BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Reading: विश्वमारी में गांधी की बड़ी बहू की गई थी जान, ‘भाई’ ने भी कह दिया दुनिया को अलविदा…
Share
Font ResizerAa
BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
Font ResizerAa
  • Home
  • India
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Search
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Follow US
BeyondHeadlines > Exclusive > विश्वमारी में गांधी की बड़ी बहू की गई थी जान, ‘भाई’ ने भी कह दिया दुनिया को अलविदा…
ExclusiveHistoryबियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी

विश्वमारी में गांधी की बड़ी बहू की गई थी जान, ‘भाई’ ने भी कह दिया दुनिया को अलविदा…

Afroz Alam Sahil
Afroz Alam Sahil Published June 3, 2020 31 Views
Share
10 Min Read
SHARE

कोरोना विश्वमारी की तरह ही 102 साल पहले 1918 में पूरी दुनिया स्पेनिश फ्लू के क़हर के गिरफ़्त में थी. कहा जाता है कि इस विश्वमारी की वजह से पूरी दुनिया में कम से कम 5 करोड़ लोग मौत के शिकार हुए. वहीं भारत में इस इन्फ्लूएन्जा की वजह से क़रीब 12 मिलियन लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे. इस तरह उस समय भारत ने अपनी आबादी का 6 फ़ीसदी हिस्सा इस बीमारी में खो दिया.

जिस तरह आज कोरोना से सबसे अधिक मौतें मुंबई में हो रही हैं, ठीक इसी तरह 1918 में भी स्पेनिश फ्लू की वजह से सबसे अधिक लोग उस वक़्त के बॉम्बे में मर रहे थे. एक अंदाज़े के मुताबिक़ साल 1918 की जुलाई में हर रोज़ यहां क़रीब 230 लोग इस फ्लू की वजह से मारे जा रहे थे.

1917 में भारत में फैली थी प्लेग महामारी, 80 हज़ार लोगों की हुई थी मौत

1917 में भारत में प्लेग महामारी फैली. जुलाई 1917 से जून 1918 के बीच लगभग 80 हज़ार लोग मरे. एक तरफ़ किसान महामारी से अभी पूरी तरह निकले भी नहीं थे कि खेड़ा ज़िले में अफ़सरों ने ज़ोर-ज़बरदस्ती करके किसानों से यह कहलवा लिया था कि लगान चुकाने की दृष्टि से फ़सल काफ़ी हुई है. गांधी जी ने इस ज़ोर-ज़बरदस्ती का विरोध किया. कमिश्नर प्रैटने, गांधी जी तथा उनको सहयोगियों की बात से असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के लिए सही रास्ता यही है कि वे बक़ाया रक़म चुका दें.

इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए 17 मार्च, 1918 को गांधी जी ने बम्बई के गवर्नर को एक पत्र लिखा और उन से अपील की कि ‘महामारी से उत्पन्न कष्टों को ध्यान में रखते हुए या तो लगान की वसूली मुलतवी कर दी जाए. यदि मेरे इस अंतिम निवेदन की उपेक्षा कर दी जाती है, जायदादें छीनी, बेची अथवा ज़ब्त की जाती हैं तो मुझे काश्तकारों को खुलेआम लगान न अदा करने की सलाह देने को विवश हो जाना पड़ेगा.’

गांधी एक जगह लिखते हैं कि मुझे तीन बार के प्लेग प्रकोपों का अनुभव है. और एक जगह तो प्लेग को जड़मूल से उखाड़ने में मेरा हाथ था. अन्य दो अवसरों पर भी यद्यपि प्लेग का बिल्कुल नाश नहीं किया जा सका तथापि वह अच्छी तरह से वश में आ गया था.

बता दें कि 1896 में भारत में प्लेग की महामारी फैली थी, तब गांधी राजकोट में थे. 1905 में साउथ अफ़्रीक़ा के जोहानिसबर्ग में ये महामारी फैली, तब गांधी वहीं थे. और 1917-18 में फिर से भारत में यह महमारी फैली. शुरू के दिनों में गांधी चम्पारण में थे, यहां उन्होंने भितिहरवा आश्रम स्थापित कर लोगों का देशी तरीक़े से इलाज किया. फिर गांधी अहमदाबाद के अपने आश्रम में आ गए.    

