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देवबंद में पुलवामा के शहीदों के लिए कैंडल मार्च, कहा सेना की सुरक्षा में हुई चूक की ज़िम्मेदारी ले सरकार

BeyondHeadlines News Desk

देवबंद: पुलवामा हमले में मारे गए 44 जवानों को श्रद्वांजलि अर्पित करने और सरकार से सुरक्षा में हुई चूक की ज़िम्मेदारी लेने की मांग रखने के लिए आज देवबंद की दर्जनों संस्थाओं, संगठनों और नगर वासियों की ओर से उर्दू दरवाज़ा देवबंद पर एक कैंडल मार्च रखा गया.

भीड़ से संबोधित करते हुए अबना-ए-मदारिस वेलफेयर एजूकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन और देवबंद अलुमनाई फेडरेशन के अध्यक्ष मेहदी हसन एैनी क़ासमी ने कहा कि, सेना पर हमला कायरता है, लेकिन सुरक्षा में भारी चूक की ज़िम्मेदारी कश्मीर के राज्यपाल सहित संबंधित विभागों को लेनी चाहिए और आतंकियों से निमटने के लिये एक स्थायी योजना बनानी चाहिए. 

उन्होंने कहा कि दोषियों को सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन इस हमले का राजनीतिकरण हरगिज़ नहीं होना चाहिए और ना ही देश की आम जनता को परेशान करना चाहिए. 

आगे उन्होंने कहा कि आज के इस मार्च के ज़रिये हम सेना को ये संदेश देना चाहते हैं कि पूरा भारत आपके साथ खड़ा है और मुल्क के लिए शहीद जवानों पर हमें गर्व है. हम उनके परिवारों के साथ खड़े हैं.

युवा समाजवादी नेता सैय्यद हारिस ने कहा कि यह सरकार की विफलता और लापरवाही है जो इतना बड़ा हमला हुआ और सरकार ने पहले से निपटने की तैयारी नहीं की.

उन्होंने कहा कि जब पुलवामा में शहीद सैनिकों के शवों को उठाया जा रहा था, तब प्रधानमंत्री, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजनीतिक अनुष्ठानों में बोल रहे थे और मंदिर-मस्जिद की राजनीति कर रहे थे. अफ़सोस और शर्म की बात है भाजपा के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी पूरी रात नृत्य गीत की महफ़िल सजा रहे थे. यह बहुत दुखद है.  इस हमले के लिए भाजपा सरकार ज़िम्मेदार है और उसे ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए.

सामाजिक कार्यकर्ता फ़ैसल नूर शब्बू ने कहा कि इन पांच वर्षों में सेना पर 18 हमले हुए हैं और प्रधानमंत्री व गृह मंत्रालय ने सिर्फ़ निंदा करके अपना पल्ला झाड़ लिया है. 

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री और राज्यपाल को नैतिक रूप से इस्तीफ़ा देना चाहिए और इस हमले में मारे गए जवानों को शहीद का दर्जा देकर उनके परिवारों को एक-एक करोड़ का मुआवज़ा और नौकरी देना चाहिए. 

इस कैंडल मार्च में देवबंद के आम नागरिकों सहित दारूल उलूम देवबंद के सैकड़ों छात्र मौजूद थे.

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