Waqf Facts

पटना के डाकबंगला चौराहा से फ्रेजर रोड तक बने तमाम मॉल और टाईम्स आॅफ़ इंडिया की बिल्डिंग हैं वक़्फ़ की सम्पत्ति

BeyondHeadlines News Desk

पटना: बिहार में वक़्फ़ को लेकर एक ऐतिहासिक फ़ैसला आया है. पूरे 90 साल बाद झारखंड के हज़ारीबाग सिविल कोर्ट ने पटना के डाकबंगला चौराहा से फ्रेजर रोड तक स्थित हसन इमाम वक़्फ़ स्टेट की ज़मीन पर बनी इमारतों का फैसला शिया वक़्फ़ बोर्ड के पक्ष में दिया है.

टाइटल सूट के इस फ़ैसले के बाद वक़्फ़ स्टेट की ज़मीन पर बने सेन्ट्रल मॉल, विशाल मेगा मार्ट, कौशल्या एस्टेट, वन मॉल, एक अंग्रेज़ी अख़बार टाईम्स आॅफ़ इंडिया की बिल्डिंग, फ़ज़ल इमाम कॉम्प्लेक्स, एसपी वर्मा रोड पर बने साकेत टावर के अलावा बंदर बगीचा में 5 बीघा ज़मीन का मालिकाना हक़ शिया वक्फ बोर्ड का हो गया है.

इसके अलावा डाक बंगला चौराहा के पास 122 कट्‌ठा ज़मीन पर बने रिज़वान पैलेस का मालिकाना हक़ भी बोर्ड को मिल गया है. अभी यहां बिहार पुलिस का नाजायज़ है. इन्होंने सालों से अपना पुलिस कैंप बना रखा है. फिलहाल इस भवन की देख-रेख का ज़िम्मा ज़िला प्रशासन के पास है.

यही नहीं, इसके अलावा नेउरा में 106 बीघा ज़मीन का फ़ैसला भी बोर्ड के पक्ष में आया है.

शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन इरशाद अली आज़ाद ने हज भवन में बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि जिन संपत्तियों पर बोर्ड को मालिकाना हक़ मिला है, उसकी वैल्यू इन दिनों क़रीब 2500 करोड़ है.

इरशाद अली के मुताबिक़, माननीय उच्च न्यायालय पटना, बिहार वक्फ़ ट्रिब्युनल एवं अन्य न्यायालयों में चल रहे 345 मामलों में से बोर्ड ने पिछले तीन सालों में 40 केस जीता है. वहीं वक़्फ़ सम्पत्ति की अवैध ख़रीद/बिक्री एवं अतिक्रमण पर पैनी नज़र रखते हुए इस संबंध में अभी तक 174 प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. वहीं बिहार वक़्फ़ ट्रिब्युनल में शिया वक़्फ़ बोर्ड के 55 मामले लम्बित हैं.

बता दें कि हसन इमाम वक़्फ़ स्टेट की अत्यधिक बहुमूल्य जायदाद, जो बिहार राज्य शिया वक़्फ़ बोर्ड में वर्ष 1948 में पंजीकृत कराया गया था, जिसका पंजीयन सं.-32 है. इस वक्फ़ स्टेट की बहुमूल्य ज़मीन डाकबंगला चैराहा, फ्रेज़र रोड, जमाल रोड, एस.पी. वर्मा रोड, बंदर बगीचा इत्यादि में अवस्थित है, जिसमें ऊंची-ऊंची इमारतें, जो रिज़वान पैलेस, वन मॉल, कौशल्या स्टेट, सेंट्रल मॉल, विशाल मेगा मार्ट, टाईम्स आॅफ़ इण्डिया इत्यादि के नाम से प्रसिद्ध हैं. अधिकतर ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा है.

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