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साध्वी प्रज्ञा की तरह गोडसे भी कर चुका है बम धमाका

BeyondHeadlines History Desk

20 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक प्रार्थना सभा में भाषण दे रहे थे. अभी भाषण शुरू ही हुआ था कि एकाएक बड़े ज़ोरों का धमाका हुआ. लेकिन गांधी जी शान्त रहते हुए मनु गांधी से बोले —“क्यों डर गई? अरे! कोई सैनिक गोलीबारी की शिक्षा ले रहा होगा. यह तो ठीक है लेकिन अगर सचमुच कोई हमें गोली मारने आएगा तो तू क्या करेगी?” इसके बाद गांधी जी लोगों को शान्त कराने का प्रयास करने लगे और हाथ से सबको बैठने का संकेत करके अपना भाषण दुबारा आरंभ कर दिया. 

प्रार्थना ख़त्म होने के बाद पता लगा कि जिस स्थान पर गांधी जी बैठे थे, वहां से 75 फुट की दूरी पर एक बम फटा था, जो गांधी जी की हत्या के षड्यंत्र का एक भाग था. षड्यंत्रकारियों ने लोगों का ध्यान बटाने के लिए विस्फोट किया था. सभा मंच के पीछे से बिड़ला भवन के नौकरों की एक कोठरी से बम फेंकने की मूल योजना असफल हो जाने के बाद षड्यंत्रकारी भीड़ में शामिल हो गए थे… हालांकि उनकी योजना थी कि इस धमाके के बाद दिगम्बर बड़गे मंच के पास जाकर गांधी जी पर हथगोला फेंकेगा, मगर अंतिम क्षण में बड़गे की हिम्मत जवाब दे गई. 

इस घटना के 6 षड्यंत्रकारी नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे, विष्णु करकरे, गोपाल गोडसे, शंकर किस्तैया और दिगम्बर बड़गे पास खड़ी टैक्सी में भाग निकले, मगर मदनलाल पाहवा पकड़ा गया. मदनलाल को गांधी-वध के षड्यन्त्र में शामिल होने व हत्या के प्रयास के आरोप में आजीवन कारावास का दण्ड दिया गया.  

स्पष्ट रहे कि इसी प्रार्थना सभा में गांधी जी ने कहा था —“जो मुसलमान का दुश्मन है, वह हिन्दुस्तान का भी दुश्मन है. इसमें मुझे कोई शक नहीं…”

बता दें कि साध्वी प्रज्ञा का संबंध भी नाथूराम गोडसे की विचारधारा वाले संगठन से है. ये भी 2008 के मालेगांव आतंकवादी बम विस्फोटों की एक आरोपी है.

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