India

ISIS व मोदी के इज़्राईल दौरे के ख़िलाफ़ भारतीय मुसलमानों का विरोध प्रदर्शन

Farha Fatima for BeyondHeadlines

‘भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. यहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है. ISIS भारत की तरफ़ कभी आंख उठाकर भी न देखें.’

ये बातें आज शुक्रवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर भारतीय मुसलमानों द्वारा आयोजित आतंकवाद के खिलाफ़ विरोध-प्रदर्शन में कहा गया. इस विरोध प्रदर्शन में मुसलमानों के दोनों गुट शिया-सुन्नी एक आवाज़ में आतंकवाद के खिलाफ़ थे.

विरोध कर रहे मुसलमानों ने पिछले साल पाकिस्तान में स्कूली बच्चों पर हमले पर बोलते हुए कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है. ये आतंकवाद सिर्फ इंसानियत के खिलाफ़ है.

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने ISIS, इज्राइल व अमेरिका के खिलाफ़ और फिलिस्तीनीयों के हक़ में जमकर नारे लगाए. आतंकवादी गुटों को खुली चेतावनी भी दी.

इस विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी विरोध किया गया. वक्ताओं का कहना था कि भारत की पॉलिसी हमेशा से शांती, न्याय और फिलिस्तीनीयों के सपोर्ट में रही है. उसे अब भी बरक़रार रखा जाना चाहिए. भारत सरकार गाज़ा में इस्राइली हमलों से तबाह फिलिस्तीनियों की मदद करे. इससे पहले कि यूनाइटेड नेशन इस मुद्दे को ख़त्म करे, भारत सरकार को इस मुद्दे को उठाना चाहिए.

जमियत-ए-उलेमा के जनरल सेक्रेट्री जावेद कासमी ने कहा कि अब मसला शिया सुन्नी का नहीं है. मसला इस्लाम की छवी बिगाड़ते आतंकवाद से निपटने का है. इस समय अगर हम एकजूट न हुए तो पूरी दुनिया में इस्लाम को बड़ी मुश्किलात का सामना करना पड़ेगा.

पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि भारत की तब्दील होती विदेश पॉलिसी बेहद अफ़सोसनाक है. बड़े अफ़सोस की बात की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इज्राईल का सफ़र करने वाले हैं, जो कि एक ज़ालिम हुकूमत के हिमायत की बराबर है. मोदी के इस दौरे का हम सख़्त विरोध करते हैं. आगे उन्होंने बताया कि 1950 में ही भारत ने फिलिस्तीन को बराबरी का दर्जा देकर यूनाइटेड नेशन का हिस्सा माना था.

गौरतलब है कि रमज़ान के आखिरी शुक्रवार को यह विरोध प्रदर्शन 1980 से होता आ रहा है. यह दिन मौलाना इमाम खुमैनी ने फिलिस्तीनीयों की आज़ादी के लिए उनकी हिमायत में मुक़र्रर किया था. इसे इंटरनेशनल लेबल पर हर साल मनाया जाता है. अब इस विरोध-प्रदर्शन ने सीधा आतंकवाद के खिलाफ़ आवाज़ उठाने का रूख कर लिया है. इस दिन को यौम-ए-कुद्स (कुद्स इंटरनेशनल डे) भी कहा जाता है.

कुद्स इबादत की जगह है. क़ाबा बनने से पहले जिसकी तरफ़ रूख करके नमाज पढ़ी जाती थी वो कुद्स है. आज वह इस्राइल के कब्जे में है.

इस धरना प्रदर्शन के आखिर में एक मेमोरेंडम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पार्लियामेंट हाउस स्थित कार्यालय में मौलाना बाक़र ज़ैदी और मौलाना अमीर हसनैन ने सौंपा.

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