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BeyondHeadlines > India > भारत में इन अजब-गजब तरीक़ों से लोग दे रहे हैं कोरोना को मात…
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भारत में इन अजब-गजब तरीक़ों से लोग दे रहे हैं कोरोना को मात…

Afroz Alam Sahil
Afroz Alam Sahil Published June 19, 2020 25 Views
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20 Min Read
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“क्या आप कोरोना से परेशान हैं? क्या आपको भी इस समय इस बात का डर सता रहा है कि कहीं कोरोना न हो जाए? क्या आपके मन में भी इसको लेकर नकारात्मक विचार आ रहे हैं? तो अब आप परेशान होना भूल जाइए. हम आज आपकी इस परेशानी का समाधान बताने जा रहे हैं. दरअसल, हिंदू धर्म के शास्त्रों में ऐसे कई श्लोक हैं, जिनमें कोरोना से बचने के उपाय छिपे हैं. इन्हें अपनाने से कोरोना का क़हर आपके आस-पास भी नहीं आ पाएगा. आप घर बैठे ही कोरोना को ऐसी मात देंगे कि कोरोना कभी आपके दरवाज़े पर दस्तक नहीं देगा.”

घबराईए मत, मैं आपके सामने धर्म शास्त्रों के संस्कृत में लिखे श्लोक पेश नहीं करूंगा. वैसे भी आपको बताने का क्या फ़ायदा? आप तो इन श्लोकों का जाप भी नहीं करेंगे…

आधुनिक युग में विज्ञान व प्रौद्योगिकी के चरमोत्कर्ष के साथ ही भारत में अंधविश्वासों का बोलबाला भी सर चढ़ कर बोल रहा है. और इतना चढ़कर बोल रहा है कि कोरोना वायरस भारत में अब ‘कोरोना मां’ बन चुका है. बताया जा रहा है कि यह देवी का नया रूप हैं. इसीलिए बिहार के कई गांव में अब इनकी पूजा शुरू हो चुकी है. शायद सबकुछ ठीक रहा तो ‘कोरोना मां’ का मंदिर बनने की ख़बर आए तो इसमें बिल्कुल भी हैरानी नहीं होनी चाहिए.

अंधविश्वासों की ये फ़सल विज्ञान व प्रौद्योगिकी के सहारे ही लहलहा रही है. शायद आपको यह जानकर हैरत होगी कि आज अंधविश्वास फैलाने में ‘मीडिया’ ही सबसे आगे है, जबकि मीडिया को जनता को जागरूक करने का माध्यम माना जाता है.

मीडिया और ख़ासतौर पर ऑनलाइन व प्रिन्ट मीडिया में इन दिनों हर दिन ऐसी ख़बरें व लेख सामने आ रहे हैं, जिनमें धर्म के रास्ते कोरोना का हर संभव इलाज बताने की कोशिश की जा रही है. इन ख़बरों व लेखों के मुताबिक़ भारत के कुछ ‘महाज्ञानी’ लोग कोरोना का इलाज न जाने कब का निकाल चुके हैं. बताया जा रहा है कि भारत में सिर्फ़ और सिर्फ़ इसी सहारे कोरोना को ख़त्म किया जा सकता है. ये सबकुछ उस दौर में हो रहा है, जब विज्ञान कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटा हुआ है और अब तक कोई कामयाबी नहीं मिली है.

आईए एक नज़र डालते हैं कि कोरोना को लेकर मीडिया के ज़रिए इन दिनों क्या-क्या अंधविश्वास दुनिया के सामने परोसा जा रहा है:

— ऑनलाईन दुनिया में ऐसे कई लेख मौजूद हैं, जहां कोरोना का इलाज ज्योतिष शास्त्र के हवाले से बताया जा रहा है. कुछ ज्योतिष शास्त्र की नज़र से देखा जाए तो माना जा रहा है कोरोना का सबसे मुख्य कारण शनि है तो वहीं कुछ ये बता रहे है कि राहु ने इसके फैलाव में सहयोग दिया है. अगर कोरोना की जन्मपत्री देखी जाए तो मुख्य रूप से शनि, राहु व केतु का ख़ास असर है.

ज्योतिष इस कोरोना से बचाव का अलग-अलग राशि के मुताबिक़ लोगों को इलाज भी बता रहे हैं. ज्योतिषियों का मानना है कि राशि के अनुसार कुछ मंत्र व उपाय करने से लाभ हो सकता है. कहा ये तक जा रहा है कि मंत्रों का जाप करने से इस वायरस से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है.

