BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Reading: #BlackLivesMatter और अमेरिका का लोकतंत्र…
Share
Font ResizerAa
BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
Font ResizerAa
  • Home
  • India
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Search
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Follow US
BeyondHeadlines > Young Indian > #BlackLivesMatter और अमेरिका का लोकतंत्र…
Young Indianबियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी

#BlackLivesMatter और अमेरिका का लोकतंत्र…

Dr. Mukhtyar Singh
Dr. Mukhtyar Singh Published June 21, 2020 11 Views
Share
9 Min Read
SHARE

लोकतंत्र को परिभाषित करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने कहा था —“लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन है.”

अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतान्त्रिक देश है. अमेरिकी समाज के बारे में माना जाता है कि वहां अभिव्यक्ति का अधिकार पूरी तरह मिला हुआ है. विपक्ष सत्ता पक्ष की खुलकर आलोचना करता है. अमेरिका बार-बार अपने लोकतंत्र पर गर्व करता है और उसकी दुहाई भी देता है.

अमेरिका एक बहुसांस्कृतिक देश है. जिसमें कई धर्म, नस्ल, भाषा आदि के लोग रहते है. यह अमेरिकी समाज की ख़ूबसूरती भी है. अमेरिका में अश्वेत, हिस्पैनिक, मुस्लिम, यहूदी आदि लोग रहते हैं. अधिकांश ईसाई हैं, जिसमें  कैथोलिक और प्रोटेस्टैंट दोनों है. क़रीब 14 फ़ीसद अश्वेत समुदाय के लोग हैं, अमेरीका में धार्मिक अभिव्यक्ति का अधिकार भी मिला हुआ है. वहां इसे बहुसंस्कृति समाज की मज़बूती माना जाता है.

अमेरिका में 1865 में अब्राहम लिंकन ने दास प्रथा को प्रतिबंधित किया था. जिसके लिए गृह युद्ध हुआ था. क़रीब 6 लाख लोग उस गृह युद्ध में मारे गए थे. किन्तु अंत में अब्राहम लिंकन ने दास प्रथा का अंत कर दिया था, यद्यपि इसके लिए उनको जीवन का बलिदान देना पड़ा था. उसके बाद मार्टिन लूथर किंग के नेतृत्व में 1950 के दशक में अश्वेत लोगों के अधिकार के लिए सिविल राइट्स मूवमेंट हुए. तब कहीं जाकर अश्वेत लोगों का अलगाव बंद हुआ.

लेकिन अभी हाल में एक अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की श्वेत पुलिस अफ़सर डेरेक चौविन ने गला दबाकर हत्या कर दी. उस अश्वेत व्यक्ति के न्याय के लिए पूरे अमेरिका में प्रोटेस्ट हो रहे हैं. वाशिंगटन, न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया सहित 40 शहरों में कर्फ्यू लगा हुआ है. कई जगह लूटपाट और आगजनी भी हुई है. एक ख़बर के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी ह्वाइट हाउस में भी घुस गए, जिसके चलते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बंकर में छुपना पड़ा.

अमेरिकी प्रदर्शनकारियों का नारा है — I cant breathe, No justice No peace, Enough is enough. सभी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अश्वेत लोगों पर यह ज़ुल्म अब बहुत हो चुका है, अब नहीं होना चाहिए. इसे हर हालत में बंद होना चाहिए. इसलिए  शांति तभी होगी, जब समाज में न्याय होगा.

मुझे याद है कि जब बराक ओबामा राष्ट्रपति बने थे, तो एक इंटरव्यू में ओबामा से यह पूछा गया कि क्या अमेरिका में नस्लवाद ख़त्म हो गया है? उस समय ओबामा ने कहा था कि मैं इतना भोला नहीं हूं कि एक राष्ट्रपति के बनने से यह प्रथा और अमानवीय भावना ख़त्म हो जाएगी. इसका सीधा-सीधा अर्थ है कि ओबामा ने स्वीकार किया था कि अमेरिका में नस्लवाद मौजूद है.

कुछ बुद्धिजीवी मान रहे हैं कि अमेरिका में नस्लवाद बहुत है. यह जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या कोई अपवाद की घटना नहीं है. यह अमेरिकी समाज को प्रतिबिंबित करती है. पिछले चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प को जीत मिली थी, जिन्होंने खुलेआम महिला विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी भाषण दिए थे. ज्ञात है कि डोनाल्ड ट्रम्प की छवि दक्षिणपंथी की है,  तो इसके कार्यकाल के दौरान नस्लवाद और ज़्यादा  होना लाज़िमी है.

अमेरिका में नस्लवाद की भावना मौजूद है, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि अमेरिका का  लोकतंत्र कमज़ोर है. जब हम लोकतंत्र की तुलना करते हैं, तो किसी के सापेक्ष तुलना करते हैं. कहीं भी लोकतंत्र आदर्श नहीं होता. सापेक्ष की बात की जाती है. तो अमेरिका समाज में एशियाई, अफ़्रीक़ी देशो के मुक़ाबले लोकतंत्र बहुत मज़बूत है.

यदि हम भारत से तुलना करें तो एक स्पष्ट अंतर दिखता है. भारतीय समाज में दलित-आदिवासी के साथ ज़ुल्म होने पर सवर्ण समाज का सहयोग नहीं मिलता, जबकि अमेरिका में अश्वेत के साथ ज़ुल्म होने पर प्रोटेस्ट में श्वेत लोग काफ़ी मात्रा में भाग लेते हैं. अधिकांश श्वेत समाज भी मानता है कि अश्वेत लोगों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए.

