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Reading: ‘जननी सुरक्षा योजना’ का लाभ लेने को मर्द भी बने ‘जननी’
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BeyondHeadlines > Health > ‘जननी सुरक्षा योजना’ का लाभ लेने को मर्द भी बने ‘जननी’
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‘जननी सुरक्षा योजना’ का लाभ लेने को मर्द भी बने ‘जननी’

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published February 26, 2014 20 Views
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11 Min Read
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Afroz Alam Sahil for BeyondHeadlines

‘जननी सुरक्षा योजना’ भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रायोजित योजना है, जिसकी शुरूआत देश के प्रधानमंत्री द्वारा 12 अप्रैल, 2005 को की गई.  इसके अंतर्गत हर जननी को शिशू के जन्म पर गांवो में 1400 और शहरों में 1000 रूपये मिलने का प्रावधान है.

लेकिन देश में शिशु मृत्यु-दर पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी “जननी सुरक्षा योजना” जनता के लिए अभिशाप और सरकारी अधिकारियों के लिए वरदान साबित हो रही है.

BeyondHeadlines को प्राप्त जानकारी के अनुसार देश के लगभग हर जिला एवं तहसील से लेकर ब्लॉक स्तर पर घोटाला ही घोटाला है. जिस तरह बिहार में लालू जानवरों का चारा तक खा गए. उसी को आदर्श मानकर देश के लगभग सभी राज्यों में स्वास्थ विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, डॉक्टर, नर्स अपने-अपने पेट के हिसाब हजार गुना बढ़कर गरीब जनता का पेट चीरने में लगे हैं.

घोटालों की तरफ आगे बढ़ने से पहले आइए पहले हम भारत सरकार के कुछ दावों को बखूबी जान लें…

BeyondHeadlines को भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आरटीआई से हासिल महत्वपूर्ण दस्तावेज़ यह बताते हैं कि ‘जननी सुरक्षा योजना’ के तहत साल 2012-13 में 1784.45 करोड़ का बजट आवंटित किया गया और खर्च 1640.53 करोड़ रूपये हुए. साल 2011-12 में भी 1741 करोड़ हुए और खर्च 1606.18 करोड़ किए गए. जबकि साल 2010-11 में 1670 करोड़ का बजट रखा गया और खर्च 1618 करोड़ हुए. साल 2009-10 में 1515 करोड़ का बजट रखा गया था और खर्च 1474 करोड़ हुआ. उसी तरह साल 2008-09 में 1281 करोड़ का बजट था और खर्च 1241.3 करोड़ किया गया.

यानी कागज़ों में यह योजना पूरी तरह से सफल रही. जितना पैसा आवंटित किया गया, लगभग उसके आस-पास खर्च भी कर दिया गया, ताकि हर जननी को इस योजना का लाभ मिल सके.

आइए! अब लाभांवितों की बात की जाए. साल 2012-13 में लाभांवितों यह संख्या 1.06 करोड़, साल 2011-12 में 1.09 करोड़, साल 2010-11 में 1.07 करोड़, 2009-10 में 1.01 करोड़ और साल 2008-09 में 0.90 करोड़ रही. इस प्रकार देखा जाए तो हर साल करोड़ों माताएं इस योजना से लाभ उठा रही हैं.

लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि लाभांवितों के यह आंकड़े महज़ काग़ज़ों की ही शोभा बढ़ाते रहे हैं. क्योंकि इस योजना का अधिकतर पैसा जननी के सुरक्षा के नाम पर सरकारी अधिकारियों के ही पेट में गया है. यानी हम कह सकते हैं कि जननी सुरक्षा योजना में पैसों का खूब बंदरबांट हुआ. और इस बंदरबांट में उत्तर प्रदेश पहले  स्थान पर रहा.

