Literature

हे मेरे देश के मुसलमानों!

A Muslim takes part in a special morning prayer to start Eid-al-Fitr festival, marking the end of their holy fasting month of Ramadan, at a mosque in Silver Spring, Maryland, on August 19, 2012. Muslims in the US joined millions of others around the world to celebrate Eid-al-Fitr to mark the end of Ramadan with traditional day-long family festivities and feasting. AFP PHOTO/Jewel SAMAD        (Photo credit should read JEWEL SAMAD/AFP/GettyImages)

हे मेरे देश के मुसलमानों
तुम मानों या ना मानों
हमने तुम्हारे लिये
‘बहुत कुछ’ किया है.

हाल ही में हमने
तुम्हारे लिये “मेवात” किया है.
हमारे गौपुत्रों ने तुम्हें
अपनी “मर्दानगी” का
सुबूत दिया है.

कान खोल कर सुनों
अगर तुम्हारे लोग
हमारी “गऊओं” की तरफ़
नज़र भी उठायेंगे.
हम तुम्हारी बेटियों की
“अस्मत” चबा जायेंगे.

एक बात एकदम साफ़ साफ़
समझ लो मलेच्छों!
हमारे पशु भी
तुमसे ज्यादा “पवित्र” हैं.

तुम कहीं अख़लाक़ का हश्र
भूल ना जाओ इसलिये
अभी अभी हमने
गौ-मातेश्वरी को
तुम्हारा “अय्यूब ” चढ़ाया है.

याद रखो
मुसलसल ईमान वालों.
अभी अभी हमने
तुम्हारे लिये “बिजनौर” किया है.
हां, बेटियां छेड़ी तुम्हारी ही
और तुम्हारे ही बेटे क़त्ल किये है.

इस साल ही लाये हैं
हम तुम्हारे लिये
एकदम नई ऩवेली “पैलेटगन”
हमें अंधभक्त कहने वालों
जो तुमकों भी अंधा कर देगी.

यह देश हमारा है
और तुम भी,
तुम्हारी जान भी हमारी है.
तुम्हारा यहां कुछ भी नहीं है.
हम जब चाहें तब
गौकशी, तिरंगा, पाकिस्तान
आतंकवाद, राष्ट्रवाद
किसी भी नाम पर
हर सकते है तुम्हारे प्राण.

हालांकि हम यह भी जानते है कि
हो रहा है तुम्हारे साथ
शायद ” कुछ ग़लत ”
और हां कर भी हम ही रहे है.
लेकिन हम आर्युुपुत्र है,
इसके अलावा
हम कर भी क्या सकते है ?

-भँवर मेघवंशी

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता है. उनसे bhanwarmeghwanshi@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है )

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