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मोबाईल ले रहा है सड़कों पर लोगों की जान, 3172 की मौत 7830 हुए ज़ख्मी

अफ़रोज़ आलम साहिल, BeyondHeadlines 

33 साल के रिज़वान अहमद आज भी इस हादसे को याद करके सिहर जाते हैं. रिज़वान आज से 7 महीने पहले सड़क हादसे के शिकार हुए थे, जिसमें वो मरते-मरते बचे हैं.

रिज़वान बताते हैं कि मैं सुबह 5 बजे पूरे परिवार के साथ पटना के लिए जा रहा था. मेरे साथ उस समय गाड़ी में 6 लोग सवार थे. अचानक मेरी गाड़ी पुल को तोड़ते हुए नहर में गिर पड़ी. अल्लाह का करम है कि इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी अल्लाह ने सबको बचाए रखा. लेकिन किसी की कंधे की हड्डी टूटी, तो किसी के पैर व हाथ. चचा का तो अब भी इलाज चल रहा है. वो अब चल नहीं पाते हैं… ये सब बताते हुए रिज़वान की आंखों में आंसू आ जाते हैं और वो ख़ामोश हो जाते हैं.

इस हादसे का कारण पूछने पर वो बताते हैं कि एक्सीडेन्ट क्यों हुआ, इसका कारण तो मुझे भी नहीं पता. ये सबकुछ अचानक हुआ. लेकिन फिर वो कुछ देर बाद खुद ही सोचकर कहते हैं कि, दरअसल मैं हमेशा ड्राईविंग करते वक़्त मोबाईल पर बात करता हूं क्योंकि मुझे वहीं फ्री टाईम मिलता है किसी से बात करने के लिए. लेकिन इस दिन तो मैं बात भी नहीं कर रहा था. लेकिन हां, मेरे दिमाग़ में बार-बार ये ख़्याल आ रहा था कि नेट ऑन करके देखूं कि वाट्सअप पर किसी का कोई मैसेज तो नहीं आया है. मैं ऐसा सोच ही रहा था कि अचानक मैं पुल तोड़ते हुए नहर में गाड़ी सहित गिर पड़ा. उसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं… लेकिन अल्लाह का शुक्र है और हम सब खुशनसीब हैं कि इतने बड़े हादसे के बाद भी बच गए.

रिज़वान तो खुशनसीब निकले. लेकिन हर किसी का नसीब इतना अच्छा नहीं होता है कि वो ऐसे हादसे के बाद भी बचे. आंकड़ें बताते हैं कि हर साल अच्छे-ख़ासे लोग मौत के शिकार हो रहे हैं. बल्कि मोबाईल के वजह से सड़क हादसों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़ मोबाईल की वजह से साल 2016 में 4 हज़ार 976 सड़क हादसे हुए और इन हादसों में 2 हज़ार 138 लोगों की मौत और 4 हज़ार 746 लोग ज़ख्मी हुए.

साल 2017 में 8 हज़ार 526 सड़क हादसे मोबाईल की वजह से हुए. इन हादसों में 3 हज़ार 172 लोगों की मौत और 7 हज़ार 830 लोग ज़ख्मी हुए.

‘मिशन रोड सेफ्टी’ के आंकड़ों की मानें तो भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 18 फ़ीसद लोगों की मौत ड्राईविंग के दौरान मोबाईल फ़ोन के इस्तेमाल से होती है. साल 2016 में ये आंकड़ा 12 फ़ीसद थी.

वहीं ‘सेव लाइफ़ फाउंडेशन’ का एक सर्वे बताता है कि 94 फ़ीसद लोग मानते हैं कि ड्राईविंग करते समय मोबाईल का इस्तेमाल करना बहुत ही ख़तरनाक है, बावजूद इसके 47 फ़ीसदी लोग ड्राईविंग करते समय फोन रिसीव ज़रूर करते हैं.

इस सर्वे के मुताबिक़ गाड़ी चलाते समय मोबाईल का इस्तेमाल करने से सिर्फ़ ड्राईवर ही ख़तरे में नहीं होता, बल्कि गाड़ी में बैठे तमाम लोग ख़तरे में होते हैं.

96 फ़ीसद लोगों को इस बारे में जानकारी भी है, लेकिन बावजूद इसके वो गाड़ी चलाने वाले को मोबाईल पर बात करने से मना नहीं करते. इस सर्वे के मुताबिक़ 20 फ़ीसद सड़क हादसे मोबाईल के इस्तेमाल से हो रहे हैं.

जानकारों का मानना है कि मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना सड़क हादसे का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है और आने वाले समय में इसके चलते हादसों में बढ़ोत्तरी की आशंका है. लोगों को इस ओर ध्यान देने की ज़रूरत है. जिस तरह से वो जहाज में बैठते ही अपने मोबाईल को फ्लाईट मोड में कर देते हैं, ठीक उसी तरह से ड्राईव करते समय ऐसा करने के बारे में हम सबको सोचना चाहिए.

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