भारत अभी इस महामारी से पूरी तरह से निकला भी नहीं था कि स्पैनिश फ्लू ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया. बीबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक़ यह फ्लू बॉम्बे (अब मुंबई) में एक लौटे हुए सैनिकों के जहाज़ से 1918 में पूरे देश में फैला था. हेल्थ इंस्पेक्टर जे.एस. टर्नर के मुताबिक़ इस फ्लू का वायरस दबे पांव किसी चोर की तरह दाख़िल हुआ और तेज़ी से फैल गया था. इस इन्फ्लूएन्जा की वजह से क़रीब पौने दो करोड़ भारतीयों की मौत हुई. इस तरह उस वक़्त भारत ने अपनी आबादी का छह फ़ीसदी हिस्सा इस बीमारी में खो दिया.

गांधी की बड़ी बहू गुलाब गांधी की गई जान

इस विश्वमारी में कई अहम लोगों की जान गई. गांधी के पत्रों को देखने से पता चलता है कि गांधी जी के सबसे बड़े बेटे हरिलाल गांधी (23 अगस्त 1888-18 जून 1948) की पत्नी गुलाब गांधी की भी इन्हीं दिनों मौत हो गई थी.

बता दें कि मई 1936 में, 48 साल की उम्र में हरिलाल गांधी ने सार्वजनिक रूप से इस्लाम धर्म को क़बूल किया था और खुद को अब्दुल्लाह गांधी नाम दिया. हालांकि राजमोहन गांधी अपनी पुस्तक में लिखते हैं कि बाद में अपनी मां कस्तूरबा गांधी के अनुरोध पर उन्होंने आर्य समाज के माध्यम से हिंदू धर्म में परिवर्तित होकर एक नया नाम हिरलाल अपनाया.   

गांधी जी द्वारा लिखे पत्रों को देखने से पता चलता है कि इन्हीं दिनों गांधी के एक घनिष्ठ मित्र  सी.एफ़. एन्ड्रयूज भी इस इन्फ्लूएन्जा के शिकार हो गए थे. चार्ल्स फ्रेयर एण्‍ड्रयूज (1871-1940) हावर्ड से पढ़े हुए एक लेखक व शिक्षाशास्त्री थे, जिन्होंने विश्व भारती विश्वविद्यालय के कार्य में बहुत दिलचस्पी ली. कई वर्षों तक भारतीयों के साथ काम किया जिससे उन्हें ‘दीनबन्धु’ की उपाधि मिली थी.

अहमद मुहम्मद काछलिया भी दम तोड़ गए

दक्षिण अफ़्रीक़ा में ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन, ट्रांसवाल के अध्यक्ष अहमद मुहम्मद काछलिया इसी विश्वमारी के दौरान 20 अक्टूबर, 1918 को इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए. गांधी को इसकी ख़बर उसी दिन मिल गई. उन्होंने इस संबंध में एक प्रेस रिलीज़ भी तमाम अख़बारों को जारी किया.

इस प्रेस रिलीज़ में गांधी लिखते हैं, दक्षिण अफ़्रीक़ा के भारतीयों में उनके जैसी प्रतिष्ठा किसी दूसरे भारतीय की नहीं थी. श्री काछलिया ने 31 जुलाई, 1907 के दिन प्रिटोरिया की पाक मस्जिद के एक पेड़ की छाया में खड़े होकर जनरल बोथा और उनकी सरकार की शक्ति की खुली अवज्ञा की थी. मस्जिद के उस अहाते में होने वाली जन-सभा के नाम जनरल का एक संदेश ट्रान्सवाल विधान सभा के सदस्य विलियम हॉस्केन लाए थे. सन्देश था कि भारतीय लोग ट्रान्सवाल सरकार का मुक़ाबला करके दीवार से अपना सिर मार रहे हैं. लेकिन इसके बाद काछलिया ने जो बोला वो आज भी मेरे कानों में गुंज रहा है.

उन्होंने कहा था —‘मैं अल्लाह को हाज़िर-नाज़िर मानकर कहना चाहता हूं कि मैं एशियाई पंजीयन अधिनियम का पालन नहीं करूंगा, चाहे मेरा सिर धड़ से अलग कर दिया जाए. एक ऐसे क़ानून का पालन करना मैं नामर्दी और अपमानजनक मानता हूं जो मुझे एक तरह से ग़ुलाम बना देता है.’

बता दें कि रंगभेद के ख़िलाफ़ दक्षिण अफ़्रीक़ा में गांधी जी के आन्दोलन में सेठ अहमद काछलिया ने ही सबसे अधिक साथ दिया था. दो बार जेल गए. अपनी दूसरी गिरफ़्तारी में तीन महीने की कड़ी सज़ा काटी. इनकी इस गिरफ़्तारी से पूरा नेटाल जाग उठा. गांधी ने इन्हें हमेशा इतिहास के नायक के रूप में याद किया है. आप रहने वाले सूरत के थे. 

