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लिंकन के चचा ‘सत्यमेव जयते’ की हत्या: परिजनों का सवाल —क्या यही है आज़ादी?

आज़मगढ़ : ‘मेरे पति ही मेरे और मेरे तीन बच्चों का सहारा थे. वह भी हत्यारों ने छीन लिया. ये कैसी सरकार है जहां जनता का प्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं है. उसे दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी जा रही है.’

ये दर्द उस पत्नी की है, जिसके पति को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आज़मगढ़ में मार दिया गया. दलित समुदाय से संबंध रखने वाले सत्यमेव जयते उर्फ पप्पू प्रधान आज़मगढ़ के तरवां थाना अंतर्गत बांसगांव के ग्राम प्रधान थे. इनके परिजनों ने जातिगत कारणों से हत्या का आरोप लगाया है.

पति की मौत के सदमे में पत्नी विलाप करते हुए न्याय की भीख मांगते हुए कहती है कि जैसे मेरे पति की हत्या हुई है सरकार उसी तरह से दोषियों को फांसी दे. क्या योगी सरकार के दिए हुए पांच लाख से मेरे पति वापस आ जाएंगे, मेरे बच्चों के सर पर बाप का साया वापस आ जायेगा, मुझे न्याय चाहिए.

प्रधान की पत्नी कहती हैं कि अगर सरकार उन हत्यारों को सज़ा नहीं देती है तो सरकार भी उतनी ही दोषी होगी जितने कि वह हत्यारे हैं.

मृतक प्रधान की भतीजी रो-रो कर कहती हैं कि यह कैसी आज़ादी है. क्या यही है देश की आज़ादी? क्या इस सरकार में हम लोग आज़ाद हैं. क्योंकि उनके चाचा प्रधान सत्यमेव जयते की हत्या आज़ादी के ठीक एक दिन पहले होती है.

वो कहती है आख़िरकार ऐसे हत्यारे किसके सहारे खुलेआम घूम रहे हैं. वह सरकार के दिए हुए मुआवजे पांच लाख की जगह पर पचास लाख का मुआवजा की मांग रखती हैं.

प्रधान के छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई उनके शिक्षा-दीक्षा के लिए बोलती हैं कि जिस तरह से किसी विधायक और सांसद के परिवार को ऐसी स्थिति में सहयोग मिलता है, वैसे ही सरकार इस परिवार का सहयोग करे क्योंकि वे भी एक जन-प्रतिनिधि थे.

'सत्यमेव जयते’

‘सत्यमेव जयते’ के परिजन

वे बताती हैं कि मामला यहीं पर नहीं थम रहा है. तमाम प्रकार की धमकियां आ रही हैं और चिल्ला-चिल्ला कर रो-रोकर वह कहती हैं कि कोई आकर गांव में यह बताया और यह चैलेंज करके गया है कि अभी तो एक हत्या हुई है अभी तो नौ हत्याएं बची हुई हैं. आख़िर किस प्रकार से हम मान ले कि हम सलामत हैं.

परिजनों का कहना है कि काफ़ी सोच-विचार के बाद उनका नाम ‘सत्यमेव जयते’ रखा गया था. वहीं उनके भतीजे का नाम दास प्रथा समाप्त करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के नाम पर ‘लिंकन’ रखा गया. मृतक प्रधान के 3 बच्चे हैं, जिसमें से सबसे बड़ी की उम्र 12 साल है. इनका परिवार 30 सदस्यों वाले एक बड़े संयुक्त परिवार में रहता था.

प्रधान के बड़े भाई और आर्मी से रिटायर्ड एक्स हवलदार रामप्रसाद ने बताया कि उनके भाई की हत्या को श्रेयांश कुमार दुबे, विवेक सिंह उर्फ गोलू, विजेंद्र सिंह उर्फ गप्पू और वसीम ने मिलकर अंजाम दिया. सत्यमेव जयते के तीन बच्चे हैं जिसमें सबसे बड़ी की उम्र 12 वर्ष है और अब इनका कैसे गुजर बसर होगा इसको लेकर वे चिंतित हैं.

घटना के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले श्रेयांश अपना चरित्र प्रमाण पत्र बनाने को कह रहा था. उसके पिता ने प्रधान को मना किया था इसलिए प्रधान ने मना कर दिया. जिसके बाद कई बार वो इस विषय पर घर आया. घटना से दो दिन पहले श्रेयांश रात में दारू पीकर आया और प्रमाण पत्र न बनाने पर गाली भी दी थी और मारने कि बात कही.

