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Reading: बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद : जानिए अब तक क्या हुआ?
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BeyondHeadlines > India > बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद : जानिए अब तक क्या हुआ?
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बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद : जानिए अब तक क्या हुआ?

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published December 6, 2018 18 Views
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21 Min Read
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BeyondHeadlines Research Desk

1528 : ज़हीरुद्दीन बाबर ने अपने मंत्री ‘मीर बाक़ी’ के द्वारा 1526 ई. में फ़ैज़ाबाद से पांच किलोमीटर और दिल्ली से सात सौ किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण-पूरब में दरिया के किनारे अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया. 3 ख़ूबसूरत गुंबदों पर आधारित यह विशाल व भव्य मस्जिद उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की अज़मत की निशानी बन गई.

1855 : पहली बार यह कहा गया कि इस मस्जिद को बाबर ने भगवान राम के मंदिर को तोड़कर बनाया है. इस मसले पर अयोध्या में दंगा हुआ, जिसमें 75 लोग मारे गए.

1857 : हनुमान गढ़ी के महंत ने बाबरी मस्जिद के सेहन के एक भाग पर क़ब्ज़ा करके एक चबूतरा का निर्माण कर लिया और इसका नाम ‘राम चबूतरा’ दिया.

1859 : अंग्रेज़ों ने तनाव दूर करने हेतु बाबरी मस्जिद और ‘राम चबूतरा’ के बीच एक दीवार खड़ी कर दी.

1885 : 19 जनवरी 1885 को इतिहास में पहली बार यह दावा किया गया कि जहां बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ है, वह राम की जन्म-भूमि थी. इसलिए मस्जिद के क्षेत्र में मंदिर निर्माण करने की अनुमति दी जाए. यह मुक़दमा महंत रामदास ने फ़ैज़ाबाद के न्यायधीश ‘पंडित हरिकृष्ण’ की अदालत में दायर किया था. लेकिन हरिकृष्ण ने इस मुक़दमे को ख़ारिज कर दिया. इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ महंत रामदास ने अंग्रेज़ ज्यूडीशियल कमिश्नर डब्ल्यू पोंग की अदालत में अपील दायर की, जिसे पुनः 1886 में ख़ारिज कर दिया गया.

1934 : 1886 के बाद हिन्दू सांप्रदायिक संगठनों का जुनून फिर भड़का और दंगे के अलावा बाबरी मस्जिद पर धावा बोल दिया गया, जिसके परिणाम में बाबरी मस्जिद के मुख्य द्वार के साथ-साथ दूसरे भागों को भी नुक़सान पहुंचा.

1936 : बाबरी मस्जिद में अस्थायी तौर पर मुसलमानों का दाख़िला बंद कर दिया गया.

1949 : मुसलमान 22 दिसम्बर को आख़िरी बार मस्जिद में नमाज़ अदा कर सके. वो इशा की नमाज़ पढ़कर निकले तो उसी रात कुछ लोगों ने मूर्ति लाकर मस्जिद के मेहराब में रख दी.

1950 : इस घटना के ख़िलाफ़ मुसलमानों ने अदालत में मुक़दमा दर्ज कर दिया जो कि आज तक लटका पड़ा है. दूसरी तरफ़ कुछ हिन्दुओं ने भी मुक़दमा दर्ज करवा दिया, जिसके बाद मुसलमानों और हिन्दुओं दोनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई.

1983 : विश्व हिन्दू परिषद ने बाबरी मस्जिद की जगह मंदिर के लिए ‘आन्दोलन’ पूरी देश में चलाने का ऐलान कर दिया. इसके लिए ‘रथ यात्राएं’ भी निकाली गई. लेकिन इंदिरा गांधी के क़त्ल के कारण यह आन्दोलन दबकर रह गया.

1985 : दिसम्बर में एक हिन्दू मंडल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिला और धमकी दी कि अगर मस्जिद की इमारत 8 मार्च 1986 तक उनके हवाले न की गई तो इसके लिए जन आन्दोलन आरंभ कर दिया जाएगा, और मस्जिद पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर लिया जाएगा.