पिछले वर्षों उत्तर प्रदेश में ‘जननी सुरक्षा योजना’ में घोटाले की जाँच कर रही निरीक्षक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने खुद करोड़ों के घोटाले का मामला उजागर किया. जांच के दौरान सीएजी की ऑडिट टीम ने पाया कि वर्ष 2005-11 तक प्रदेश में 1219 करोड़ रुपये का भुगतान जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 69.19 लाख गर्भवती महिलाओं को किया गया. जांच में ये भी पता चला कि वर्ष 2008-2011 तक करीब 1085 करोड़ रुपयों के भुगतान का कोई सत्यापन नहीं हुआ है. हरकत में आई सीएजी की ऑडिट टीम ने जब मामले की जांच-पड़ताल तेज़ की तो इस बात की जानकारी मिली कि गर्भवती महिलाओं के भुगतान में भी कई तरह के हेर-फेर हुए हैं.

यही नहीं, मीडिया के ख़बरों के मुताबिक साल 2014 में अकेले बाराबंकी ज़िले में करोड़ों रूपये के घोटाले सामने आए. एटा में भी सिर्फ साल 2011 में ही जननी सुरक्षा योजना में 2 करोड़ 80 लाख के गबन का मामला प्रकाश में आया. कौशांबी और बहराइच में भी साल 2013 में करोड़ों के हेरफेर हुए. तकरीबन यही हाल पूरे प्रदेश का रहा.

सिर्फ यूपी ही नहीं, बिहार में भी इस योजना के नाम पर जमकर बंदरबांट किया गया. नियंत्रक एवं महा लेख परीक्षक-2009 (कैग) की एक रिपोर्ट के मुताबिक जांच में यह पाया गया कि इस साल 298 महिलाओं को इस योजना के तहत 6.6 लाख रुपये का भुगतान किया गया. और दिखाया यह गया कि उन्होंने 60 दिनों के अंदर दो से पांच तक बच्चों को जन्म दिया है. यह अनियमितताएं बाकी के वर्षों में भी भागलपुर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, किशनगंज और नालंदा जिलों में पाई गईं.

जहां एक ‘माता’ 60 दिनों के अंदर दो से पांच बार बच्चे को जन्म देने का काम कर रही थी, उसी दरम्यान दुर्भाग्यपूर्ण बात यह रही कि अपने बच्चे को दूध पिलाने वाली हजारों माताओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका. कैग के एक रिपोर्ट के मुताबिक 4,70,307 नई माताओं में से 97,146 को फंड की कमी के कारण जननी सुरक्षा योजना के तहत कैश सहायता नहीं मिल पाई.

राजस्थान की कहानी तो सारी हदों को पार कर गया. यहां के उदयपूर की कहानी सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे. आपने सोचा भी नहीं होगा कि पुरुष भी बच्चे पैदा कर सकते हैं? पर आप ग़लत हैं. राजस्थान में ऐसा ही हो रहा है. राजस्थान के स्वास्थ्य केंद्र पर ऐसी एक नहीं 32 घटनाएं दर्ज हैं. यहीं नहीं, यहां 60 साल की एक महिला ने एक साल में 24 बार बच्चों को जन्म दिया है. गर्भवास्था वार्ड की प्रमुख ने खुद भी एक साल में 11 बच्चे पैदा किए. गिनीज़ बुक के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ देने वाले इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि यह हकीक़त नहीं बल्कि जननी सुरक्षा योजना में एक ज़बरदस्त घोटाला है.

मोदी के गुजरात की कहानी तो और भी दिलचस्प है. गुजरात का अपना चिरंजीवी योजना है. जो 2005 में जननी सुरक्षा योजना के लागू होने के बाद शुरू किया गया था. इन दोनों योजनाओं का मक़सद एक है. हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद गुजरात सरकार पर पर केंद्रीय योजनाओं को अपनी सरकार के नाम से चलाने का आरोप लगा चुके हैं. और यह आरोप सही मालूम पड़ता है. इतना ही नहीं, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आरटीआई से हासिल महत्वपूर्ण दस्तावेज़ यह बताते हैं कि ‘जननी सुरक्षा योजना’ के तहत हर साल गुजरात को अच्छा-खासा फंड न सिर्फ केन्द्र से हासिल होता रहा है, बल्कि यह सारे पैसे गुजरात में खर्च भी किए जाते  रहे हैं.