— कुछ लेखक ये भी बताते हुए नज़र आ रहे हैं कि संकट की इस घड़ी से छुटकारा पाने के लिए प्रत्येक देशवासी को रोज़ाना सूर्य देवता को जल चढ़ाना चाहिए व रोज़ाना कच्चा दूध सूर्यास्त के बाद कुत्ते को पिलाना चाहिए. शनै: शनै: इस संकट से राहत मिलनी शुरू होगी व हालात सामान्य हो जाएंगे.

— गौ मूत्र कोरोना से लड़ने का सबसे अचूक हथियार है. ये बात तो अब देश का हर बच्चा-बच्चा जान चुका है. अब मामला थोड़ा इससे आगे का है. अब गोबर से नहाने की बात कई लोग कह रहे हैं. साथ ही कपूर को गाय के गोबर में बने गमले में जलाने से भी कोरोना अपनी मौत की पनाह मांगेगा. और हां, माथे पर शुद्ध सिंदूर का तिलक लगाने तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से कोरोना आपके क़रीब आने की बात तो दूर, आपके पास भटकेगा भी नहीं.

— कुछ लेख तो यह भी बता रहे हैं कि मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि पर इस वायरस का ज़्यादा प्रभाव रहेगा. वहीं मेष, वृष, सिंह, कन्या, धनु व मकर राशि को कोरोना का कोई असर नहीं होगा.

— कुछ लेखक लाल किताब के सहारे भी इस घोर संकट से बचने के लिए 10 अचूक टोटके बता रहे हैं.

— सुदर्शन ज्योतिष केंद्र से आचार्य अनुपम गुप्ता ने कोरोना वायरस इन्फ़ेक्शन से बचने के लिए कई धार्मिक उपाय बताए हैं, जिससे आपका परिवार कोरोना से सुरक्षित रहेगा.

— आचार्य अनुपम गुप्ता के मुताबिक़, शरीर के बाएं हिस्से पर नीले पेन से 6681443 लिखें. ये नए ज़माने का कोडिफ़ाइड मंत्र है. इसके अलावा हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करते रहें और हर रोज़ बजरंग बाण पढ़ें. सुन्दरकाण्ड का पाठ करें तो अति उत्तम है. शिव तांडव स्तोत्रम पढ़ते रहें. कोरोना तुरंत अपनी जान बचाकर भाग लेगा.

— एक मशहूर अख़बार के वेबसाइट पर ये बताया गया कि अगर आप कोरोना वायरस से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा चाहते हैं तो सुबह शाम तांत्रिक महामृत्युंजय मंत्र का जाप अपने घर में शुरू कर दें. इस मंत्र का नियमित रूप से सुबह शाम 108 या फिर कम से कम 27 बार जाप किया जाए तो जपकर्ता की यह मंत्र गंभीर से गंभीर बीमारी से रक्षा करता है. जब तक जप चलता रहे तब तक घी का दीपक एवं चंदन की धूप जलती रहनी चाहिए. याद रहे, संभव हो ते ये जप रुद्राक्ष की माला से ही करें. यही नहीं, इस लेख में यह भी बताया गया कि अगर कोई रोगी हो चुका है तो इस जप के बाद गाय के घी से हवन करने से रोगी के स्वास्थ्य में शीघ्र सुधार होने लगेगा.

— एक मशहूर अख़बार ने यज्ञोपैथी से कोरोना का उपचार बताया. दिलचस्प बात ये है कि ये अख़बार यज्ञोपैथी को चिकित्सा की विशुद्ध वैज्ञानिक पद्धति मानता है. साथ ही कोरोना वायरस से बचने के लिए औषधियों से बनाई हवन सामग्री की भी विस्तारपुर्वक चर्चा की गई और कहा गया कि दुनिया के तमाम इलाजों से ये ज़्यादा असरदायक है.

—एक विद्वान लेखक विनीत नारायण का मानना है कि वैज्ञानिक प्रयोगों से सिद्ध हो चुका है कि शंख ध्वनि करने से वातावरण में उपस्थित नकरात्मक ऊर्जा और बैक्टीरिया का नाश होता है. इसीलिए वैदिक संस्कृति में हर घर में सुबह और शाम, पवित्रता के साथ, शंख ध्वनि करने की व्यवस्था हज़ारों वर्षो से चली आ रही है. इसीलिए मोदी जी ने शंख बजाने और ताली-थाली पीटने को कहा था.

