Health

एक कैंसर पीड़ित पत्रकार आपके सुझाव के इंतज़ार में…

Debashish Bose for BeyondHeadlines

मित्रों!

संघर्ष ही मेरा जीवन रहा है. जातिवादी और सामंती मानसिकता वाले लोग समय-समय पर किस्‍सा गढ़ कर मुझे परेशान करने की चेष्‍टा करते रहे हैं. लेकिन उन वारदातों की सूचना लेने के बजाय मैं अपने जीवन पथ पर अग्रसर होता रहा हूं.

फिलहाल परिवार का सारा बोझ मेरे कंधे पर है और मैं दिसम्‍बर 2012 से कैंसर से पीडित हूं. दांया लंस के नीचे एक टयूमर है, जो मिलिगनेन्‍ट ‘कार्सिनोमा’ है. मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्‍पीटल से ईलाज करवा रहा हूं. समय, उर्जा, धन की बर्वादी और परेशानी तथा दौड़-धूप के बाद टाटा ने मुझे ‘एक्‍ट्रोटायड’ इंजेक्‍शन प्रत्‍येक माह दिया जाने लगा. यह इंजेक्‍शन पहले 35,000 रूपये, फिर 25,000 और अब लगभग 10,000 रूपये में मिलता है.

इसके अलावा टाटा हॉस्‍पीटल मुझे भाभा अनुसंधान केन्‍द्र के रेडियेशन मेडिकल सेन्‍टर में भेज दिया. जहां रेडियेशन थेरॉपी के द्वारा मुझे एमआईबीजी दिया गया. अब तक तीन एमआईबीजी हो चुका है. लेकिन चिकित्‍सक स्‍कैन रिपोर्ट देखकर कह रहे हैं कि टयूमर की स्थिति जस की तस है. रेडियेशन और इंजेक्‍शन प्रभावकारी नहीं हो रहा है. रेडियेशन के चिकित्‍सक सर्जरी पर बल दे रहे हैं.

मेडिकल आंकोलोजिस्‍ट चिकित्‍सक ने आंकोलोजिस्‍ट सर्जन के पास भेजा. वहां मेरा पीएफटी और डीएलसीओ टेस्‍ट हुआ. सर्जन का कहना है कि लंस काफी कमजोर है. इसलिए ऑपरेशन करना खतरनाक होगा और वे ऑपरेशन से इंकार कर रहे हैं.

अब मेरे लिए रेडियेशन, दवा और ऑपरेशन तीनों रास्‍ता बंद है. ऐसी स्थिति में मेरे पास कोई बिकल्‍प नज़र नहीं आ रहा है. आप अगर इस संबंध में जानकार हों तो मुझे तुरंत बतावें. उस विकल्‍प को अपनाया जा सकता है.

आप मित्रों के जवाब के इंतजार में हूं…

-देवाशीष बोस, मोबाईल -09431254951, email- [email protected]

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