BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Reading: पर्यावरण दिवस की औपचारिकताओं के बीच “महान” जंगल बचाने की क़वायद
Share
Font ResizerAa
BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
Font ResizerAa
  • Home
  • India
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Search
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Follow US
BeyondHeadlines > Lead > पर्यावरण दिवस की औपचारिकताओं के बीच “महान” जंगल बचाने की क़वायद
Leadबियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी

पर्यावरण दिवस की औपचारिकताओं के बीच “महान” जंगल बचाने की क़वायद

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published June 5, 2014 6 Views
Share
9 Min Read
SHARE

Avinash Kumar chanchal for BeyondHeadlines

आज पर्यावरण दिवस है. सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं की तरफ से कई आयोजन किये जा रहे हैं, लेकिन ये आयोजन सिर्फ औपचारिकता भर बनकर रह गया है. सिंगरौली और विंध्य क्षेत्र जो एक समय में घने जंगलों और जानवरों के लिए प्रसिद्ध था, आज ज्यादातर कोयला खदानों, पर्यावरण प्रदुषण के लिए देश भर में जाना जाता है. हर बार नये-नये पावर प्रोजेक्ट इस इलाके में आते गए और यहां के जंगल और ज़मीन खत्म होते गए. परिणाम हुआ कि इलाके के स्थानीय लोग प्रदुषण से पैदा होने वाली कई तरह की रहस्यमयी बिमारियों की चपेट में हैं.

ऐसे में सिंगरौली के माड़ा तहसील में स्थित महान वन क्षेत्र उन आखरी बच चुके घने जंगलों में से एक है, जो सिंगरौली में जंगलों और पहाड़ों के अतीत को बताता है. लेकिन महान जंगल पर भी सरकार और निजी कंपनियों की बुरी नज़र लग गयी है. इस जंगल को महान कोल लिमिटेड (एस्सार व हिंडाल्को का संयुक्त उपक्रम) को कोयला खदान के लिए देना प्रस्तावित है.

पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण महान का जंगल

महान के जंगलों को एशिया के सबसे बड़े तथा पुराने साल वनों में शुमार किया जाता है. इनका अनुमानित आच्छादान करीब 70 प्रतिशत है. महान वन क्षेत्र में आदिवासियों की संख्या ज्यादा है.

रिपोर्टों के अनुसार बाघ तथा एशियाई हाथी भी कभी-कभी इन जंगलों से गुज़रते हैं. इसके अलावा तेंदूआ, भालू, लकड़बग्घा, जंगली कुत्ता, चिंकारा, चौसिंघा, नीलगाय तथा सांबर जैसे लुप्तप्राय जीव भी इन वनों में निवास करते हैं. गिद्धों के अलावा जंगल में साल, साजा, महुआ, तेंदू सहित 164 पादप प्रजातियां मौजूद हैं. इस जंगल में करीब पांच लाख पेड़ मौजूद हैं.

केन्द्रीय मंत्री और पर्यावरण से जुड़े लोग भी महान जंगल को पर्यावरण के लिए ज़रुरी और काफी महत्वपूर्ण बता चुके हैं. पूर्व केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्री जयराम रमेश ने महान के बारे में आठ जूलाई 2011 को लिखे अपने अधिकारिक नोट में कहा था, इस कोयला ब्लॉक में खनन की अनुमति दिये जाने से अन्य खंडों में भी खनन की इजाजत दिये जाने के रास्ते खुल जायेंगे. खासतौर पर उन ब्लॉकों में जिन्हें साल 2006 या 2007 में आवंटित किया जा चुका है. यह मात्रा और गुणवत्ता के लिहाज से बेहद समृद्ध वनाच्छादित क्षेत्र को तहस नहस कर डालेगा.

पर्यावरण व वन मंत्रालय की सलाहकार समिति ने वन भूमि को वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत गैर वन प्रयोग के लिये देने के वास्ते वर्ष 2008-09 के दौरान चार बार समीक्षा की थी और वर्ष 2011 में मध्य में क्षेत्र का दौरा करने के बाद परियोजना को मंजूरी देने के खिलाफ मत दिया था.