—कुछ जगहों पर इस ख़तरनाक संक्रमण से लड़ने के लिए कोरोना चालीसा पढ़ने की बात कही गई और इसका संबंध शिवपुराण से जोड़ा गया.

कोरोना से बचने के लिए कई अजीबो-गरीब टोटके और अफ़वाहें

कोरोना वायरस से बचने के लिए लॉकडाउन के दौरान कई टोटके सामने आए और माना गया कि इससे कोरोना आपके इर्द-गिर्द दूर दूर तक नहीं भटकेगा. वहीं इन टोटकों को लेकर कई अफ़वाहें भी फैलीं.

— ‘दुनिया में प्रलय होने वाला है. अभी फैले कोरोना जैसी वैश्विक महामारी उसी का एक उदाहरण है. इससे बचना है तो सभी लोग अपने-अपने दोनों पैरों में हल्दी लगा लें.’ ये अफ़वाह ऐसी फैली कि बिहार के कई ज़िलों में लोग पैर में हल्दी लगाने लगे.

—बिहार में मां दुर्गा के सर और पलक के बाल मिलने की अफ़वाह भी ख़ूब फैली. इतना ही नहीं, लोग इसे गंगाजल से धोकर उस जल को पीने को कहने लगे, जिसे लोग कर भी रहे थे.

— इसी बिहार में कोरोना अब मां बन चुकी है. बिहार के कई ज़िलों में महिलाएं ‘कोरोना माई’ की पूजा अर्चना शुरू कर चुकी हैं. सात गड्ढे खोद कर उसमें गुड़ का शर्बत डालकर लौंग, इलायची, फूल व सात लड्डू रखकर पूजा कर रही हैं. इनका मानना है कि इससे रूठी हुई मां मान जाएंगी और भारत को कोरोना से छुटकारा मिल जाएगी. ऐसी ही पूजा उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाक़ों में होने की भी ख़बर आ रही है.

— ऐसा ही एक मामला गुजरात के सूरत में सामने आया है. यहां के एक व्यापारी ने तापी नदी को रोज़ 500 किलो बर्फ़ से ठंडा करने की मन्नत मान रखी है. बर्फ़ डालते हुए व्यापारी के एक कर्मचारी का बयान मीडिया में छपा, जिसमें उसने बताया कि हमारे सेठ की ओर से एक हफ़्ते में 3500 किलो बर्फ़ अर्पित की जा चुकी है. सेठ का तर्क है कि इससे नदी का पानी ठंड होगा और कोरोना का प्रकोप चला जाएगा.

—देश के कई हिस्सों में यह भी अफ़वाह फैली कि उल्लू पर हाथ फेरने से कोरोना ख़त्म हो जाएगा. इसके पीछे का तर्क ये था कि कोरोना छूत की बीमारी है. यह इंजेक्शन एवं गोलियों के इलाज से नहीं जाएगी. लेकिन उल्लू के ऊपर हाथ फेरो एवं उसके बाद कोरोना संक्रमित मरीज़ के ऊपर हाथ फेर दें तो वह ठीक हो जाएगा.

—उत्तर प्रदेश के बिजनौर और अलीगढ़ में यहां आधी रात के बाद अफ़वाह फैल गई कि जो सो रहा है वह सोता ही रह जाएगा. इसके बाद गांव और शहरों में काफ़ी लोग घरों से निकलकर सड़कों पर आ गए. एक दूसरे को फोन कर जागने की नसीहत देने लगे. कई गांवों में लोगों ने रात में ही थालियां बजाईं. इन सबके बाद प्रशासन के आला अधिकारियों को इनसे अपील की तो फिर कई घंटे के बाद लोग घरों के अंदर गए. कुछ ने टोटके भी किए. घरों के बाहर हल्दी के थापे लगाए गए.

