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क्या सभी आंदोलनों पर भारी पड़ेगा 22 साल का हार्दिक

BeyondHeadlines News Desk

देश मे एक बार फिर आरक्षण आंदोलन का मुद्दा जोर पकड़ रहा है. गुजरात में पटेल समुदाय को ओबीसी कोटे के अंदर आरक्षण की मांग कर रहा है.  कभी जाट तो कभी गुर्जर आरक्षण की मांग को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं. खास बात यह है कि इस आंदोलन की अगुआई 22 साल के हार्दिक पटेल कर रहे हैंय हार्दिक ने चेतावनी दी है कि यदि आरक्षण नहीं मिला तो हमारा आंदोलन केजरीवाल से भी बड़ा होगा.

बता दें कि यह आंदोलन कोई पहला आंदोलन नहीं है. गुजरात में इससे पहले भी दो बड़े आंदोलन हो चुके हैं. आंदोलन इतने प्रभावशाली थे कि गुजरात राज्य को दो मुख्यमंत्रियों को अपनी कुर्सी तक गवांनी पड़ गई थी. पहला आंदोलन 1975 में ‘नवनिर्माण आंदोलन’ हुआ. इसके बाद 1981 में ‘अनामत (आरक्षण) विरोधी आंदोलन’ जो 1985 तक चला. नवनिर्माण आंदालन में तत्कालीन सीएम चिमनभाई पटेल तो अनामत विरोधी आंदोलन में तत्कालीन सीएम माधवसिंह सोलंकी को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी.

संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को शिक्षा संस्थाओं और नौकरियों में आरक्षण की मांग की थी. शिक्षा संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में 49.5 फीसदी आरक्षण है. सरकारी सेवा में प्रोन्नति में भी आरक्षण की व्यवस्था की गई है. जबकि सरकान ने उच्च शिक्षा में 27 फीसदी आरक्षण दे रखा है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50 फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता, लेकिन राजस्थान जैसे कुछ राज्यों ने 68 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव रखा है. इसमें अगड़ी जातियों के लिए 14 फीसदी आरक्षण भी शामिल है. लेकिन राज्य सरकारों ने कानून को ताख पर रखकर 50 फीसदी की सीमा को पार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट में इन पर मुकदमे चल रहे हैं. जाति-आधारित आरक्षण भाग 69 फीसदी है और तमिलनाडु की करीब 87 फीसदी जनसंख्या पर यह लागू होता है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए जाट समुदाय को दिए गए आरक्षण को रद्द कर दिया यूपीए सरकार ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर जाटों को आरक्षण देने का फैसला किया था.

22 साल के हार्दिक पटेल अहमदाबाद में सहजानंद कॉलेज से कॉमर्स ग्रेजुएट हैं. इस आंदोलन को लेकर हार्दिक पटेल ने सूरत में रैली करने की घोषणा की थी. जिसकी राज्य सरकार ने अनुमति नहीं दी. बाद में इजाजत मिलने पर कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच रैली का आयोजन किया गया. रैली में हार्दिक ने कहा कि हमें हमारा हक दो, नहीं तो हमें छीनना आता है.

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