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कोलकाता में नेता जी की मूर्ति तमाम सियासी पार्टियों के लीडरों की बेरूख़ी की शिकार

जिस पश्चिम बंगाल की सियासत इस बार नेता जी सुभाषचन्द्र बोस पर आकर ठहर गई है. जहां नेताजी की सबसे ऊंची मूर्ति के निर्माण की बात चल रही है. उसी पश्चिम बंगाल में नेता जी की एक प्रतिमा पिछले साल के मई महीने से तमाम सियासी पार्टियों के लीडरों की बेरूख़ी की शिकार है और अब भी यहां के लोग इस प्रतिमा के बनने का इंतज़ार कर रहे हैं.

ये कहानी पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के टेंगरा इलाक़े की है. यहां मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी ‘सेवा दान’ के निकट बनी नेता जी की एक मूर्ति साल 2020 के मई महीने से ही बनने के इंतज़ार में है.

यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले साल जब अंफन तूफ़ान आया था, तभी नेता जी की ये मूर्ति टूटी थी, तब यहां के स्थानीय लोगों ने तमाम पार्टियों के नेताओं को इस ओर ध्यान दिलाया था. लेकिन किसी नेता ने नेता जी की इस टूटी प्रतिमा की ओर ध्यान नहीं दिया.

लोगों का कहना है कि इस साल जब बड़े पैमाने पर नेती जी की 125वीं जयंति सेलिब्रेट की गई है, तो उन्हें उम्मीद थी कि इस छोti से प्रतिमा की ओर भी किसी न किसी का ध्यान जाएगा. लेकिन ऐसा अब तक मुमकिन नहीं हो सका है.

नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर यहां के एक स्थानीय युवक बताता है कि किसी भी नेता या सियासी पार्टी को नेता जी या किसी भी उस नेता से कोई मुहब्बत नहीं है, जिसने इस मुल्क को आज़ाद कराया है. इन नेताओं को बस इनके नाम पर अपनी राजनीति चमकानी है. वो हंसते हुए कहते हैं कि जो राजनीति पार्टी आज नेता जी के चरणों में है और उन्हीं के सहारे पश्चिम बंगाल का क़िला फ़तह करने की कोशिश हो रही है, उन्हें ख़ुद नेता जी का इतिहास नहीं मालूम है और उनके ही कार्यकर्ताओं ने इसी कोलकाता में साल 2018 में नेता जी की प्रतिमा को तोड़ने का काम किया था.

बता दें कि साल 2018 के मई महीने में कोलकाता के नारकेलडांगा में कुछ उपद्रवियों द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति तोड़ने का मामला सामने आया था. यहां पार्क में बनी नेता जी की मूर्ति पर एक क्रूड बम फेंका गया था, जिससे मूर्ति का एक हिस्सा पूरी तरह टूट गया था.

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