—पहले लॉकडाउन के दौरान बिहार में कई लोगों ने अपने घरों में चौकी बेलन की पूजा की. दरअसल, यहां ये अफ़वाह फैली कि रोटी बनाने वाले चौकी पर बेलन खड़ा हो रहा है. प्रकृति का यह कोई संकेत है. बस फिर क्या था, इसे लेकर लोगों के घरों में चौकी बेलन की पूजा होने लगी. लोग अपने रिश्तेदारों एवं दोस्तों को फोन कर इस अनहोनी की चर्चा में व्यस्त रहे और ये मानते रहे कि ये सबकुछ दैवीय शक्ति से हो रहा है. इस कोरोना विश्वमारी से अपने देश भारत को ये दैवीय शक्ति बचा सकती है.

— मध्य प्रदेश के शाहपुर में भी अजीबो गरीब घटना सामने आई, जिसे लोग चमत्कार मान रहे हैं. ख़बरों में बताया गया कि ‘रामायण’ के बालकांड पेज़ पर से बाल जैसी चीज़ निकल रही है. ऐसा एक नहीं बल्कि कई रामायण में से निकलना बताया जा रहा है. मामला यहीं तक नहीं रूका. बल्कि आगे ये अफ़वाह फैली कि इस बाल को पानी में डालकर चरणामृत की तरह प्रसाद में पीने से कोरोना वायरस जैसी माहमारी नहीं फैलेगी.

इस अफ़वाह के बाद एक ख़बर ये भी बताती है कि एक गांव में रामायण से सिर्फ़ तीन लोगों को बाल मिले. इन तीनों बालों को लोगों ने पानी के एक टंकी में डाल दिया और उस टंकी का पानी पूरे गांव में लोगों ने प्रसाद के तौर पर पिलाया.

सोचने की बात ये है कि इस तरह के ज़्यादातर टोटके करने की सलाह मीडिया के ज़रिए ही दी जा रही थी. एक मशहूर मीडिया संस्थान ने दीपक के ज़रिए कोरोना से बचाव का दावा किया और लोगों को सलाह दी कि 9 दीपकों को जलाकर कुछ मंत्र का उच्चारण करना है और फिर इन दीपों को घर के अलग-अलग स्थानों पर रखना है. ये स्थान तय स्थान थे, जिसके बारे में विस्तारपुर्वक बताया गया और कहा गया कि ऐसा करने से प्राण घातक कोरोना माहमारी एवं शत्रुओं से रक्षा होगी. यही नहीं, आगे ये भी बताया गया कि एक लोटे में गंगाजल डालकर उसमें शुद्ध जल मिलाकर कुछ मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूरे घर में इस जल का छिड़काव करें. ऐसा करने से बीमारी फैलाने वाले सुक्ष्म से सुक्ष्म कीटाणु भी घर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे.

लेकिन मीडिया का एक अलग रूप ये भी

हमारे देश की जो मीडिया लगातार एक धर्म-विशेष के धार्मिक अंधविश्वासों व टोटकों को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरे धर्म के सुझाए गए उपायों को बेवकूफ़ी मानती है.

पाकिस्तान की एक वेबसाइट ने अपने एक लेख में लिखा कि क़ुरआन ने इस जानलेवा वायरस से लड़ने और इससे ठीक होने का उपाय बताया है. आगे लिखा गया है कि क़ुरआन में अल्लाह ने “तक्वाह” (ईश्वर से डरने वाला) और “तवक्कल” (ईश्वर से संबंध) पर ज़ोर दिया है. ऐसा इसलिए है क्योंकि मानव कुछ चीज़ों को नियंत्रित नहीं कर सकता है. इस्लाम के अनुसार किसी को भी मौत, विपत्ति, ख़ुशी सब अल्लाह के हाथ में है. इससे घबराना नहीं चाहिए. अगर कोरोना से बचना है तो नमाज़ अदा करें. अल्लाह को याद करें. इस आर्टिकल में लोगों से नमाज के ज़रिए कोरोना के ठीक होने की बात कही गई.

लेकिन अब भारतीय मीडिया की तत्परता देखिए, बल्कि उनके अंदर की इस्लामोफ़ोबिया देखिए कि किस तरह उन्होंने इस लेख को ढ़ूंढ़कर इस पर स्टोरी की है. एक वेबसाइट ने अपने ख़बर की हेडिंग कुछ इस प्रकार लगाई है —‘पाकिस्तान ने ढ़ूंढ़ा कोरोना का बेवकूफ़ी भरा इलाज: मस्जिद में नमाज़ पढ़ो और सुबह शहद खाओ, वायरस भगाओ.’

