India

नकबा डे पर फ़िलिस्तीनी राजदूत के निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प, कहा जेरुसलेम पर हमारा हक़ है…

The Palestine's Ambassador to India Adnan Abu Alhaija

BeyondHeadlines Correspondent 

नई दिल्ली: ‘फ़िलिस्तीन के लिए अमेरिका कभी भी एक बेहतर मध्यस्थ नहीं रहा. अमेरिका को पता होना चाहिए कि हमारी लड़ाई एक सदी पुरानी है, इसे हम यूं ही नहीं छोड़ देंगे. जेरूसलेम पर हमारा हक़ है और हम इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते.’

ये बातें आज नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेन्टर में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत में फ़िलिस्तीनी राजदूत अदनान अबू अल हैजा ने कही. वो यहां 71 वें ‘नकबा डे’ पर ‘Indian National Alliance for Palestine’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथी बोल रहे थे. 

अल हैजा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को निशाने पर रखते हुए कहा कि ट्रम्प ने फ़िलिस्तीन के लिए फंड रोक कर अमेरिका के विदेश नीति का असल चेहरा दिखा दिया है. 

पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ये ऐलान किया है कि फ़िलिस्तीन के रिफ्यूजियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को अमेरिका अब कोई फंड नहीं देगा. साथ ही अमेरिका ने वॉशिंगटन स्थित फ़िलिस्तीनी मिशन को बंद करने का भी फ़ैसला लिया है. 

ग़ौरतलब रहे कि 15 मई 1948 के दिन ही फ़िलिस्तीन की ज़मीन पर अरब-इजरायल युद्ध के दौरान इजरायलियों द्वारा क़ब्ज़ा के साथ इजरायल देश का जन्म हुआ. इसी दिन से इजरायलियों ने फ़िलिस्तीनियों पर अपना ज़ुल्म करना शुरू किया. तब ये दिन पूरी दुनिया में ‘आपत्ति दिवस’ के रूप में तथा इजरायल के ज़ुल्म के ख़िलाफ़ काला दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे अरबी में ‘अल-नकबा’ कहा जाता है और पूरी दुनिया के लोग इसे ‘नकबा डे’ के रूप में याद करते हैं. 

इस कार्यक्रम में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की सदस्या अनस्तासिया गिल ने फ़िलिस्तीन के बच्चों व महिलाओं पर होने वाले इज़रायली ज़ुल्म को बताते हुए कहा कि इस ज़ुल्म के ख़िलाफ़ दुनिया के हर शख्स को मानवीय आधार पर विरोध करना चाहिए.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद ने कहा कि ये एक बहुत बड़ा झूठ है कि फ़िलिस्तीनी अपने वतन वापस नहीं लौट सकते, जबकि ये संभव है. अगर फ़िलिस्तीन पर हो रहे ज़ुल्म को दुनिया स्वीकार करती है तो ये दुनिया पर दाग़ है, फ़िलिस्तीन पर नहीं.

वरिष्ठ पत्रकार व मानव अधिकार कार्यकर्ता जॉन दयाल ने कहा कि आज से 35 साल पहले भारत का ये हाल नहीं था, जो अब है. आलम तो ये है कि फ़िलिस्तीन के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा की बात करना तो दूर बल्कि इसे यहां के कुछ लोग सेलिब्रेट करने लगे हैं. जबकि भारत हमेशा से फ़िलिस्तीन के साथ रहा है. 

वहीं वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफ़ा ने याद दिलाया कि कैसे फ़िलिस्तीन के साथ हमेशा से अच्छे संबंध रहे और वहीं दूसरी तरफ़ इजरायल से हमारा कोई ख़ास वास्ता नहीं रहा, क्योंकि एक वक़्त पर भारत भी ब्रिटिश हुकूमत का गुलाम था. लेकिन अब हमारी सरकार फ़िलिस्तीन से दूर और इजरायल के क़रीब होती जा रही है जो कि दुखद है. 

इस कार्यक्रम के दौरान ‘इंडिया-फ़िलिस्तीन फ्रेंडशिप फॉरम’ से जुड़ी सबा डावे ने ‘नॉट इन माई होम’ कैम्पेन की जानकारी दी और लोगों से अपील किया कि आप कोका कोला, लोरियल, नेस्ले, नाईकी और जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कम्पनियों के प्रोडक्ट का बायकॉट करें, क्योंकि आपका दिया हुआ पैसा आपके फ़िलिस्तीनी भाईयों के लिए गोली का काम करता है. सबा ने अपील की कि हमें उन तमाम कंपनियों का बायकॉट करना चाहिए, जो हत्यारे इजरायल का समर्थन करती हैं.

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