1986 : 19 जनवरी से विश्व हिन्दू परिषद ने अपने मक़सद के लिए क़ानूनी जंग का आरंभ कर दिया. फ़ैज़ाबाद के ज़िला जज ने मस्जिद के दरवाज़े हिन्दुओं के लिए खोलने की इजाज़त दे दी. मस्जिद पर क़ब्ज़ा किया गया और वहां पूजा-पाठ शुरू कर दी गई. इस पर मुसलमानों ने विरोध किया तो इलाहाबाद और बाराबंकी में दर्जनों मुसलमानों को मार दिया गया. मुसलमानों की ओर से मस्जिद पर इस क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में अपील इलाक़े के एक मुसलमान मुहम्मद हाशिम अंसारी द्वारा दायर कर दी गई.

—प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मस्जिद की इमारत से 585 मीटर दूर सितम्बर में मंदिर के निर्माण के लिए शिलान्यास की अनुमति दे दी और पूरे मुल्क से कारसेवक इसके लिए ईंटे लेकर अयोध्या आए.

—यूपी के कई हिस्सों में दंगा हुआ और लगभग 600 व्यक्ति इस दंगे में मारे गए.

1990 : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में सोमनाथ से अयोध्या तक साढ़े सात सौ किलोमीटर की रथ यात्रा निकाली गई. इस यात्रा के दौरान काफ़ी मुसलमानों का खून बहाया गया. एक लाख कारसेवक अयोध्या में एकत्रित हुए. मुलायम सिंह की सरकार ने सख़्ती दिखाई लेकिन कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद के गुंबदों को आंशिक तौर पर नुक़सान पहुंचाया. 30 कारसेवक पुलिस की गोली से मारे गए, जिसके परिणामस्वरूप वी.पी. सिंह की सरकार चली गई. मुलायम सिंह की हुकूमत में कट्टरपंथियों ने एक बार फिर हमला किया जो पुलिस के संघर्ष के बाद नाकाम रहा.

—30 अक्टूबर को हज़ारों तथाकथित कारसेवकों ने अयोध्या में प्रवेश कर ‘विवादित ढांचे’ के ऊपर भगवा ध्वज फहराया.

1991 : 7 अक्टूबर को भाजपा सरकार ने बाबरी मस्जिद के इर्द-गिर्द की 2.67 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर ली. इस घटना के 18 दिन बाद 25 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हुक्म दिया कि विवादित स्थान पर कोई मंदिर का निर्माण नहीं कर सकता, लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस हुक्म की बग़ैर परवाह किए बाबरी मस्जिद कॉम्पलेक्स में मंदिर के निर्माण की राह हमवार करनी शुरू कर दी और मस्जिद के कुछ भागों को शहीद भी कर दिया गया.

1992 : जनवरी में उत्तर प्रदेश सरकार ने मस्जिद के गिर्द 10 फुट ऊंची दीवार का निर्माण करवा दिया. अयोध्या डेवलपमेंट ने चंद मंदिर गिराकर और एक मुस्लिम क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करके इस ज़मीन को अपने क़ब्ज़े में ले लिया.

— 21 मार्च को विश्व हिन्दू परिषद की रामकथा पार्क के निर्माण के लिए 142 एकड़ भूमि आवंटित कर दी गई.

— 19 मई को मस्जिद के एक तरफ़ खुदाई आरंभ कर दी गई. विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय सचिव अशोक सिंघल ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के सिलसिले में बुनियादी काम आरंभ हो चुका है.

— 23 जून को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को खुदाई बंद करने का हुक्म दिया, मगर इस हुक्म को सरकार ने नहीं माना.

— 9 जुलाई को बाद में बनाए गए राम मंदिर के मुख्य द्वार के निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया. साधुओं और कारसेवकों ने वहां ‘इंतज़ामिया’ के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था.

— 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने घटनाओं की जानकारी प्राप्त करने का हुक्म दिया.

— 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने साधुओं से एक समझौता कर लिया और काम को बंद करके हुकूमत को समस्याओं के हल के लिए तीन महीने की मोहलत दी.

— सितम्बर महीने में भारत के गांव-गांव में ‘श्रीराम पादुका पूजन’ का आयोजन किया गया और 6 दिसंबर, 1992 के दिन हिन्दुओं से अयोध्या पहुंचने का आह्वान किया गया.

— 23 नवम्बर को राष्ट्रीय एकता कौंसिल ने नरसिम्हा राव को सुप्रीम कोर्ट के हुक्म पर अमल करवाने के लिए सारी शक्ति दे दी. इसके बाद 15 हजार की पैरामिलट्री फ़ोर्स को मस्जिद के सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया गया.