पर्यावरण और वन मंत्रालय तथा कोयला मंत्रालय की संस्था केन्द्रीय खदान आयोजना एवं विकास संस्थान लिमिटेड ने जनवरी-फरवरी 2010 में संयुक्त रुप से एक एक क़वायद की थी, जिसमें महान कोयला ब्लॉक को प्रवेश निषिद्ध नो-गो जोन के रुप में चिन्हित किया गया था. हालांकि बाद में मंत्रालय ने जूलाई 2011 में मंत्री समूह से इस प्रकरण पर निर्णय लेने को कहा था. मंत्रिसमूह ने मई 2012 में इस परियोजना पर विचार करने की सिफारिश की थी.

जारी है ग्रामीणों का संघर्ष

महान जंगल को बचाने के लिए महान जंगल क्षेत्र के ग्रामीणों ने महान संघर्ष समिति का गठन किया है. यह संगठन सालों से महान जंगल पर वनाधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहा है. संगठन के कुछ सदस्यों ने जूलाई 2013 में जनजातिय मंत्री केसी देव से भी इस संबंध में मुलाकात की थी.

जनजातिय मामलों के मंत्री वी किशोर देव द्वारा मध्यप्रदेश के राज्यपाल राम नारायण यादव को 19 जून 2013 को लिखे पत्र में कहा गया कि मोटे तौर पर देखें तो सिंगरौली जिले में बड़ी मात्रा में वन भूमि को गैर वन उद्देश्यों के लिए परिवर्तित किया गया है, लेकिन एक भी जगह सामुदायिक वन अधिकार प्रदान नहीं किये गए. जनजातीय लोगों तथा प्रभावित पक्षों ने वन अधिकार अधिनियम लागू नहीं किये जाने की अनेक शिकायतें पत्र के माध्यम से अधिकारियों से की हैं, लेकिन उनका कोई नतीजा नहीं निकला है. प्रभावित होने वाली जनजातियों तथा क्षेत्र के सीमान्त वर्गों के कड़े विरोध के बावजूद महान कोल लिमिटेड को वन तथा खनन स्वीकृति दे दी गयी.

महान जंगल में हजारों ग्रामीणों की जीविका भी जुड़ी हुई है. महुआ, तेंदू, लकड़ी, चार, चिंरौची जैसे जंगली उत्पादों की बदौलत यहां के ग्रामीण सदियों से आपनी आजीविका चलाते आए हैं. साथ ही, ग्रामीणों के लिए महान का जंगल जड़ी-बुटी आदि देने का काम भी करती है.

पर्यावरण पर काम करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था ग्रीनपीस के सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई के अनुसार अगर महान जंगल को कोयला खदान देने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से 54 गांवों के लोग प्रभावित होंगे. इनमें ज्यादातर आदिवासी और दलित समुदाय के लोग हैं. इसलिए ग्रामीणों ने अपनी जीविका को बचाने के लिए शांतिपूर्वक तरीके से प्रस्तावित खदान का विरोध जारी रखने का निर्णय लिया है.

महान का यह जंगल हाथियों के कॉरिडोर के लिए भी प्रसिद्ध रहा है. झारखंड और छत्तीसगढ़ से होते हुए महान जंगल से हाथियों का झुंड गुजरता रहा है. साथ ही, ग्रामीण बताते हैं कि तीन-चार साल पहले इस इलाके में बाघ भी देखा गया था. महान जंगल में भालू, लोमड़ी, लकड़बग्घा, खरगोश, बंदर सहित कई तरह के अन्य वन्य जीव स्थायी रुप से निवास करते हैं. अगर इस वन क्षेत्र में कोयला खदान खुलता है तो इससे मानव और जानवरों के बीच तकराहट बढ़ेगा क्योंकि इन जानवरों का स्थायी निवास खत्म होने के बाद ये जानवर गांवों की तरफ आ सकते हैं.

