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सपा सरकार को क्लीनचिट देने वाले मौलाना यह बताएं कि उन्हें पैसा चेक से मिला है या नक़द…?

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published September 13, 2013 19 Views
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BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : 16 सितंबर से यूपी में विधान सभा सत्र चलने वाला है. यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने वादे के मुताबिक निमेष कमीशन की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखें. रिहाई मंच 15 सितंबर की शाम को रिहाई मशाल मार्च निकालेगा और 16 सितंबर से भूख हड़ताल करेगा. हम प्रदेश की अवाम से इंसाफ की इस जंग में अधिक से अधिक तादाद में शिरकत करने की अपील करते हैं. आज जब मौलाना खालिद हमारा बच्चा हमारे बीच नहीं है तब यह जिम्मेदारी हमारी और बढ़ जाती है कि उस बेगुनाह के ऊपर लगे आतंक के ठप्पे को हम हटवाएं और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भिजवाएं. यह बातें आज रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने अनिश्चित कालीन धरने के 115 वें दिन लोगों को संबोधित करते हुए कहा.

रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव और शाहनवाज़ आलम ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, जनवादी बुद्धिजीवी और राजनीतिक कार्यकर्ता जीएन साईबाबा की एनआईए, दिल्ली और महाराष्ट्र पुलिस द्वारा उनके दिल्ली स्थित आवास से माओवादी बताकर की गयी गिरफ्तारी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर कॉर्पोरेट परस्त सरकारों द्वारा  खुलेआम हमला है.

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जेएनयू के छात्र और संस्कृतिकर्मी हेम मिश्रा और चर्चित मानवाधिकार नेता, पत्रकार और राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिए काम करने वाले प्रशांत राही को भी इसी तरह जनता के आंदोलनों से सहानुभूति रखने वाले बुद्धिजीवियों की आवाज दबाने के लिए गिरफ्तार किया गया. जिससे सरकारों की जनविरोधी मानसिकता उजागर होती है. रिहाई मंच तत्काल प्रोफेसर साईबाबा, हेम मिश्रा और प्रशांत राही की रिहाई की मांग की.

Rihai Manch Indefinite dharna completes 115 Daysइंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि जिस तरीके से आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को सदन में रखने की मांग को लेकर लगाए जा रहे रिहाई मंच के पोस्टरों को पूरे प्रदेश में कहीं पुलिस तो कहीं सपा के लोग फाड़ रहे हैं, उससे साफ हो गया है कि सपा बेगुनाहों की रिहाई पर वादा खिलाफी  और दंगों के चलते खिसकते जनाधार से बौखला गई है. आखिर जगह-जगह चाहे वो लखनऊ हो या कानपुर में रिहाई मंच के पोस्टरों पर आपत्ती करने वाले पुलिस प्रशासन को यह बताना चाहिए कि सरकार द्वारा गठित एक न्यायाधीश की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग पर वह किस आधार पर आपत्ती कर रही है. सिर्फ इसलिए कि वो किसी मुसलमान लड़के की बेगुनाही का सबूत है.

उन्होंने कहा हम यूपी के प्रशासन से कहना चाहेंगे कि वो ज्यादा परेशान न हो रिहाई मंच का यह आंदोलन उत्तर प्रदेश में सैकड़ों पुलिस वालों को जेल की सलाखों के पीछे भेजवाएगा, जिन्होंने आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों की फर्जी तरीके से गिरफ्तारी की। आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट ही 35 से अधिक आईपीएस अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे भिजवा देगी और आईबी के ऐसे बड़े अधिकारियों के चेहरे पर से नकाब हटाएगी, जिन्होंने फर्जी तरीके से न सिर्फ खालिद मुजहिद और तारिक़ कासमी की गिरफ्तारी करवाई, बल्कि आईबी के लोगों ने ही प्रदेश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने में भी भूमिका निभाई.

धरने के समर्थन में आए जामा मस्जिद उन्नाव के सदर इमाम ज़मीर अहमद खान ने कहा कि मुजफ्फर नगर ही नहीं पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुकूमत की नाकामी और आपराधिक चुप्पी से मुसलमानों पर जो कहर बरपा किया गया है वह कोई नयी घटना नहीं है. इससे पहले भी पूरे उत्तर प्रदेश में चालिस से अधिक बड़े-बड़े दंगों में सपा संरक्षित सांप्रदायिक ताकतों द्वारा मुसलमानों का जो जानी और माली नुकसान हुआ है उसे प्रशानिक चूक और अधिकारियों के सर ठीकरा फोड़कर सरकार अपनी नाकामी नहीं छुपा सकती. कुछ कथाकथित मुस्लिम लीडर और सत्ता परस्त उलेमा अपने जाती फायदे के लिए समाजवादी पार्टी व मुलायम सिंह के गुनाहों को धुलने के लिए अखबारी बयान छपावाकर मुसलमानों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं. इसी तरह कल्याण सिंह के हिमायत में भी यही ड्रामे बाजी कराई गई थी.

