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BeyondHeadlines > Haj Facts > हज पर जाने वालों के साथ खिलवाड़, इनके लिए बना टीका गुणवत्ता परीक्षण में फेल
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हज पर जाने वालों के साथ खिलवाड़, इनके लिए बना टीका गुणवत्ता परीक्षण में फेल

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published July 11, 2019 13 Views
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7 Min Read
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Afroz Alam Sahil, BeyondHeadlines

नई दिल्ली: हज-यात्रियों के नाम पर टीका ख़रीद में भ्रष्टाचार की कहानी अब पुरानी पड़ चुकी है. नई कहानी ये है कि भारतीय हज यात्रियों के लिए तैयार किया गया मेनिनजाइटिस रोधी टीका परीक्षण में फेल हो गया है. 

बता दें कि कसौली स्थित भारत सरकार के सेन्ट्रल ड्रग लैबोरेट्री ने 90 हज़ार खुराकों के दो बैच को अपने गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाया है. ये टीके ग़ाज़ियाबाद स्थित कम्पनी ‘बायो-मेड प्राईवेट लिमिटेड’ के ज़रिए बनाए गए थे, जिसकी पहचान एक दाग़ी कम्पनी की है. 

पोलियो के ख़राब टीके की आपूर्ति करने के बाद से ही इस ‘बायो-मेड प्राईवेट लिमिटेड’ पर कड़ी नज़र रखी जा रही थी. इसी के तहत पिछले साल सितंबर से टीकों के निर्माण और आपूर्ति पर रोक लगा दी गई थी. बावजूद इसके स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस साल हज यात्रियों के लिए इसे टीका बनाने की विशेष इजाज़त दे दी. ये इजाज़त इस आधार पर दी गई कि यह भारत की एकमात्र कम्पनी है, जो मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस का टीका तैयार करती है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के इस फ़ैसले पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने काफ़ी चिंता जताई है. अंग्रेज़ी के मिंट अख़बार को दिए एक बयान में एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा है, “यह अजीब बात है कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने उस कम्पनी को अनुमति दी, जो पहले से ही कुछ पैसे बचाने के लिए उन्हें ख़राब वैक्सीन की आपूर्ति कर रही है.”

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 5 जुलाई को एक तत्काल बैठक भी बुलाई.  

अंग्रेज़ी के मिंट अख़बार ने स्वास्थ्य मंत्रालय के एक आंतरिक दस्तावेज़ के आधार पर बताया है कि “सेन्ट्रल ड्रग लैबोरेट्री में प्रारंभिक परिणामों से यह पता चला है कि बायो मेड कम्पनी के क्वाड्रीवैलेन्ट मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस वैक्सिन के नमूने संतोषजनक परिणाम नहीं दे रहे हैं. हालांकि अंतिम परिणाम आना अभी बाक़ी है.”

“हज मामले” से संबंधित एक दस्तावेज़ जो संयुक्त सचिव द्वारा 4 जुलाई को प्रसारित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वैक्सीन की ख़रीद समय पर पूरी हो, यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक विकल्पों की जांच करने के लिए विस्तृत समीक्षा हो. हालांकि टीकों की खरीद के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा भी 2 और 3 जुलाई को बैठकें आयोजित की गईं, जहां “आपातकालीन ख़रीद” करने का निर्णय लिया गया. लेकिन आपको बता दें कि कई शहरों से हज-यात्री मक्का व मदीना के लिए रवाना भी हो चुके हैं. इस बार भारत से दो लाख यात्री मक्का-मदीना हज के लिए जाएंगे.

हज यात्रियों के लिए टीका ख़रीद में घोटाला

भारतीय मुसलमानों के मुक़द्दस हज को भारत सरकार अपने भ्रष्टाचार का माध्यम बना चुकी है. हज यात्रियों को हज से पहले लगाए जाने वाले दिमाग़ी बुखार के टीकों की ख़रीद में जमकर घोटाले हुए और इस घोटाले को सरकार स्वीकार भी कर चुकी है.

साल 2017 में राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में खुद स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा यह बता चुके हैं कि सरकार को साल 2015 में हज यात्रियों हेतु सीजनल इन्फ्लूएंजा टीके (एसआईवी) की ख़रीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायत मिली है.

मंत्री नड्डा ने विस्तारपूर्वक बताया कि साल 2015 में एसआईवी की ख़रीद के लिए चिकित्सा भंडार संगठन (एमएसओ) ने खुली निविदा आमंत्रित की थी. निविदा में दो फ़ार्मा कम्पनी —मैसर्स अबॉट इंडिया लि. तथा मैसर्स सनोफ़ा पाश्चर ने भाग लिया था. निविदा के शर्तों के अनुसार एसआईवी प्रि-फिल्ड सिरीज़ (पीएफएस) प्रेज़ेन्टेशन में होनी अपेक्षित थी, जो कि विदेशी निर्माताओं के मामले में डब्ल्यूएचओ का निष्पादन, गुणवत्ता और सुरक्षा (डब्ल्यूएचओ पीक्यूएस) मानकों के अनुरूप होनी चाहिए थी.

उन्होंने आगे बताया कि इसमें मैसर्स सनोफा पाश्चर का निविदा ठीक पाया गया था और उनकी मूल्य संबंधी निविदा को खोला गया था. इस कंपनी ने 433 रूपये प्रति डोज की दर कोट की थी. एकीकृत ख़रीद समिति ने इस दर पर मोलभाव किया तथा टीके को 412 रूपये प्रति डोज ख़रीदा गया था.

हालांकि जे.पी. नड्डा ये भी मानते हैं कि 2014 और 2016 में इस टीके को कम दर पर खरीदा गया था. मतलब 2016 में 2015 से कम दाम पर. आरोप यह है कि दूसरी कम्पनी ने खरीदी गई दर से आधी क़ीमत का रेट लगाया था.

यही नहीं, हाजियों के लिए टीके दिए जाने ke अनुबंध की लड़ाई दोनों कम्पनियों में इतनी बढ़ी कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इस पूरे मामले में हाजियों के लिए टीका ख़रीद के नाम पर कई मामले सामने आए.

इस बार भी बायोमेड से खरीद की गई टीके की क़ीमत 250 रूपये बताई थी, लेकिन अब गुणवत्ता निरीक्षण में फेल होने के बाद जो टीके खरीदे जाएंगे, एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उनकी क़ीमत 1500-2000 रूपये होगी. और स्वास्थ्य मंत्रालय 72 हज़ार डोज की “आपातकालीन ख़रीद” भी कर चुका है, आगे और भी टीके खरीदे जाएंगे.   

स्पष्ट रहे कि सऊदी क़ानून के मुताबिक़ हज पर जाने के लिए हर हाजी को दिमाग़ी बुख़ार का टीका लेना ज़रूरी है. इसके लिए हज कमिटी ऑफ़ इंडिया, मुंबई में हर साल दिमाग़ी बुख़ार के टीके लगाए जाते हैं. बाक़ी राज्यों में हाजी खुद भी कहीं से टीके लगवा सकते हैं और कई जगहों पर हज हाऊस, स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर टीके लगाने का कैम्प लगाता है. यही नहीं, पोलियो की खुराक हज पर जाने के छह हफ्ते पहले लेना लाज़िमी है.

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