इस वन क्षेत्र में कोयला खदान आने से कई छोटी-छोटी पहाड़ी नदियों के उपर खतरा आ जाएगा तो वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों को भी दुषित पेयजल पीने को मजबूर होना पड़ेगा. महान का इलाका रिहन्द बांध से सटे होने के कारण इस इलाके की ज़मीन उर्वर बनी रहती है. जंगल काटे जाने से इस इलाके के जलवायु में परिवर्तन तो होगी ही साथ ही खेती-किसानी के लिए भी खतरा हो जाएगा.

एस्सार द्वारा पहले से ही शुरू पावर प्लांट के ऐश पॉण्ड के टूटने से स्थानीय ग्रामीणों के खेत बर्बाद हुए थे और आए दिन उन्हें प्रदुषित हवा में साँस लेना पड़ रहा है.

यह मामला सिर्फ महान कोल लिमिटेड का ही नहीं है. अगर महान कोल महान जंगल पर कोयला खदान खोलने में सफल रहा तो इसका मतलब होगा इस वन क्षेत्र में प्रस्तावित दूसरे कोयला खदान के लिए दरवाजा खोल देना. इनमें छत्रसाल सहित अन्य कोल ब्लॉक शामिल हैं.

इन सबके बावजूद उम्मीद कायम है. महान कोल लिमिटेड को मिले पर्यावरण मंजूरी के खिलाफ महान संघर्ष समिति ने एनजीटी का दरवाजा खटखटाया है. फिलहाल, अक्टूबर तक पेड़ों को नहीं काटा जायेगा, लेकिन ग्रामीणों ने महान जंगल में वन सत्याग्रह जारी रखा है और कंपनी के किसी भी तरह के खदान से संबंधित कार्यों का शांतिपूर्वक तरीके से विरोध किया जा रहा है.

खबर है कि जंगलों को कोयला खदान के लिए नष्ट करने वाली महान कोल लिमिटेड ने भी पर्यावरण दिवस के दिन बच्चों के बीच पर्यावरण जागरुक से जुड़ी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया. इस निजी कंपनी को समझना चाहिए कि पर्यावरण दिवस पर औपचारिक आयोजन की बजाय उन्हें सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक साधन अपना कर देश की बिजली ज़रुरत को पूरा करने का वक्त आ गया है.

आज जिन ग्रामीण बच्चों के बीच वे पर्यावरण जागरुकता के कार्यक्रम को आयोजित कर रहे हैं, उन्हीं बच्चों का भविष्य कोयले के धूल फांकने को विवश होगा, अगर महान जैसे जंगल क्षेत्र में कोयला खदान खुलने में सफल हो जाता है.

TAGGED:environment day and mahan
Share This Article
Facebook Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Telangana Must Order CBI Inquiry into Alleged Murder of Advocate Moizuddin in Waqf Cases
India Waqf Facts
Waqf Registration Ends With Fears of Vanishing Properties
Exclusive India Waqf Facts
The Waqf Act 2025, Supreme Court Interim Ruling, and the Role of Muslims in Protecting Waqf Properties
Waqf Facts
Supreme Court Verdict on the Waqf Act: Justice or Just Temporary Consolation?
India Waqf Facts Young Indian

You Might Also Like

ExclusiveIndiaLead

What Happened After Assam Converted Madrasas into Schools? A Ground Report on Education, Identity, and Community Impact

June 4, 2026
IndiaLeadYoung Indian

Uttarakhand’s New Minority Education Overhaul: End of Madrasa Board, Curriculum Shift, and Rising State Control Explained

May 10, 2026
EducationIndiaLeadYoung Indian

55 Candidates with Muslim Names in UPSC Final List, Check the List

March 9, 2026
Edit/Op-EdIndiaLead

India’s Minorities and the Budget: A Numbers Game or a Test of Political Will?

February 3, 2026
Copyright © 2025
  • Campaign
  • Entertainment
  • Events
  • Literature
  • Mango Man
  • Privacy Policy
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?