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महाराष्ट्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ अमेरिका में भूख हड़ताल पर बैठी ज्योति

Afroz Alam Sahil for BeyondHeadlines

वाशिंग्टन: भारतीय मूल ज्योति को अमेरिका में भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा है. ज्योति 26 जनवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर सड़क पर बैठी हैं. भूख हड़ताल पर बैठने से पहले ज्योति ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन न्याय की हर चौखट से उन्हें निराशा ही हाथ लगी. हद तो तब हो गई जब भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने ही उन्हें झूठे आरोप में अमेरिका में फंसवा दिया. हालांकि बाद में विदेश मंत्रालय ने उनसे माफी भी मांगी, लेकिन माफीनामे का पत्र भी उन्हें अब तक नहीं मिल सका.

ज्योति घाघ एक पूर्व विश्व युद्ध सैनिक और मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी की बेटी हैं. भूख हड़ताल पर बैठने से पहले ज्योति ने भारत के राष्ट्रपति, भारत के चीफ जस्टिस, भारत के प्रधानमंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के चीफ जस्टिस, विदेश सचिव एव ओवरसीज मामलों के मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी भूख हड़ताल से अवगत भी कराया है. हालांकि ज्योति को कहीं से भी पत्र का जबाव नहीं मिला.

न्याय की हर चौखट से निराश होने के बाद ज्योति अब बेहद कठिन परिस्थितियों में भूख हड़ताल पर बैठी हैं. ज्योति वाशिंग्टन के सैमामिश इलाके के 187 अवेन्यू एनई, रेडमंड वे पर भूख हड़ताल पर बैठी हैं. यहां भीषण सर्दी पड़ रही है.

ज्योति की मांग है कि उनके पिता के हत्यारों को सजा दी जाए और उनके निर्दोष एवं मानसिक रूप से विकलांग भाइयों को बेहतर जीवन दिया जाए.

ज्योति ने भूख हड़ताल पर बैठने से पहले अमेरिका से भारत आकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. लेकिन व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण उन्हें कहीं से भी न्याय नहीं मिल सका. पिछली बार 2009 में जब उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी थी तब भारतीय दूतावास ने उनके खिलाफ अमेरिका में मामला दर्ज करवा दिया था जो अब तक चल रहा है.

ज्योति गणतंत्र दिवस पर भूख हड़ताल पर इसलिए बैठी हैं ताकि वह अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर सके. ज्योति का आरोप है कि भारत और अमेरिका में उनके संवैधानिक अधिकारों के हनन किया गया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

ज्योति को गलत मामले में फंसाने के लिए विदेश मंत्रालय ने उनसे माफी भी मांगी थी लेकिन माफीनामे के पत्र को महाराष्ट्र के मुख्य न्यायाधीश ने अपने पास रख लिया है. ज्योति की मांग है कि इस पत्र को रिलीज किया जाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके.

ज्योति ने अपने पूरे संघर्ष का हवाला देते हुए एक किताब भी लिखी है जिसमें उन्होंने सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार का विस्तार से जिक्र किया है. ज्योति ने अपने सगे बहनोई के खिलाफ (जो अब एक रिटार्यड पुलिस अधिकारी हैं, महाराष्ट्र पुलिस में कई वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं.) भी सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. इस किताब के मुताबिक ज्योति के जीजा ने उनके बैंक अकाउंट के जरिए अपनी काली कमाई को सफेद किया. ज्योति ने अपने बहनोई पर बचपन में शारिरिक शोषण करने का भी आरोप लगाया है.

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