6 दिसम्बर 1992 : तीन लाख कारसेवक अयोध्या में एकत्रित हुए और बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया.

16 दिसम्बर 1992 : मस्जिद के गिराए जाने के मामले की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन हुआ.

1993 : भक्तों द्वारा रामलला की दैनिक सेवा-पूजा की अनुमति दिए जाने के संबंध में अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की. 1 जनवरी, 1993 को सेवा-पूजा की अनुमति दे दी गई. तब से दर्शन-पूजन का क्रम लगातार जारी है.

—पी.वी. नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन केन्द्र सरकार के एक अध्यादेश द्वारा श्री रामलला की सुरक्षा के नाम पर लगभग 67 एकड़ ज़मीन अधिग्रहीत की गई. यह अध्यादेश संसद ने 7 जनवरी, 1993 को एक क़ानून के ज़रिए पारित किया था.

जनवरी 2002 : प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग शुरू किया, जिसका काम विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना था.

27 फरवरी 2002 : सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची तो कुछ स्थानीय कट्टरपंथियों ने साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर आग लगा दी. इसमें 59 लोग जलाकर मार दिए गए. ये सभी ‘कारसेवक’ थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे. इसके परिणाम स्वरूप पूरे गुजरात में दंगे हुआ. जिस वक़्त ये हादसा हुआ, नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. इस घटना को एक साज़िश के तौर पर देखा गया. ट्रेन में भीड़ द्वारा पेट्रोल डालकर आग लगाने की बात गोधरा कांड की जांच कर रहे नानावती आयोग ने भी मानी.

28 फरवरी 2002: गोधरा से कारसेवकों के शव खुले ट्रक में अहमदाबाद लाया गया. इन शवों को परिजनों के बजाए विश्व हिंदू परिषद को सौंपा गया. जल्दी ही गोधरा ट्रेन की इस घटना ने गुजरात में दंगों का रूप ले लिया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, दंगों में कुल 1044 लोग मारे गए, जिनमें 790 मुसलमान और 254 हिन्दू थे.

13 मार्च 2002 : सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फ़ैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरक़रार रखी जाएगी और किसी को भी सरकार द्वारा अधग्रिहीत ज़मीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी. केन्द्र सरकार ने कहा कि अदालत के फ़ैसले का पालन किया जाएगा. विश्व हिन्दू परिषद ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी. सैकड़ों हिन्दू कार्यकर्ता अयोध्या में इकठ्ठा हुए.

15 मार्च 2002 : विश्व हिन्दू परिषद और केंद्र सरकार के बीच इस बात को लेकर समझौता हुआ कि विहिप के नेता सरकार को मंदिर परिसर से बाहर शिलाएं सौंपेंगे. रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास और विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल के नेतृत्व में लगभग 800 कार्यकर्त्ताओं ने सरकारी अधिकारी को अखाड़े में शिलाएं सौंपीं.

अप्रैल 2002 : अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक़ को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की.

जनवरी 2003 : रेडियो तरंगों के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं, लेकिन कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकला.

मार्च 2003 : केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजा-पाठ की अनुमति देने का अनुरोध किया, जिसे अदालत द्वारा ठुकरा दिया गया.

मार्च-अगस्त 2003 : इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं. मुसलमानों में इसे लेकर अलग मत था. सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने 20 बिंदुओं पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए एक रिपोर्ट को सबूत के तौर पर पेश किया.

मई 2003 : सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराए जाने के मामले में उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के ख़िलाफ़ पूरक आरोप-पत्र दाख़िल किए.

अगस्त 2003 : भाजपा नेता और उप-प्रधानमंत्री ने विहिप के इस अनुरोध को ठुकराया कि राम मंदिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए.

सितंबर 2003 : एक अदालत ने फैसला दिया कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए.

अप्रैल 2004 : आडवाणी ने अयोध्या में अस्थायी राम मंदिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण ज़रूर किया जाएगा.

जुलाई 2004 : शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सुझाव दिया कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंगल पांडे के नाम पर कोई राष्ट्रीय स्मारक बना दिया जाए.