ये वेबसाइट लिखती है, अब पाकिस्तानी मीडिया ने क़ुरआन का हवाला देते हुए कोरोना का इलाज बताया है. इस उपाय को अपनाकर पाकिस्तान कोरोना पर कंट्रोल पा लेगा इसकी तो गारंटी नहीं है, लेकिन कोरोना फैलाने में मददगार साबित होगा इसकी गारंटी ज़रूर है. दिलचस्प बात ये है कि इस वेबसाइट ने पाकिस्तानी मीडिया के एक छोटे से लेख में कई कमिया निकाली हैं और सवाल खड़े किए हैं.

ये वेबसाइट अपनी ख़बर में ये भी लिखती है, ‘सबसे हैरत की बात ये है कि आर्टिकल में कहीं भी मास्क लगाने या सोशल डिस्टेंसिंग का ज़िक्र नहीं है. इसमें लोगों से नमाज़ पढ़ने और अल्लाह को याद करने को कहा गया है… इससे कोरोना ठीक हो जाएगा और अल्लाह सबको बचा लेगा.’ 

यही वेबसाइट ईरान के हवाले से एक ख़बर लिखती है. इस ख़बर की हेडिंग है —‘अनपढ़ मौलवी ने कोरोना मरीज़ों पर किया टोना-टोटका, कहा—अल्लाह के पानी को सूंघते ही हो जाओगे ठीक’

इस ख़बर में बताया गया है कि सोशल मीडिया पर ईरान का एक वीडियो वायरल हुआ है. इस वीडियो को अमेरिकन इकोनॉमिस्ट ने शेयर किया है. इस वीडियो में एक मौलवी कोरोना के मरीजों के बेहद नज़दीक नज़र आया. उसने ना ग्लव्स पहने थे और ना मास्क लगाया था. मौलवी मरीज़ों को पानी जैसी चीज़ सुंघाते नज़र आया. मौलवी का दावा है कि इसको सूंघते ही मरीज़ ठीक हो जाएगा.

अपने देश के लोगों में इस्लामोफ़ोबिया किस क़दर है, इसका अंदाज़ा इससे बख़ूबी लगाया जा सकता है. अनुज बाजपेई नामक शख्स ने 10 फ़रवरी की दोपहर ट्वीट करके लिखा —‘याद रखना… “कोरोना” वायरस से भी भयंकर है, “कुरान” वायरस! भारत में 20 करोड़ से भी अधिक संक्रमित!

हालंकि बाद में उसने इस ट्वीट को हटा दिया लेकिन तब तक लोगों ने इसका स्क्रीनशॉट ले लिया था. 11 फ़रवरी की रात तक यह ट्वीट वायरल हो गया. लोग ट्विटर पर इस ट्वीट को लेकर लिखने लगे. कुछ ही देर में अनुज बाजपेई ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे. लोग अनुज बाजपेई को गिरफ्तार करने की मांग करने लगे. कुछ लोग अनुज को सपोर्ट करने के लिए आगे आए. ये लोग ट्वीट कर रहे रहे थे, ‘कीप इट अप अनुज बाजपेई’. लेकिन मामला बढ़ने पर अनुज ने ट्विटर पर सफ़ाई देते हुए लिखा— मेरे कोरोना वायरस वाले ट्वीट को ग़लत समझा गया है, मेरा उसे क़ुरआन से जोड़ने का मक़सद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं बल्कि यह बताना है कि मुस्लिम मांस ज़्यादा खाते हैं, सतर्क रहें. मांसाहार से ही वायरस ज़्यादा फैल रहा है. अगर किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो क्षमा…

ये हमारे देश का दुर्भाग्य ही है कि अंधविश्वास फैलाने में पूरा सरकारी अमला लगा हुआ है. खुद प्रधानमंत्री यही काम करते हुए नज़र आए. अब उनको कौन समझाए कि कोरोना आपदा से लड़ने के नाम पर घरों की बत्तियां बुझाकर दिया जलाने के प्रधानमंत्री का आह्वान कितना अवैज्ञानिक और अंधविश्वास फैलाने वाला है. कोरोना संकट का मुक़ाबला दिया जलाने से नहीं, बल्कि जांच, इलाज, संसाधन, सुरक्षा उपकरणों और लोगों को आर्थिक राहत पहुंचाने से किया जा सकता है.

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