मुलायम सिंह कह रहे हैं कि मुजफ्फरनगर दंगे से हमने सबक सीखा. हम इस मंच से मुलायम से पूछना चाहते हैं कि वो पिछले पौने दो साल के दंगों से क्यों नहीं सबक ले पाए. आपके इंसाफ का इंतजार कोसी कलां, अस्थान, फैजाबाद, प्रतापगढ़, बरेली समेत सैकड़ों जगहों पर हुई सांप्रदायिक हिंसा की वारदातों के बाद मुसलमान मायूस हो गया है. वैसा ही वादा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से किया जा रहा है.

अब्दुल हलीम सिद्दीकी ने कहा कि ऑल इंडिया सुन्नी बोर्ड के सदर मौलाना मुश्ताक को बताना चाहिए कि उन्होंने एसएमए काजमी और दरगाह शाहमीना शाह के सज्जादानशीन पीरजादा राशिद अली मिनाईं के साथ मिलकर मुलायम सिंह के सेक्यूलर होने और मुजफ्फनगर में हुए दंगों पर उन्हें क्लीनचिट देने का काम किन तथ्यों के आधार पर किया और इस झूठ के लिए उन्हें सपा से कितने पैसे मिले हैं और यह पैसा उन्हें चेक से मिला है या नकद…

रिहाई मंच के धरने के समर्थन में बाराबंकी से आए मोहम्मद शाकिर बहलीम ने कहा कि जनता वोट देकर अपना रहनुमा चुनती है लेकिन हुकूमत में बैठे हुए हमारे रहनुमाओं ने इंसाफ करना बंद कर दिया. आज केंद्र सरकार हो या प्रदेश की सरकार मुसलमानों के साथ कोई भी इंसाफ नहीं कर रहा है. आज आतंकवाद के नाम पर सैकड़ों बेगुनाह नौजवान जेलों में बंद हैं. जिनको इंसाफ नहीं मिल रहा है.

रिहाई मंच ने मजलूमों की जिस लड़ाई को छेड़ रखा है और आज जिसके 115 दिन हो चुके हैं, इसने इंसाफ की लड़ाई में एक नई तारीख रच दी है कि सरमाएदारी की दुनिया में आज भी इंसाफ के लिए लोग जान लगा देंगे. हुकूमतों की बौखलाहट साफ कर रही है कि रिहाई मंच का धरना इंसाफ दिलाकर ही मानेगा.

धरने के समर्थन में आज़मगढ़ से आए मुस्लिम मजलिस के नेता शाह आलम शेरवानी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव जो मेरठ और मलियाना के 41 मुस्लिम नौजवानों जिन्हें सांप्रदायिक पीएसी ने कत्ल करके नहर में डाल दिया था और जांच कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्होंने जो बेमन से कार्यवाई की उससे उनके साम्प्रदायिक जेहनियत को मुसलमान पहले ही समझ चुका है. जहां लगभग सत्रह पीएसी वालों पर 302 का मुक़दमा लगा और वो आज भी सर्विस कर रहे हैं और केस कहां हैं किस स्थिति में है उसका पता नहीं.

जब मुलायम कांग्रेस का पाप धुलने में इतने मशगूल हो गए कि उन बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों जिन्हें पीएसी ने कत्ल कर दिया उनको न्याय से वंचित कर दिया तब वो मुजफ्फरनगर में क्या करेंगे इसको समझा जा सकता है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को भूलना नहीं चाहिए की उन्होंने अगर वादे के मुताबिक आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में कोई कोताही की और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाई नहीं की और हमारे आज़मगढ़ के तारिक कासमी की रिहाई नहीं की तो इसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ेगा.

प्रतापगढ़ से आए शम्स तबरेज खान ने कहा कि प्रतापगढ़ के अजगरा रानीगंज की रामपुर खजूर गांव में मुस्लिम नाबालिग से जिस तरीके से गांव के सर्वण जाति के लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया और दोषियों को बचाने के लिए जिस तरह पुलिस ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की, उससे साफ हो जाता है कि सपा सरकार सवर्ण और सामंती मानसिकता के लोगों के साथ है न कि मज़लूमों के साथ.

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