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रविश कुमार होंगे ‘प्रथम पीर मुहम्मद मूनिस पत्रकारिता अवार्ड’ से सम्मानित

BeyondHeadlines News Desk

पटना : पत्रकार पीर मुहम्मद मूनिस के नाम पर शुरू किए गए पहले पत्रकारिता अवार्ड से एनडीटीवी के सीनियर एक्जीक्यूटिव एडिटर रविश कुमार को सम्मानित करने का फैसला आज पटना में हिकमत फाउंडेशन के निर्णायक मंडल ने लिया है.

हिकमत फाउंडेशन की ओर से शुरू किए किए इस अवार्ड के निर्णायक मंडल के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत ने इस सम्मानित अवार्ड के लिए रविश कुमार के नाम का ऐलान करते हुए बताया है कि रविश कुमार ने मौजूदा पत्रकारिता को अपनी स्वतंत्र विचारधारा और शानदार शैली से एक नया आयाम दिया है.

श्रीकांत जी बताते हैं कि –‘रविश कुमार ने अपनी पत्रकारिता से चम्पारण का गौरव काफी बढ़ाया है. ऐसे में उनको सम्मानित करने से इस पुरस्कार का उद्देश्य सार्थक होगा.’

हिकमत फाउंडेशन के अध्यक्ष सैय्यद गुलरेज़ होदा (सेवानिवृत आईएएस) ने भी निर्णायक मंडल के इस निर्णय का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इससे चम्पारण के लोगों का उत्साहवर्धन होगा.

यह पुरस्कार आगामी 17 अप्रैल, 2016 दिन रविवार को बेतिया के एम.जे.के. कॉलेज में हिकमत फाउंडेशन की ओर से आयोजित होने वाले द्वितीय पीर मुहम्मद मूनिस स्मृति व्याख्यान सह सम्मान समारोह के अवसर पर प्रदान किया जाएगा.

इस समारोह में वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा सांसद हरिवंश और वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत भी शामिल होंगे.

यहां हम बताते चलें कि पीर मुहम्मद मुनिस हिन्दी के अनन्य सेवक थे. हिन्दी भाषा के मौन साधक थे. बिहार में हिन्दी पत्रकारिता के जनक थे. उन्होंने हमेशा अपने लेखनी व व्याहारिक जीवन के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल दिया. उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग से उन मौलवियों व पंडितों पर भी वार किया, जिन्होंने दंगे-फ़साद में हमारी एकता को भंग करने का काम किया. इस प्रकार वो सिर्फ़ क़लम के सिपाही नहीं, बल्कि क़लम के सत्याग्रही थे. क्योंकि उन्होंने चम्पारण के पीड़ा और संघर्ष के बारे में सिर्फ लिखा ही नहीं, बल्कि उस लड़ाई में शामिल भी थे. पीर मुहम्मद मुनिस ही वो शख्स थे जो चम्पारण के क्षितीज से उठकर पत्रकारिता व लेखन में एक शिखर स्थान प्राप्त किया.

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