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स्वाईन फ्लू (H1N1) से बचने के 21 उपाय

BeyondHeadlines News Desk

– इस बीमारी का टेंशन बिल्कुल भी न लें. याद रखें कि ‘स्वाईन फ्लू से डरना नहीं, लड़ना है…’

– साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें. फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरतें. अगर आप सावधान हैं तो इस बीमारी के फैलने के चांस न के बराबर हो जाते हैं.

– छींकते और खांसते वक़्त अपने मुंह और नाक को रूमाल या कपड़े से अवश्य ढ़कें. जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें.

– इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें.

– थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें.

– लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें. नाक, आंख या मुंह को न छुएं.

– भीड़-भाड़ वाली जगह से बचें, फ्लू से संक्रमित लोगों से एक हाथ से अधिक की दूरी पर रहें.

-बुखार, खांसी और गले में खराश हो तो सार्वजनिक जगहों से दूर रहें. सार्वजनिक जगहों पर न थूकें.

– फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

– फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें. कोशिश करें कि ऑफिस, बाजार या स्कूल न जाएं.

– बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें.

– खूब पानी पीएं और पौष्टिक आहार लें. पूरी नींद भी ज़रूरी है.

– चिकित्सक के परामर्श के बिना दवाई न लें.

– कोशिश करें कि कॉफी न पीएं. चाय पी सकते हैं. (because coffee dehydrate the Respiratory passage.)

– अल्कोहल का प्रयोग न करें. (Alcohol is very harmful for our body and our healthy community and society but particularly in this disease alcohol dehydrate the upper respiratory system so that viruses not easily clear from upper respiratory tract and alcohol decreases the body immunity.)

यह लोग रहें ज़्यादा सावधान :

5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं. जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए:

– फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी

– मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, पर्किंसन

– कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग

– डायबीटीजं

– ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो. ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

– गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है. खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वंं सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की ज़रूरत है.

डाइट का भी रखें ख्याल

– घर का ताजा बना खाना खाएं. पानी ज्यादा पिएं.

– ताजे फल, हरी सब्जियां खाएं.

– मौसमी, संतरा, आलूबुखारा, गोल्डन सेव, तरबूज और अनार अच्छे हैं.

– सभी तरह की दालें खाई जा सकती हैं.

– नींबू-पानी, सोडा व शर्बत, दूध, चाय, सभी फलों के जूस, मट्ठा व लस्सी भी ले सकते हैं.

– बासी खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें न खाएं. बाहर के खाने से बचें.

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इनमें से एक समय में एक ही उपाय आजमाएं.

– 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं.

– गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं.

– गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें.

– 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं.

– आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पिएं. आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है.

– आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

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फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर इन्फ्लुएंजाइनम-200 की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें. इस दवा को बच्चों समेत सभी लोग ले सकते हैं. मगर डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू ज्यादा बढ़ने पर यह दवा पर्याप्त कारगर नहीं रहती, इसलिए डॉक्टरों से सलाह कर लें. जिन लोगों को आमतौर पर जल्दी-जल्दी जुकाम खांसी ज्यादा होता है, अगर वे स्वाइन फ्लू से बचना चाहते हैं तो सल्फर 200 लें. इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा.

ये लोग न पहने मास्क…

– मास्क पहनने की ज़रूरत सिर्फ उन्हें है, जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों.

– फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है.

– भीड़ भरी जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं.

– मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ.

– एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए.

मास्क पहनने वाले इन बातों का रखें ध्यान

– जब तक आपके आस-पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज़ नहीं है, तब तक मास्क न लगाएं.

– अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है.

– खांसी या जुकाम होने पर मास्क ज़रूर पहनें.

– मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है.

– अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो. अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें.

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