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BeyondHeadlines > India > प्रशासन के झुकने के बाद ‘कोशी नव निर्माण मंच’ का सत्याग्रह हुआ समाप्त
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प्रशासन के झुकने के बाद ‘कोशी नव निर्माण मंच’ का सत्याग्रह हुआ समाप्त

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published January 14, 2019 8 Views
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6 Min Read
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BeyondHeadlines News Desk

सुपौल : विगत 10 जनवरी से सुपौल समाहरणालय के सामने रोड पर दिन-रात डटे कोशी तटबन्ध के बीच के सत्याग्रही प्रशासन के झुकने के बाद अपना सत्याग्रह आज शाम इस शर्त के साथ समाप्त कर दिया गया कि जनवरी तक यदि ठोस कार्य धरातल पर नहीं पहुंचता है तो दुबारा इस सत्याग्रह के दूसरा चरण शुरू का आगाज़ किया जाएगा.

इस सत्याग्रह के समाप्ति से पहले 9 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने यहां के डीएम से मुलाक़ात कर अपनी मांगों को रखा.

इस प्रतिनिधि मंडल में शामिल लोगों के मुताबिक़, कटाव पीड़ितों के नदी की धारा में समाहित होने वाले घरों की क्षतिपूर्ति जल्द दिलाए जाने की मांग पर डीएम ने कहा कि हमने सूची के आधार पर राशि की मांग की है, पर विभाग द्वारा पैसा नहीं आया है. सोमवार को पुनः रिमांडर भेजते हुए यथाशीघ्र मंगवाने की कोशिश में हैं, जिसके बाद तुरन्त खाते में राशि भेजी जाएगी.

विभाग द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया और तय मान दर के अनुसार तटबंध के अंदर रहने वाले सभी को मुफ्त साहायता के साथ वस्त्र और वर्तन/घरेलू सामान हेतु देय अनुदान उनके खाते में भिजवाने के मुद्दे पर डीएम ने सरकार के नियमों की खामी बताते हुए सरकार से दिशा-निर्देश लेने पर सहमत हुए.

फ़सलों की हुई क्षति के लिए निर्धारित मान दर के अनुसार क्षतिपूर्ति दिलाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फ़सल सहायता योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन कर उसे भुगतान कराने में मदद करेंगे.

तटबंध के बीच में रह रहे लोगों में जो खाद्य सुरक्षा से वंचित परिवारों हैं, उनको भी वर्ष भर राशन देने की व्यवस्था हेतु पहल करने पर उन्होंने कहा कि अभी भी इससे वंचित लोग ऑनलाइन आवेदन करें, उन पर विचार करेंगे.

बांस बोरिंग के नाम पर भूमि विकास बैंक द्वारा 39 वर्ष वाद शुरू हुई वसूली माफ़ कराने की पहल विषय पर उन्होंने एक पदाधिकारी को बैंक से बातकर इनका निष्कर्ष निकालने की कोशिश शुरू कराई.

लगान (मालगुज़ारी) और सेस समाप्त करने की पहल को नीतिगत बात मानते हुए उसके लिए प्रशासन से सहयोग का भरोसा दिया.

पारदर्शिता लाते हुए संचालित किए गए सभी कार्यो के आंकड़े समेत सभी जानकारियां वेबसाईट व अन्य स्थानों प्रदर्शित करने के सवाल पर अन्य सूचनाओं को ज़िले के वेबसाईट पर डालने पर सहमति जताई.

सभी काम मांगने वाले को मनरेगा में कार्य की व्यवस्था व तत्क्षण मज़दूरी के भुगतान की व्यवस्था के सवाल पर सभी मज़दूरों से काम मंगवाने को कहा.

पुनर्वास से वंचित लोगों को पुनर्वास दिलाने का विशेष अभियान चले और उन वंचित परिवारों को पुनर्वासित कराया जाने के सवाल पर अनुमंडल पदाधिकरी ने कहा कि सुपौल अनुमंडल में पड़ने वाले सभी पुनर्वास स्थलों पर जिनका क़ब्ज़ा नहीं है उनका आवेदन कराए. मैं अन्य कार्यो के साथ उसको भी निपटाऊंगा.

तटबंध के अंदर रह रहे लोगों के शिक्षा व तत्काल में संचालित विद्यालयों भौतिक सत्यापन हो वहां रह रही आबादी का सर्वे कराकर शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 6-14 वर्ष के प्रत्येक बच्चों को शिक्षा दिलाने के सवाल पर उन्होंने प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी, मुखिया, वार्ड सदस्यों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर इस कार्य को आगे बढ़ने की बात मानी.

स्वास्थ्य से वंचित इस विशाल आबादी के सवाल पर तत्काल तटबन्ध के क़रीब के विद्यालयों पर टीकाकरण केन्द्र शुरू करने की बात स्वीकारी.

कोशी के समस्या की दीर्घ-कालिक उपायों की पहल पर उन्होंने कहा कि ज़िला प्रशासन जल्द एक कमेटी बनाकर इस दिशा में बढ़ेगा.

बता दें कि यह सत्याग्रह ‘कोशी नव निर्माण मंच’ के बैनर तले तटबंध के अंदर इस वर्ष आई बाढ़ और कटाव पीड़ितों को सरकरी मानकों के अनुरूप साहाय्य अनुदान और क्षतिपूर्ति दिलाने सहित अन्य बुनियादी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन धरना सह सत्याग्रह की शुरुआत किया था.

ग़ौरतलब रहे कि कोशी तटबंध के अंदर इस साल भी विकराल रूप से बाढ़ आई थी. फसलें नष्ट हुई थी. खोखनहा मुसहरी समेत हज़ारों लोगों के घर नदी की धारा में विलीन हो गए थे. तटबन्ध के अन्दर के लोगों के साथ वर्षो से भेदभाव होता रहा हैं. उनको न ही समुचित पुनर्वास मिला, न ही उनकी ज़मीन के बदले ज़मीन ही दी गई, जिसके कारण आज भी नदी की धाराओं के बीच वे लोग रहने को विवस हैं.

ज़िला प्रशासन, सरकार द्वारा बनाए गए बाढ़ सम्बन्धित मानकों और दिशा-निर्देशों को नहीं मान रहा था और ग़ैर-ज़िम्मेवार रवैया अपना रहा है. इस आशय का आग्रह ज़िला प्रशासन से अनेक बार किया गया, परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई. थक-हार कर 30 अगस्त 2018 को डीएम के समक्ष धरना भी दिया गया. जिसके प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के दौरान डीएम ने यथाशीघ्र दिलाने का वचन दिया, परन्तु वह 4 माह में भी पूरा नहीं हुआ.

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