भारत में पुलिस का रवैया बहुत दमनकारी होता है. यह दमन तब और बढ़ जाता है जब सरकार का विरोध करने वाले दलित या मुस्लिम हों. नवंबर-दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लगभग 30 लोगों को गोली मारी, जबकि सीएए के विरोध में प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में था. शांतिपूर्ण भी था.

अभी हाल में कोरोना लॉकडाउन में पुलिस ने मज़दूर लोगों पर ज़्यादती की है, जबकि अमेरिकी पुलिस जनता से ज़बरदस्ती नहीं कर रही, बल्कि घुटने टेक कर प्रोटेस्ट बंद करने की अपील कर रही है. हालांकि राष्ट्रपति ट्रम्प बलपूर्वक प्रोटेस्ट को दबाना चाहते हैं, लेकिन उनके ख़िलाफ़ एक बहुत बड़ा तबक़ा है, जो प्रोटेस्ट के समर्थन में है.

सर्वविदित है कि कोरोना महामारी फैली हुई है, और अमेरिका में एक लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. कोरोना के बीच ये प्रोटेस्ट हो रहे हैं. इतनी बड़ी बीमारी का ख़तरा लेकर भी लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. उनका कहना है कि नस्लवाद की इस घुटन के साथ अब नहीं जीना है.

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमेरिका की स्थापना का मुख्य आधार विरोध की आवाज़ थी. अमेरीकी क्रांति इसे ही कहा गया. इस प्रकार उन्होंने प्रोटेस्ट को सही ठहराया है. उन्होंने कहा है कि देश के आदर्शों को प्रयासों के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, और ये प्रोटेस्ट जनता का एक प्रयास है. समाज में कुछ समस्याएं हैं जिन्हें इस प्रकार ही ठीक किया जा सकता है.

अमेरिकी मीडिया भी प्रोटेस्ट करने वालों का ख़ूब साथ दे रहा है. वह इन प्रोटेस्ट को लोकतंत्र के लिए आवश्यक बता रहा  है. सीएनएन, वाशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स आदि भी प्रोटेस्ट के पक्ष में बोल रहे हैं. यदि इसकी तुलना भारत से की जाए तो भारत में मीडिया वंचित वर्ग के आंदोलन के साथ नहीं होता है, वह सरकार और प्रभुत्वशाली वर्ग के साथ खड़ा होता है.

इस प्रकार हम देखते हैं कि यह लोकतंत्र और नस्लवादी प्रभुत्व के बीच यह संघर्ष है. 1776 की महान अमेरिकन क्रांति  जो लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता और न्याय पर आधारित थी. जॉर्ज वाशिंगटन, थॉमस पैन, मेडिसन, जेफ़रसन जैसे महान विचारकों की इस क्रांति में अहम भूमिका थी.

जेफ़रसन ने स्वतंत्रता का घोषणा पत्र में लिखा  था — “सभी मनुष्य सामान हैं, और हर मनुष्य को कुछ अधिकार हैं , जो उससे नहीं छीने जा सकते. ये अधिकार हैं — जीवन , स्वतंत्रता और प्रसन्नता का अधिकार.” 

इन्हीं आदर्शों पर चलते हुए अमेरिका ने अपने लोकतंत्र को सशक्त और मज़बूत किया है. वहीं पिछले कुछ समय से अमेरिका में इन आदर्शों के विरोध में कुछ शक्तियां पनप रही हैं. जैसे चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने नस्लवाद और महिला विरोधी भावना फैलाई थी. अभी भी वे तत्व समाज में विद्यमान हैं. प्रोटेस्ट उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो अमेरिका के लोकतंत्र की लम्बे समय से विरासत रही है, जिसको जॉर्ज वाशिंगटन ने आगे बढ़ाया था. ये प्रोटेस्ट इस बात के सबूत हैं कि इन हालतों में भी अपनी विरोध की आवाज़ दर्ज कराई जा रही है. उम्मीद है कि प्रोटेस्ट के बाद लोकतान्त्रिक भावना और मज़बूत होकर सामने आएगी.

(लेखक जेएनयू से पढ़े हैं. इन दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे हैं. धार्मिक व राजनीतिक मामलों पर लगातार लिखते रहते हैं. इनसे singh.mukhtyar2009@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है. ये उनके अपने विचार हैं.)

TAGGED:Black Lives Matter
Share This Article
Facebook Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Telangana Must Order CBI Inquiry into Alleged Murder of Advocate Moizuddin in Waqf Cases
India Waqf Facts
Waqf Registration Ends With Fears of Vanishing Properties
Exclusive India Waqf Facts
The Waqf Act 2025, Supreme Court Interim Ruling, and the Role of Muslims in Protecting Waqf Properties
Waqf Facts
Supreme Court Verdict on the Waqf Act: Justice or Just Temporary Consolation?
India Waqf Facts Young Indian

You Might Also Like

IndiaLeadYoung Indian

Uttarakhand’s New Minority Education Overhaul: End of Madrasa Board, Curriculum Shift, and Rising State Control Explained

May 10, 2026
Edit/Op-EdI WitnessYoung Indian

The Istanbul’s Drums and Bettiah’s Silence: A Living Tradition, a Fading Voice

March 19, 2026
EducationIndiaLeadYoung Indian

55 Candidates with Muslim Names in UPSC Final List, Check the List

March 9, 2026
IndiaLeadWorldYoung Indian

Indo–Pak Bonhomie Witnessed at Inauguration of Rukn Al Seraj Garments Store in Sharjah with Holy Bible Verses Recitation in Urdu by Pastor Numan

February 3, 2026
Copyright © 2025
  • Campaign
  • Entertainment
  • Events
  • Literature
  • Mango Man
  • Privacy Policy
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?