India

जामिया की विरासत को संजोने के लिए डाली गई ‘जामिया स्टडी सर्किल’ की बुनियाद

BeyondHeadlines News Desk

नई दिल्ली: एक तरफ़ दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध पिछले 40 दिनों से जारी है. वहीं आज यहां के छात्रों ने जामिया की विरासत को संजोने और इसके इतिहास से पूरी दुनिया को रूबरू कराने के मक़सद से ‘जामिया स्टडी सर्किल’ की बुनियाद डाली गई.

इस मौक़े पर एक संवाद  सभा का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया. ये तमाम छात्र उसी लाइब्रेरी के बाहर जमा हुए थे, जिसे दिल्ली पुलिस बेरहमी के साथ पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है. 

हिदायत उल्लाह बताते हैं कि इस स्टडी सर्किल का मक़सद जामिया की उस विचारधारा को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत जामिया की बुनियाद डाली गई थी.

वो आगे बताते हैं कि इस स्टडी सर्किल के ज़रिया जामिया के छात्रों को ना सिर्फ़ उनके विरासत से रूबरू कराया जाएगा, बल्कि उनको देश-विदेश के मौजूदा और पूर्व के हालात से भी रूबरू कराया जाएगा.

संवाद सभा की पहली बैठक में बतौर स्पीकर एजेके मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेन्टर के छात्र मुहम्मद उमर अशरफ़ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जामिया आज पूरे विश्व में एक आंदोलन की जगह के तौर पर जाना जा रहा है. पर बहुत कम लोगों के ये पता है कि जामिया ख़ुद एक आंदोलन की देन है. ये न सिर्फ़ असहयोग और ख़िलाफ़त आंदोलन की पैदावार है, बल्कि इसके पीछे पैन-एशिया मूवमेंट भी है.

उन्होंने रूस तुर्की युद्ध, ग्रीस तुर्की युद्ध, रूस जापान युद्ध और इटली लिबिया युद्ध का उदहारण देते हुए बताया कि इस युद्ध भारत के लोगों ने एशिया के देशों का न सिर्फ़ ज़बान से साथ दिया, बल्कि पैसे से भी मदद की.

बालकान युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने आगे कहा, जामिया के संस्थापकों में से एक डॉ. मुख़्तार अहमद अंसारी ने 1911-12 में हुए इस युद्ध में तुर्की के समर्थन में मेडिकल टीम की नुमाईंदगी की, जिसके बाद तुर्की ने 1 दिसम्बर 1915 को क़ाबुल में राजा महेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में बनी आज़ाद हिंदुस्तान सरकार को मान्यता दे दी थी. इस सरकार की सरपरस्ती जामिया की बुनियाद डालने वाले मौलाना महमूद हसन ने की थी. इस सरकार के गृहमंत्री मौलाना ओबैदउल्ला सिंधी थे, जिन्होंने जामिया में पढ़ाया. इन लोगों का मक़सद ना सिर्फ़ भारत को आज़ाद करवाना था, बल्कि पूरे एशिया से साम्राज्यवादी ताक़त को बाहर निकलना था.

देवांशी माहेश्वरी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा के ये छात्रों के द्वारा शुरू की गई एक बहुत अच्छी पहल है. विभिन्न मुद्दे पर संवाद होते रहना चाहिए.

जामिया के एमसीआरसी के छात्र मुदस्सिर नज़र ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि इस स्टडी सर्किल से ना सिर्फ़ छात्रों का, बल्कि समाज के कमज़ोर तबक़े का भी फ़ायदा होगा. हम अपनी नई पीढ़ी को जामिया के इतिहास से भी रूबरू करा सकेंगे.

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