अक्टूबर 2004 : आडवाणी ने अयोध्या में मंदिर निर्माण की बीजेपी की प्रतिबद्धता दोहराई.

जनवरी 2005 : लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया.

जुलाई 2005 : पांच संदिग्ध आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरी एक जीप का इस्तेमाल करते हुए विवादित स्थल पर हमला किया. सुरक्षा-बलों की कार्रवाई में पांच आतंकियों सहित 6 लोग मारे गए, हमलावर बाहरी सुरक्षा घेरे के नज़दीक ही मार डाले गए.

06 जुलाई 2005 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के दौरान ‘भड़काऊ भाषण’ देने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी को भी शामिल करने का आदेश दिया. इससे पहले उन्हें बरी कर दिया गया था.

28 जुलाई 2005 : लालकृष्ण आडवाणी 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में गुरुवार को रायबरेली की एक अदालत में पेश हुए. अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी के ख़िलाफ़ आरोप तय किए.

04 अगस्त 2005 : फ़ैज़ाबाद की अदालत ने अयोध्या के विवादित परिसर के पास हुए हमले में कथित रूप से शामिल चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा.

20 अप्रैल 2006 : कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष लिखित बयान में आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था और इसमें भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल और शिवसेना की मिलीभगत थी.

जुलाई 2006 : सरकार ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बने अस्थाई राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव किया. इस प्रस्ताव का मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया और कहा कि यह अदालत के उस आदेश के ख़िलाफ़ है, जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे.

19 मार्च 2007 : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनावी दौरे के बीच कहा कि अगर नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती. उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई.

30 जून 2009 : लिब्रहान आयोग ने गठन के पूरे 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार और विहिप नेता अशोक सिंहल को मस्जिद विध्वंस के लिए दोषी ठहराया गया.

07 जुलाई, 2009 : उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफ़नामे में स्वीकार किया कि अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 महत्वपूर्ण फाइलें सचिवालय से ग़ायब हो गई हैं.

24 नवम्बर, 2009 : लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश. आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया और नरसिंह राव को क्लीन चिट दी.

20 मई 2010 : बाबरी विध्वंस के मामले में लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाने को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका हाईकोर्ट में खारिज.

26 जुलाई 2010 : राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी.

8 सितंबर 2010 : अदालत ने अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फैसला सुनाने की घोषणा की.

17 सितंबर 2010 : हाईकोर्ट ने फैसला टालने की अर्ज़ी ख़ारिज की.

24 सितम्बर 2010 : हाईकोर्ट लखनऊ के तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाया जिसमें मंदिर बनाने के लिए हिन्दुओं को ज़मीन देने के साथ ही विवादित स्थल का एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए दिए जाने की बात कही गई. मगर यह निर्णय दोनों को स्वीकार नहीं हुआ. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर स्थगनादेश दे दिया. अब इस विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है.

28 सितंबर 2010 : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया.

30 सितंबर 2010 : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने इस विवादित ज़मीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ़ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में ज़मीन बंटी. इस फ़ैसले को आस्था के आधार पर दिया गया फ़ैसला बताया गया.

9 मई 2011 :  सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.

जुलाई 2016 : बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन

फ़रवरी 2017 : हाशिम अंसारी की मौत के बाद उनके बेटे इक़बाल अंसारी को इस मामले का मुद्दई माना गया.

21 मार्च 2017 : बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या विवाद पर जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित मामले पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों पक्ष आपस में मिलकर इस मामले को सुलझाएं.

19 अप्रैल 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया.

29 अक्टूबर 2018 : अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद ज़मीन विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई एक बार फिर जनवरी 2019 तक के लिए टल गई है. अयोध्या मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मसले पर अगली सुनवाई जनवरी 2019 में एक उचित पीठ के समक्ष होगी.

12 नवंबर 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में दायर याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई से इनकार कर दिया. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि उसने पहले ही अपीलों को जनवरी में उचित पीठ के पास सूचीबद्ध कर दिया है.

25 नवंबर 2018 : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना ने ‘धर्मसभा’ बुलाया गया. मीडिया के ज़रिए कहा गया कि इस धर्मसभा में ढ़ाई लाख कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है, लेकिन लोगों की संख्या कुछ हज़ारों में रही.

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