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पढ़िए यहां मोदी के गुजरात का एक सच…

Afroz Alam Sahil for BeyondHeadlines

भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के युग-पुरूष होने का दावा करने वाले नरेन्द्र मोदी की हक़ीक़त बेहद ही हैरान करने वाली है. गुजरात में लोकायुक्त के गठन को रोकने की खातिर एड़ी-चोटी लगा देने वाले मोदी ने एक बार फिर से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी आंख मूंद लेने वाली दकियानूस मानसिकता का परिचय दिया है.

मोदी के गुजरात में रोडवेज़ महकमे में मचे भारी-भरकम गड़बड़-झाले और भ्रष्टाचार की मांग को लेकर एक शख्स गुज़िश्ता दो सालों से गुजरात के मुख्यमंत्री से मिलने की बाट जोह रहा है. मगर चुनाव के दौरान देश में जगह-जगह 56 इंच की कथित छाती लेकर भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने का गुब्बारा फूलाने वाले मोदी के पास उससे मिलने का वक़्त नहीं है.

6 करोड़ गुजरातियों के नाम की दुहाई देने वाले मोदी से मिलने को तरस रहा यह शख्स गुजराती ही है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बैठे इस शख्स के पास मोदी के गुजरात में एक सरकारी महकमें में मची लूट के तमाम दस्तावेज़ हैं, मगर अपनी जी-तोड़ कोशिश के बावजूद वो मोदी से मिल सकने में कामयाब नहीं हो सका है.

दरअसल कहानी यह है कि गुजरात रोडवेज़ का एक ड्राइवर विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की मांग की तो उसे पागल क़रार देकर नौकरी से निकाल दिया गया. तब से यानी 07 मई 2012 से जवाहर लाल बंसीलाल महाजन दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठकर रोडवेज के सूरत डिपो में व्याप्त भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. अपनी इस मांग को लेकर महाजन ने देश की तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटील से मुलाकात भी की. प्रतिभा पाटील ने महाजन को मामले की सीबीआई जांच का भरोसा दिलाया, लेकिन अभी तक मामले में कोई भी जांच आगे नहीं बढ़ी है.

महाजन न्याय पाने के लिए हर चौखट पर दस्तक दे चुके हैं. उन्होंने गुजरात सरकार के तमाम महकमों समेत केंद्र सरकार के भी संबंधित महकमों में न्याय की गुहार लगाई है. केंद्रीय सड़क एव परिवहन मंत्रालय सचिवालय ने 25 जुलाई, 2012 को गुजरात के यातायात सचिव को लिखे अपने पत्र में कहा है कि महाजन के निलंबन का क़दम बेहद कठोर है और इस पर पुनर्निचार किया जाना चाहिए. राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से भी गुजरात सरकार और केंद्र सरकार के संबंधित महकमों को पत्र लिखकर रिपोर्ट तलब की गई, लेकिन अभी तक कहीं से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला.

बंसीलाल गुजरात के राज्यपाल से भी मिलकर अपने तमाम बातों को सामने रख चुके हैं, पर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा. हालांकि बंसीलाल बताते हैं कि गुजरात के राज्यपाल कार्यालय परिवहन विभाग से इस मामले में कई बार तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग चुकी है, लेकिन विभाग ने उन्हें कोई रिपोर्ट पेश नहीं किया.

न्याय की हर चौखट से निराश बंसीलाल फिलहाल जंतर-मंतर पर धरने पर डटे हैं. इस बीच इस गुजराती आन्दोलनकारी की चिट्ठियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री आदि कई महत्वपूर्ण दफ्तरों से होते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के पास पहुंची. उन्होंने 100 से अधिक नरेन्द्र मोदी को लिखा है, पर मोदी के पास मिलने का वक़्त नहीं था. क्योंकि बंसीलाल गुजरात के सूरत डिपो में सीएनजी घोटाले, टिकट मशीन खरीद घोटाले, स्पेयर पार्ट्स खरीद घोटाला और अन्य घोटालों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं.

यूं तो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा है कि वो राज्य के किसी भी नागरिक से मात्र एक फोन कॉल दूर हैं और कोई भी नागरिक उनसे मिल सकता है. लेकिन मोदी के यह वादे शायद बंसीलाल महाजन के लिए नहीं है.

बंसीलाल जब भी मोदी के दफ्तर फोन करते हैं उनकी आवाज़ सुनते ही फोन काट दिया जाता है. यही हाल अब राष्ट्रपति सचिवालय का भी है. अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी के लिए वो राष्ट्रपति कार्यालय फोन करते हैं तो वहां से भी उन्हें आश्वासन ही दिया जाता है.

जंतर-मंतर पर डटे बंसीलाल को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुरु में प्रलोभन दिया. उन्हें प्रोमोशन और मोटी रक़म का लालच भी दिया गया, लेकिन जब वो किसी मूल्य में नहीं बिके तो उन्हें मानसिक रूप से बीमार क़रार देकर नौकरी से निकाल दिया गया.

बंसीलाल देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और गुजरात की राज्यपाल से मिलकर भी गुहार लगा चुके हैं. लेकिन गुजरात रोडवेज में हुए घोटाले की सीबीआई जांच तब तक नहीं हो सकती जब तक राज्य सरकार इसकी अनुमति न दे. दिल्ली में तो बंसीलाल अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, लेकिन गुजरात सरकार में उनकी सुनने वाला कोई नहीं है.

ये अलग बात है कि प्रदेश के तमाम बड़े अख़बारों के फ्रंट पेज़ पर भी बंसीलाल की बात प्रकाशित हो चुकी है. भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ते हुए मानसिक शोषण झेल रहे हजारों लोगों में से बंसीलाल एक हो सकते हैं, लेकिन उनका मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है.

सबसे पहला सवाल यही है कि जब भी विभाग के अंदर का कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार और शोषण के खिलाफ़ आवाज़ उठाता है तब उसे पागल क़रार देकर नौकरी से क्यों निकाल दिया जाता है? बंसीलाल के साथ जो हो रहा है वो दुखद है लेकिन उससे भी ज्यादा दुखद है आम जनता की खामोशी… लोग बस में बैठकर सफ़र तो आराम से करते हैं, लेकिन उन्हें बस की सेहत की फिक्र नहीं है और अब जब रोडवेज का ही एक कर्मचारी बस की सेहत सुधारने की कोशिश कर रहा है तब वो उसके साथ नहीं हैं.

बंसीलाल ने 2 सालों के बाद अपने परिवार के कई लोगों को खो देने के बाद भी इंसाफ की उम्मीद को नहीं खोया है. इस गुजराती शख्स को अभी भी उम्मीद है कि मोदी एक न एक दिन ज़रूर पसीसेंजे, गुजरात के रोडवेज़ में मचे भ्रष्टाचार की जांच होगी, उसकी मेहनत रंग लाएगी.

हक़ीक़त बेहद ही तल्ख है, बहुत ही कड़वी है, क्योंकि मोदी को अपनी आंखों के सामने केवल प्रधानमंत्री की कुर्सी दिख रही है, उन्हें साबिर अली, जगदम्बिका पाल और राम विलास पासवान जैसे दाग़ी व दलबदलू नेताओं से मिलने की फुर्सत है, लेकिन ईमान व सच्चाई के लिए लड़ रहे अपने ही राज्य के एक गुजराती के लिए मोदी की महत्वकांक्षाओं में रत्ती भर भी जगह नहीं है. और इन सबके बीच बंसीलाल की यह कहानी मोदी के गुजरात में फैले भ्रष्टाचार का सच दिखाने के लिए काफी है.

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