चाहिए.’

ये बातें पिछले साल 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान शहीद हुए अमरेश के पिता सुरेश कुमार ने आज यूपी की राजनीतिक व सामाजिक संगठन रिहाई मंच के एक प्रतिनिधि मंडल के सामने रखीं. बता दें कि रिहाई मंच के एक प्रतिनिधि मंडल ने मुज़फ़्फ़रनगर का तीन दिवसीय दौरा आज ख़त्म हुआ है.

पिता सुरेश कुमार ने आगे बताया कि ‘मेरा बेटा पुलिस की गोली का शिकार हुआ था, पर उसका मुक़दमा अज्ञात में लिखा गया. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट गए. लेकिन पुनः जांच के आदेश के बाद भी दोषियों को पुलिस ने बचाया क्योंकि असली मुजरिम खुद पुलिस है.’

वहीं रासुका में निरूद्ध विकास मेडियन के पिता डॉ. राकेश ने कहा कि जब मेरे बेटे को छह केसों में ज़मानत मिल गई तो पुलिस ने उस पर रासुका लगा दिया.  

उन्होंने सवाल किया कि रासुका लगाकर कहा जा रहा है कि उसके बाहर आने से समाज में डर-दहशत का माहौल बनेगा. अगर ऐसा कुछ था तो कोर्ट में पुलिस को बोलना चाहिए था और ऐसा कुछ होता तो उसे ज़मानत ही नहीं मिलती. पुलिस ने रासुका को हथियार बनाया जिसका शिकार मेरा बेटा और परिवार हुए.

रिहाई मंच के इस प्रतिनिधिमंडल ने अपने तीन दिवसीय दौरे के बाद एक पत्रकारवार्ता का आयोजन किया. इस माध्यम से पीड़ितों ने अपनी बातें रखीं.

प्रतिनिधि मंडल के रविश आलम और आशू चौधरी ने बताया कि 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान रासुका में निरूद्ध उपकार जिनको पिछले दिनों जेल में ब्रेन स्ट्रोक आया था, उनके पिता अतर सिंह और माता रूपेश देवी से मुलाक़ात की. उपकार की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, जिसके लिए ज़िला प्रशासन और योगी सरकार ज़िम्मेदार है. अर्जुन के पिता पूरण सिंह, मां धनवती देवी, भाई बबलू और विकास मेडियन के पिता ने भी बताया कि उनके बच्चों को किस तरह से फंसाया गया और अब जेल में सड़ाया जा रहा है. पुरबालियान में खेल-खेल में बच्चों के बीच हुए विवाद के बाद रासुका में निरुद्ध आफ़ताब के चचेरे भाई नूर मोहम्मद और ताऊ मेहरबान समेत शमशेर, महबूब और यामीन के परिजनों और पुरबालियान के ग्राम वासियों से प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की. जिन्होंने बताया कि पुलिस ने एकतरफ़ा कार्रवाई करते हुए बच्चों और महिलाओं तक को उत्पीड़ित किया.

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ज़ाकिर अली त्यागी और अबूजर चौधरी ने कहा कि कैराना पलायन मामले को लेकर फ़ुरक़ान को मुठभेड़ में पुलिस ने पैर में गोली मारकर पकड़ने का दावा किया था. कल जेल में उसने बोला था कि कल उसकी रिहाई है और पुलिस उसे उठाने की फ़िराक़ में है और आज सूचना आ रही है कि सुबह छूटने के बाद उसे कैराना पुलिस उठा ले गई है.

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