गांधी ने जामिया में एक बार अपनी तक़रीर में भी उनके बारे में बताया था, उन्होंने कहा था —सत्याग्रह के दिनों में दक्षिण अफ्रीक़ा में जो हिन्दू और मुसलमान रहते थे, उनमें से एक भी भारतीय ऐसा नहीं था जो बहादुरी और ईमानदारी के मामले में काछलिया की बराबरी कर सके. उन्होंने अपने देश के सम्मान और प्रतिष्ठा की ख़ातिर अपना सब-कुछ बलिदान कर दिया. उन्होंने न अपने व्यापार की चिन्ता की और न अपनी सम्पदा की और न मित्रों की ही, और तन-मन से वे संघर्ष में कूद पड़े. उन दिनों में भी हिन्दू-मुस्लिम तकरारें जब-तब होती थीं, लेकिन काछलिया ने दोनों को तुला पर समान रूप से रखा. किसी ने उन पर अपने सम्प्रदाय के साथ पक्षपात करने का आरोप नहीं लगाया.

गांधी आगे बताते हैं, और उन्होंने देशभक्ति और सहिष्णुता का यह महान गुण किसी स्कूल में या इंग्लैंड में नहीं, बल्कि अपने ही घर में सीखा था, क्योंकि वे तो गुजराती भी कठिनाई से लिख पाते थे. वकीलों के तर्कों का वे जिस प्रकार उत्तर देते थे उसे देखकर आश्चर्य होता था, और उनकी सामान्य विवेक-बुद्धि अक्सर वकीलों के लिए बड़ी काम की होती थी. उन्होंने ही सत्याग्रहियों का नेतृत्व किया, और काम करते हुए ही शरीर त्याग किया. उनके अली नामक एक बेटा था, जिसे उन्होंने मेरी देख-रेख में सौंप दिया था. ग्यारह वर्षीय यह बालक अद्भुत संयत और निष्ठावान मुसलमान था. रमज़ान के पवित्र महीने में वह एक दिन का भी रोज़ा नहीं छोड़ता था. और फिर भी उसके मन में हिन्दू लड़कों के लिए कोई दुर्भाव नहीं था. आज तो दोनों समुदाय के लोगों की तथाकथित धार्मिक निष्ठावादिता अन्य धर्मों के प्रति यदि घृणा नहीं तो कम से कम दुर्भाव का पर्याय बन गई है. अली के मन में ऐसा कोई दुर्भाव नहीं था, कोई घृणा नहीं थी. मेरे लिए पिता और पुत्र, दोनों आदर्श व्यक्ति हैं, और ईश्वर करे कि आप उनके उदाहरण से अनुप्रेरित हों…

गांधी जी ने कई मौक़ों पर अहमद मुहम्मद काछलिया को अपने सगे भाई के समान बताया है.

Related Story:

क्या महात्मा गांधी भी हुए थे महामारी के शिकार?

TAGGED:1918 PandemicEditor's PickGandhi and 1918 pandemicअहमद मुहम्मद काछलियाक्या महात्मा गांधी भी हुए थे महामारी के शिकार?गांधी की बड़ी बहू गुलाब गांधी की गई जान
Share This Article
Facebook Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Telangana Must Order CBI Inquiry into Alleged Murder of Advocate Moizuddin in Waqf Cases
India Waqf Facts
Waqf Registration Ends With Fears of Vanishing Properties
Exclusive India Waqf Facts
The Waqf Act 2025, Supreme Court Interim Ruling, and the Role of Muslims in Protecting Waqf Properties
Waqf Facts
Supreme Court Verdict on the Waqf Act: Justice or Just Temporary Consolation?
India Waqf Facts Young Indian

You Might Also Like

ExclusiveIndiaYoung Indian

From Classrooms to Suspicion: Why Bihar’s Muslim Children Face Fear on the Road to Education

July 13, 2026
ExclusiveIndia

Eid al-Adha in India: Around 50 Incidents Reported Amid Security Measures, Restrictions, and Rising Tensions

July 1, 2026
ExclusiveIndiaLead

Bulldozed Dreams: How Assam’s Eviction Drives Are Leaving Thousands Homeless and a Generation Without Education

June 16, 2026
ExclusiveIndiaLead

What Happened After Assam Converted Madrasas into Schools? A Ground Report on Education, Identity, and Community Impact

June 4, 2026
Copyright © 2025
  • Campaign
  • Entertainment
  • Events
  • Literature
  • Mango Man
  • Privacy Policy
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?