BeyondHeadlines को प्राप्त दस्तावेज़ यह बताते हैं कि साल 2012-13 में 25.81 करोड़ रूपये जननी सुरक्षा योजना के तहत गुजरात सरकार को दिया गया, और गुजरात सरकार ने दिसम्बर, 2012 तक 13.07 करोड़ रूपये खर्च भी किए. साल 2011-12 में भी गुजरात सरकार को 21 करोड़ का फंड हासिल हुआ, जिसमें से उन्होंने 19.93 करोड़ रूपया खर्च भी किया. साल 2010-11 में 22.4 करोड़ हासिल हुआ और खर्च 16.65 करोड़ ही हो सका. साल 2008-09 की कहानी भी ऐसी ही रही. इस साल 18.08 करोड़ का फंड हासिल हुआ और खर्च 13.64 करोड़ किया गया. वहीं अगर लाभांवितों की बात की जाए तो साल 2012-13 में यह संख्या 3.09 लाख, साल 2011-12 में 3.42 लाख, साल 2010-11 में 3.44 लाख तथा साल 2009-10 में 3.56 लाख रही.

गुजरात सरकार की वेबसाइट यह भी बता रही है कि केन्द्र सरकार के जननी सुरक्षा के असर को कम करने के लिए 1400 रूपये के बजाए गुजराती गरीब माताओं को सिर्फ 500 रूपये ही दिए जाते रहे हैं. और अब एक आदेश (Order No.: FW/MH/Changes in JSY//2013, dated 01/08/2013) के बाद इस रक़म को बढ़ाकर गांवों के लिए 700 और शहरी क्षेत्र के लिए 600 रूपये कर दिया गया है.

एक दूसरी सच्चाई यह भी है कि गुजरात का सरकार का सारा ध्यान अपने ‘चिरंजीवी योजना’ पर ही रही. इस योजना को 2006 में एशि‍यन इनोवेशन अवार्ड भी दि‍या गया. लेकिन मोदी के गुजरात में मोदी की चि‍रंजीवी योजना मुंह के बल गि‍र चुकी है. इस योजना पर डयूक यूनिवर्सिटी के एसि‍स्टेंट प्रोफेसर मनोज मोहनन की रिपोर्ट भी आ चुकी है. जो इस योजना के फेल होने की कहानी को बयान करती है.

इस रिपोर्ट में मोहनन का कहना है कि इस योजना का पैसा प्राइवेट अस्पतालों को दि‍या जा रहा है. और ये अस्पताल केवल पैसा बनाने में लगे हुए हैं न कि लोगों तक योजना का लाभ पहुंचाने में. यानी इस योजना से सिर्फ और सिर्फ कारपोरेट घरानो के बड़े अस्पतालों का फायदा हो रहा है.  रिपोर्ट यह भी बताती है कि योजना में 17 अगस्तल 2010 से पहले तक एक डि‍लीवरी के 1795 रुपए दि‍ए जाते थे, लेकिन अब इस तारीक के बाद ये रक़म बढ़ाकर 2800 रुपए कर दी गई. और अब इस रक़म को चार हजार रुपए करने का प्रस्ताव है. ताकि प्राइवेट अस्पतालों का अधिक से अधिक फायदा करवाया जा सके और फिर इनसे अपनी चुनावी रैलियों के लिए अधिक से अधिक चंदा हासिल किया जा सके.

इधर केन्द्र सरकार ने भी ‘जननी सुरक्षा योजना’ को अब खाद्य सुरक्षा कानून के अन्तर्गत करने का फैसला ले लिया है. जिसके तहत अब गर्भवती महिलाओं या जिन्होंने तुरंत बच्चे को जन्म दिया हो, उन महिलाओं को छह महीनों में 6,000 रुपये तक मदद देने का प्रावधान किया गया है.

TAGGED:janani suraksha yojna
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