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Reading: गोडसे अगर राष्ट्रभक्त है तो गांधी जी क्या हैं ?
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BeyondHeadlines > India > गोडसे अगर राष्ट्रभक्त है तो गांधी जी क्या हैं ?
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गोडसे अगर राष्ट्रभक्त है तो गांधी जी क्या हैं ?

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published January 10, 2015 19 Views
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5 Min Read
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BeyondHeadlines News Desk

सिधौली/सीतापुर : गुजरात में सरदार पटेल की विशाल लौह प्रतिमा लगाने और पटेल जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस घोषित करने वाली मौजूदा केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा जाना ज़रूरी है कि गांधी हत्या के मामले में उसका क्या नज़रिया है ? गोडसे अगर राष्ट्रभक्त है तो गांधी जी क्या हैं ? गांधी जी की हत्या में लगे लोग कौन थे ? किन संगठनों से जुडे़ थे, और किस ज़हरीली विचारधारा से पनपे थे.

यह बात शनिवार को तहसील सिधौली में शहीद स्मारक स्थल पर आयोजित विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कही.

सोशलिस्ट पार्टी इण्डिया, नफरत एवं हिंसा के खिलाफ मानवीय एकता, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी और अखिल भारतीय प्रबुद्ध मंच के संयुक्त प्रयास से आयोजित गोष्ठी बापू हम शर्मिंदा हैं, आपके कातिल जिन्दा हैं… गोष्ठी को जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के राष्ट्रीय नेता अशोक ने सम्बोधित करते हुए कहा गांधी जी की हत्या आजादी के केवल साढ़े पांच महीने के बाद 30 जनवरी 1948 को कर दी गई. लेकिन इसके पहले गांधी जी की हत्या की पांच और कोशिशें हो चुकी थीं. आजादी के पहले चार बार और आजादी के बाद दो बार.

गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे सहित अन्य साजिशकर्ता इन कोशिशो में लम्बे समय से लगे थे. 4 फरवरी 1948 को सरदार पटेल ने अपने मन की बात लिखकर स्पष्ट की थी –राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की करतूतों से व्यक्तिगत हत्या आर हिंसा का वातावारण निर्माण हुआ और उसी के कारण गांधी जी की हत्या हुई. गांधी के हत्यारे गोडसे को राष्ट्रभक्त बताने और उसके स्मारक मन्दिर बनाने के ज़रिये ज़हरीली राष्ट्रविरोधी धारा ने अपने छद्म को उतार फेंका है और अपने असली राष्ट्र विरोधी-मानवता विरोधी चेहरे को बेनकाब किया है.

गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए सोशलिस्ट पार्टी इण्डिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ0 सन्दीप पाण्डेय ने कहा कि देश में विभाजनकारी शक्तियों के हौसले बेहद बुलन्द है, लेकिन इन फासिस्टवादी शक्तियों के हौसले चूर-चूर किए जाएंगे.

उन्होंने आगे कहा कि डालर पर जार्ज वाशिंगटन की तस्वीर और भारत के नोट पर गांधी की तस्वीर नहीं होगी तो किसकी होगी? मोदी की होगी या गोडसे की? अगर नोट से गांधी की तस्वीर हट गई तो देश में भ्रष्टाचार बढ़ जाएगा. देश के भ्रष्टाचार पर गांधी की नज़र है.

शिक्षाविद् बाबूराम पाण्डेय ने कहा कि महात्मा गांधी मर कर भी नहीं मरे. गोडसे मारने के साथ ही मर गये. लेकिन जब तक दुनिया रहेगी गांधी जिन्दा रहेंगे. गोडसे के मन्दिर बनाने की घोषणा करने वाले लोग किसी लायक नहीं रह जाएंगे. हमारे देश में हिन्दुत्वादी उन्माद को उभारने की कोशिशें हो रही हैं, जो प्राचीन काल से चली आ रही भारतीय मान्यताओं और गांधी के विचारों से अनुप्राणित राष्ट्रीय आंदोलन की धर्म बहुलतावादी परम्परा के सामने बड़ी चुनौती है.

साहित्यकार डा0 रिज़वान अंसारी ने कहा कि हमारा मुल्क सदियों से यकजहती, मेल- मोहब्बत में यकीन रखने वाला देश है. यहां किसी हिन्दू बन्दे ने अपने बेटे का नाम नाथूराम के नाम पर रखने की कोशिश नहीं की और कोई मुसलमान अपने बेटे का नाम यजीद नहीं रखता. गोडसे ने इंसानियत पर वार किया था, हिन्दुस्तान के गरीबों के हक़ पर हमला किया था. उसका मन्दिर बनाने का मतलब जालिम का मन्दिर बनाना है.

उन्नाव से आये नसीर अहमद ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा गांधी केवल राष्ट्र पिता नहीं, विचार धारा है. गांधी पूरे विश्व की हस्ती हैं. उनके हत्यारे का मन्दिर बनाना कितना शर्मनाक है. अच्छाई को जिन्दा रखने के लिये खून में गर्मी आनी चाहिये. सत्य के लिये आवाज़ उठाई जानी चाहिए.

गोष्ठी को राजवीर सिंह यादव, रिहाई मंच के राजीव यादव, रोहित सिंह, मुन्नालाल आदि ने संबोधित किया. संचालन अनुराग आग्नेय ने किया.

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