उनके मुताबिक़ 14 अगस्त को श्रेयांश प्रधान को बुलाकर ले गया और कहा कि चलो गप्पू सिंह बुला रहे हैं. प्रधान साथ में अपनी गाड़ी से चल दिए पर कुछ आगे जाने के बाद एक आटा चक्की के पास से श्रेयांश ने प्रधान को अपनी गाड़ी पर बिठा लिया और साथ ले गया. जहां इन लोगों ने पहले से शूटर बुला रखा था और उन लोगों ने वहां इनकी हत्या कर दी.

प्रधान की हत्या के बाद ग्रामीणों के विरोध दर्ज करने के दौरान एक बच्चे के मौत हो गई. मृतक सूरज के चचेरे भाई दीपक बताते हैं कि प्रधान की हत्या कि बात जानने के बाद गांव में आक्रोश कि लहर थी. हमने अपना प्रतिनिधि खोया था. हम लोग उसका विरोध कर रहे थे. तभी पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया. उसी दौरान पुलिस की दो गाड़ी गुज़री जिनमें एक सीओ की गाड़ी थी जिसकी चपेट में आने से मेरे भाई की मौत हो गई. पुलिस ने घटना को छुपाने के लिए अज्ञात वाहन पर मुक़दमा लिखा है. गांव वालों का सवाल है कि पुलिस के इतने बंदोबस्त में अज्ञात गाड़ी कैसे हो गई.

प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते ‘सत्यमेव जयते’ के परिजन

मृतक प्रधान सत्यमेव जयते के बड़े भाई राम प्रसाद ने बताया कि घटना के दूसरे दिन 15 अगस्त की दोपहर 2 बजे डीएम साहब गांव में आए और 24 घंटे में अपराधी सलाखों के पीछे होंगे, इसका आश्वासन दिया. दोनों परिवारों को 5-5 लाख रुपए का चेक दिया.

प्रधान के बड़े भाई मांग करते हैं कि एक जन प्रतिनिधि की हत्या हुई है. योगी सरकार इसे संज्ञान में ले और उनके पत्नी और बच्चों के देखभाल के लिए उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी मुहैया कराए और 50 लाख रुपए राहत के लिए दे. गांव में जिस बालक की मौत हुई है उसके पास रहने के लिए घर नहीं है ऐसे में उसके लिए घर और उसके माता-पिता को भी राहत राशि 50 लाख रुपए दे. एफ़आईआर की कॉपी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में पूछने पर बताया कि अभी कुछ नहीं मिला है.

इस घटना की ख़बर मिलने के बाद उत्तर प्रदेश की सामाजिक तंज़ीम रिहाई मंच के प्रतिनिधी मंडल ने तरवां थाना अंतर्गत बांसगांव का दौरा किया. मृतक प्रधान और 12 वर्षीय सूरज कुमार के परिजनों से मुलाक़ात की. ये तमाम बातें इसी मुलाक़ात के दौरान सामने आई हैं. रिहाई मंच के इस प्रतिनिधि मंडल में एडवोकेट विनोद यादव, अवधेश यादव, उमेश कुमार, अरविंद कुमार, सूरज कुमार, बांकेलाल यादव, श्रवण यादव और दीपक यादव शामिल रहे.

1 Comment

1 Comment

  1. Krishna

    August 18, 2020 at 7:11 AM

    जाति की इसी घृणित सोच ने हज़ारों सालों तक विदेशियों का गुलाम बनाये रखा। अगर अब भी इस देश का सवर्ण इस गंदी सोच का परित्याग करने को तैयार नहीं है तो फिर उसे इस्लामिस्ट जिहादियों के खतरे की दिन रात शिकायत करने का कोई हक़ नहीं है।

    बंगलोर में भी दलित पर ही हमला हुआ, पूरे बंगलोर को बंधक बना दिया गया। सैकड़ों गाड़ियाँ जला डाली गयीं। लेकिन तुम्हारे जैसे अधम होंठ सी कर बैठे रहे। अब आज़मगढ़ के एक गाँव में दलित प्रधान की हत्या हुई तो अभियुक्तों के नाम जाति सहित दे देकर मज़े ले रहे हो। अरे अधम प्राणी बंगलोर वाले जिहादी क्या तेरे फूफा थे या मुहम्मद की इज्जत बचाने के नाम पर दंगे फैलाये जाने को तुम संवैधानिक गतिविधि समझते हो ? उत्तर जरूर देना निकृष्ट……..

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